समय से चुनाव नहीं करना सरकार की विफलता, हाई कोर्ट ने सरकार को 3 सप्ताह के भीतर नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी करने का दिया निर्देश…

झारखंड(JHARKHAND) में नगर निकाय चुनाव का रास्ता साफ हो गया है हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत गुरुवार को इस मामले को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को तीन सप्ताह के भीतर चुनाव की अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत में टिप्पणी करते हुए कहा कि समय से चुनाव नहीं करना सरकार की सफलता है।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में सरकार को चुनाव करने का निर्देश दिया और आदेश की प्रति राज्य चुनाव आयोग मुख्य सचिव और नगर विकास सचिव को भेजने का निर्देश दिया है। नगर निगम चुनाव करने के लिए पूर्व पार्षद रोशनी खलखो एवं अन्य याचिका दाखिल की थी बता दे की नगर निकाय का कार्यालय अप्रैल 2023 में समाप्त हो गया था लेकिन सरकार ने ट्रिपल टेस्ट करने के बाद चुनाव करने की बात कही।

इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया गया सरकार के इस आदेश के खिलाफ रांची नगर निगम के कुछ पार्षदों ने याचिका दायर की और अदालत से कहा कि सरकार ट्रिपल टेस्ट के नाम पर चुनाव लटक रही है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अधूरी व्याख्या कर रही है। ऐसे में अदालत सरकार को चुनाव करने का आदेश दें।

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि किशन राव गवली बनाम महाराष्ट्र सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रिपल टेस्ट करने के बाद ही निकाय या पंचायत चुनाव कराया जाएगा राज्य में अभी ट्रिपल टेस्ट नहीं हुआ है ट्रिपल टेस्ट करने के बाद चुनाव कराया जाएगा प्रार्थियों की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता विनोद सिंह ने अदालत को बताया कि सरकार प्रतिवादानू का उल्लंघन तो कर रही है साथ ही अधूरी सूचना देकर अदालत को गुमराह कर रही है।

सुरेश महादन बनाम मध्य प्रदेश सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ओबीसी आरक्षण ट्रिपल टेस्ट कराकर ही चुनाव करना है लेकिन इसका मतलब यह नहीं की चुनाव ही नहीं कराया जाए किसी भी परिस्थिति में चुनाव नहीं करना संविधान की मूल अवधारणा का हनन है।ओबीसी आरक्षण कर चुनाव करना एक प्रक्रिया है लेकिन इसके कारण चुनाव नहीं करना गलत है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस निर्देश के साथ चुनाव नहीं रोकने का निर्देश दिया है इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार के साथ देश के सभी राज्यों के लिए बताया है। प्रार्थी के अधिवक्ता विनोद सिंह ने कहा कि सरकार का जवाब अधूरा है और झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना की है।प्रार्थियों ने अलग-अलग से सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में इसी आदेश क्या हवाला देते हुए अलग से अवमानना याचिका भी दायर की है

NEWS ANP के लिए अंजलि चक्रवर्ती की रिपोर्ट…

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