बिहार(BIHAR): जाति जनगणना को लेकर पिछले कुछ वर्षों से तेज हुई राजनीति के बीच अब केंद्र सरकार ने भी इसकी घोषणा कर दी है बुधवार को राजनीतिक मामलों की कैबिनेट कमिटी ने जनगणना के साथ जाति गणना को हरी झंडी दे दी है. आजादी के बाद यह पहली बार होगा क्योंकि अब तक कई बार जाति सर्वे तो हुए लेकिन पूरी गणना नहीं हुई. यही कारण है कि, सरकार की ओर से फैसले की घोषणा के साथ फिर से राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई. वहीं, मामले में जनसुराज पार्टी के सूत्रधार और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने नवगछिया में कहा कि, जातीय जनगणना तो केंद्र सरकार अभी घोषित की है, बिहार में जातीय जनगणना 2 से 3 वर्ष पूर्व हो चुका हैं.
बीजेपी और नीतीश सरकार पर बोला हमला
आगे प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि, यहां पर तो सवाल यह पूछा जाना चाहिए कि जो जातीय जनगणना हुआ उससे जो नतीजे निकले उसपर सरकार ने क्या किया. यही भाजपा और नीतीश की सरकार है जिन्होंने कहा था कि, 94 लाख गरीब परिवारों को 2-2 लाख रुपया दिया जायेगा. लेकिन, किसी को एक रुपया भी नहीं मिला है. जातीय जनगणना में यह बताता गया कि, सिर्फ 3 प्रतिशत दलित समाज के बच्चे 12वीं पास कर रहे हैं. 5 प्रतिशत से कम अतिपिछड़ा समाज के बच्चे 12वीं पास कर रहे हैं, तो सरकार ने उस पर कोई कार्रवाई तो की नहीं. जातीय जनगणना करने से समाज का सुधार नहीं होगा. जातीय जनगणना में जो आंकड़े आयेंगे उसपर योजना बनाइगा उस पर काम कीजियेगा तब न सुधार होगा. किताब खरीदने से आदमी विद्वान नहीं होता है. किताब को पढ़ना पड़ेगा तब न सुधार होगा.
सरकार को दी बड़ी नसीहत
प्रशांत किशोर इतने पर ही नहीं रूके. बल्कि आगे उन्होंने यह भी कहा कि, दलितों की गणना तो 78 सालों से हो रही है. मुसलमानों की गणना 18 सालों से हो रही है. ये आंकड़े बता रहे हैं कि, ये लोग गरीब हैं. शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से अतिपिछड़े हैं लेकिन उनकी दशा नहीं सुधरी, तो सिर्फ गणना करने मात्र से सुधार नहीं होगा. राजनीतिक रोटी सेक कर समाज को बांट कर सामाजिक उन्माद फैला कर वोट लेने की अगर सोच है तो ये सफल नहीं होने वाला है. पाकिस्तान और चाइना के लड़ाई में बिहार को ना घसीटें. देश की विदेश नीति और सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार है, जिन्हें चुनकर लोगों ने वहां बैठाया है. सरकार में लोग बैठे और विपक्ष में भी लोग बैठे हैं. उनका काम है कि, देश की सुरक्षा सुनिश्चित करें. पूरी जनता उनके साथ है. लेकिन, यहां पर रोजगार की बात है, पढ़ाई की बात है.
NEWSANP के लिए बिहार से ब्यूरो रिपोर्ट

