फर्जी जीएसटी बिल बनाकर टैक्स चोरी करने वाले व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है। अब इस तरह के मामलों में थाने में एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी, और ईडी (Enforcement Directorate) भी बिना अनुमति के प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत जांच नहीं कर सकेगी।
अब से किसी भी फर्जी बिलिंग या टैक्स चोरी के मामले में ईडी या स्थानीय पुलिस को कार्रवाई से पहले डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
नई व्यवस्था के तहत फर्जी जीएसटी बिल जारी करने वालों पर केवल जीएसटी अधिनियम की धाराओं के तहत ही कार्रवाई की जाएगी।
डीजीजीआई और सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम्स (CBIC) का मत है कि जीएसटी एक “विशेष अधिनियम” है, जिसमें दंड का स्पष्ट प्रावधान पहले से मौजूद है।
इसलिए, जीएसटी उल्लंघन को पीएमएलए के तहत अपराध नहीं माना जाएगा, क्योंकि इससे Ease of Doing Business पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2024–25 में फर्जी बिलिंग से केंद्र सरकार को ₹58,772 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
Fake GST Bill Case Relief : क्या कहा गया है नए आदेश में
- डीजीजीआई द्वारा सभी मामले की सूचना सेंट्रल इकोनॉमी इंटेलिजेंस ब्यूरो (CEIB) और रिजनल इकोनॉमी इंटेलिजेंस काउंसिल (REIC) को साझा की जाएगी।
- अन्य एजेंसियां उन्हीं सूचनाओं के आधार पर अपने अधिनियमों के तहत जांच कर सकेंगी।
- जब किसी अपराध पर विशेष व सामान्य अधिनियम दोनों लागू होते हैं, तो विशेष अधिनियम (GST Act) को वरीयता दी जाएगी।
- यदि ईडी या पुलिस किसी मामले की जांच करना चाहती है, तो उन्हें पहले प्रधान महानिदेशक, डीजीजीआई से अनुमति लेनी होगी।
- अनुमति के लिए एजेंसियों को सभी तथ्य, आरोपी की भूमिका और दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।
व्यापारियों के लिए राहत, लेकिन सतर्कता जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश उन व्यापारियों के लिए राहत का काम करेगा जो अनजाने में या तकनीकी त्रुटि से फर्जी बिलिंग के दायरे में आ जाते हैं, लेकिन जानबूझकर टैक्स चोरी करने वालों पर विभागीय सख्ती जारी रहेगी।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

