CM HEMANT SOREN MASTERSTROKE PLAN IN STATE ELECTION POLITICS :सौगात पर सौगात! क्या ये हेमंत सरकार का चुनावी लड्डू हैं!

रांची(RANCHI):लोकतंत्र का महापर्व चुनाव लोकशाही की एक परम्परा है. जिसमे जनता जनार्दन ही सरकार को चुनती और तय करती है. ये एक सिलसिला चलते ही रहता है.
झारखण्ड की पिछले पांच साल की सरकार देखें तो इंडिया गठबंधन की चल रहीं है. हेमंत सोरेन के हाथों बागडोर है, कुछ महीने बाद यहां विधानसभा चुनाव भी होने वाला है. ऐसे मौक़े पर सभी पार्टियां खूब जोर आजमाइश अपने -अपने तरीके से कर रहीं है.अभी कुछ महीनों से देंखे तो चुनाव को लेकर गहमागहमी और सरगर्मियां अपने उफान पर है. हेमंत सरकार सौगातों की बारिश कर रहीं है. सबसे चर्चित मईया योजना में भी बदलाव केबिनेट की बैठक में किया गया, जिसमे अब 18 साल की आयु की महिला भी 1000 रुपए हर महीने मिलने वाली सम्मान राशि हासिल कर सकेगी. पहले 21 साल की उम्र निर्धारित की गई थी. लेकिन, इसे बदल दिया गया, ताकि और महिलाए भी इस दायरे में आए.

इसके साथ ही कैबिनेट की बैठक में नये अधिवक्ताओं को जो अपने करियर की शुरवात कर रहें है, उन्हें भी पांच साल ताक पांच हजार रुपए स्टाइपेंड मिलेंगे, ताकि अपने प्रोफेशन से नहीं हटे. साथ ही पांच लाख मेडिकल बीमा भी मिलेगा और तो और 65 साल से अधिक वरिष्ठ अधिवक्ताओं के पेशन को 7000 से बढाकर 14000 रुपए कर दिया गया.सरकार के इस कदम से राज्य के तक़रीबन 30,000 हजार वकीलों को फायदा पहुंचने का अनुमान है.
इन सौगातों के अलावा इस चुनावी वर्ष में हेमंत सरकार ने सहायक पुलिसकर्मियों का मानदेय 13 हजार रुपए कर दिया.इससे लोगों में खुशी की लहर है.
दरअसल, चुनाव की रणभेरी बजने को है और हेमंत सरकार सौगातों की तो मानो बरसात और पिटारा खोल दी है. सरकार ने एक से एक योजनाओं को लाकर हर तबके को तक़रीबन ख़ुश करने पर लगी है. अगर योजनाओं की बात करें तो इसकी फेहरिश्त अच्छी -खासी है.जिसमे अबुवा आवास योजना, अबुआ स्वास्थ्य योजना,सावित्रीबाई फूले किशोरी समृद्ध योजना,गुरूजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना,झारखण्ड एकलव्य प्रशिक्षण योजना, मुख्यमंत्री सारथी योजना,मुख्यमंत्री सूखा राहत योजना,मुख्यमंत्री शिक्षा प्रोत्साहन स्कीम शामिल है.
पिछले पांच साल की सरकार को देखें तो हेमंत सरकार ने तमाम झंझावतों से गुजरी. खुद कथित जमीन घोटालों के आरोप में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जेल जाना पड़ा, काफ़ी सियासी उठा- पटक, बिखराव, तल्ख़ीयां, तोहमते और तनाव पसरा दिखलाई पड़ा. सरकार को कानून इंतजामत, बांग्लादेशी घुसपैठ, भ्रष्टाचार, अपराध, खनन -शराब घोटालों के आरोप विपक्ष लगातार लगाते रहा हैं. अभी भी इसपर लगातार भाजपा जोर -शोर से मुखर है और सरकार के कार्यकाल को नाकाम ठहरा रही है.

सवाल है कि क्या हेमंत सरकार की ये योजनाएं जनता को आगामी चुनाव में लुभा पायेगी?, क्या इंडिया गठबंधन वोट बटोर सकेगा? और क्या हेमंत सोरेन की सौगतों की पोटली फिर उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठायेगी?.
ये तमाम सवाल चुनाव की इस दहलीज पर खटकते है. कहीं न कहीं ये तो सच्चाई है कि आगामी चुनाव के लिए ही इतनी तेज़ी से ये सब किया जा रहा है.ताकि सत्ता न फ़िसले. याद होगा दिल्ली की केजरीवाल सरकार भी इसी तरह से करती आई है और सत्ता भी हासिल की और इन सौगातों के जरिए सियासत का ट्रेंड भी बदला. दूसरे लफ्जों में कहें तो ये मतदाताओं को लुभाने की कवायद ही है. जिसे अब तक़रीबन सब पार्टियां इस नुस्खे को आजमा रही है.

अगर आसनी से समझा जाए तो आम आवाम बढ़ती महंगाई और बढते बाजारवाद के चलते बढ़ती जरूरतों से परेशान है. आज एक आम इंसान के लिए घर चलाना और जिंदगी की गाड़ी खींचना इतना आसान नहीं है. ऐसे में ये योजनाएं तो लाजमी है की कुछ मददगार होगी ही, भले ये ऊंट के मुंह में जीरा ही क्यों न हो.
लेकिन, योजना के साथ ही साथ सरकार को रोजी -रोजगार, पलायन और अन्य मूलभूत चीज़ों पर भी ध्यान देकर दुरुस्त करने की जरुरत है.ताकि, आम आवाम सबल और आत्मनिर्भर बन सके. इसके लिए प्रदेश के विकास की एक मजबूत रुपरेखा खींच कर ही हम तरक्की की राह पकड़ सकते हैं.जिससे ही लोगों की तकदीर बदल सकती है.
सवाल ये हैं कि आज झारखण्ड के वज़ूद में आए 25 साल यानि तक़रीबन ढाई दशक होने को हैं. क्या हमारा प्रदेश इस दरमियान जिस मकसद के लिए बना था, क्या वो चिज़े हासिल हुई? क्या आदिवासी मूलवासियों की तकदीर बदली? क्या झारखण्ड का आवाम आज वाकई में खुशहाल जिंदगी बसर कर रहा हैं?

दरअसल, हमे इन सवालों को भी टटोलना चाहिए. और आत्ममंथन करना चाहिए कि आज हमारा झारखण्ड कहां खड़ा हैं.
चुनाव के मौसम में हेमंत सरकार योजनाओं की जाल बिछा तो रहीं हैं.
लेकिन, प्रश्न यहीं हैं कि इन लोकलुभावन योजनाओं को जनता कैसे लेती हैं? क्या वाकई हेमंत सोरेन की सरकार सबकी पसंदीदा थी? और क्या पिछले पांच साल की सरकार ने शानदार काम किया?
इन सारे सवालों का जवाब जनता ही आगामी विधानसभा चुनाव में देगी. साथ ही सौगातों के सहारे हेमंत सोरेन फिर मुख्यमंत्री की कुर्सी में काबिज हो पाते हैं या नहीं इसका भी जवाब मिल जायेगा...

NEWSANP के लिए रांची से शिवपूजन सिंह की रिपोर्ट

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