नयी दिल्ली(NEW DELHI) : डिजिटल टेक्नोलॉजी में एआई और ह्युमन लेबर को लेकर अक्सर बहस होती रहती है और अंतत: सवाल यही उठता है कि क्या AI मनुष्यों की जगह ले लगा या क्या एआई से हमारी नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है।इन सवालों को लेकर गूगल और उसकी पैरेंट कंपनी अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई ने एक बार फिर खुलकर अपने विचार रखें हैं। सुंदर पिचाई ने दोहराया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उद्देश्य मनुष्यों की जगह लेना नहीं, बल्कि उन्हें और अधिक सक्षम बनाना है.
AI से डरने की नहीं, उसे समझने की जरूरत : सुंदर पिचाई
सुंदर पिचाई ने कहा कि AI उपकरणों के माध्यम से इंजीनियर अधिक उत्पादक बन सकते हैं और वे अपनी ऊर्जा अधिक प्रभावशाली कार्यों में लगा सकते हैं क्योंकि AI उनके लिए थकाऊ और दोहराव वाले कामों को स्वचालित कर देगा। पिचाई की यह टिप्पणी इस सप्ताह सैन फ्रांसिस्को में आयोजित ब्लूमबर्ग टेक सम्मेलन में सामने आई, जहां उन्होंने AI और इसके भविष्य को लेकर विस्तार से चर्चा की।
Anthropic CEO के बयान पर प्रतिक्रिया
हाल ही में Anthropic के सीईओ डेरियो अमोडेई ने दावा किया था कि अगले पांच वर्षों में AI आधे से अधिक एंट्री-लेवल नौकरियों को खत्म कर देगा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पिचाई ने कहा, “मैं उनका सम्मान करता हूं… ऐसे विचार सामने लाना और उन पर बहस करना जरूरी है।”
उन्होंने आगे कहा, “हम बीते 20 वर्षों से यह भविष्यवाणियां करते आए हैं कि तकनीक और ऑटोमेशन नौकरियां छीन लेंगे, लेकिन ऐसा पूरी तरह से कभी नहीं हुआ।”
AI से Google के भविष्य पर क्या कहा?
पिचाई ने इस सवाल पर कि क्या AI गूगल की लगभग 1.8 लाख कर्मचारियों की फौज को आधा कर सकता है, जवाब दिया, “मुझे उम्मीद है कि हम अभी के इंजीनियरिंग फेज से भी आगे बढ़ेंगे और आने वाले वर्ष में भी वृद्धि करेंगे, क्योंकि AI हमें अधिक कार्य करने की क्षमता देगा।”
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वर्तमान में गूगल के लगभग 30 प्रतिशत कोड AI द्वारा उत्पन्न किए जा रहे हैं। बावजूद इसके, वे AI को एक “त्वरक” (accelerator) मानते हैं, जो नए उत्पादों के विकास को बढ़ावा देगा और नए कर्मचारियों की मांग को जन्म देगा.
हालांकि 2025 में अब तक गूगल ने अपने क्लाउड डिवीजन से लगभग 100 कर्मचारियों को हटाया है, लेकिन यह संख्या 2023 और 2024 की तुलना में काफी कम है, जब कंपनी ने क्रमशः 12,000 और 1,000 कर्मचारियों की छंटनी की थी। इससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी अब स्थिरता की ओर बढ़ रही है।
AGI पर पिचाई राह तय नहीं
आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) – यानी एक ऐसी AI प्रणाली जो मनुष्यों की तरह या उनसे बेहतर तरीके से सभी कार्य कर सके – पर बात करते हुए पिचाई ने कहा, “हम जिन विचारों पर आज काम कर रहे हैं और जिन नए विचारों को आजमा रहे हैं, उन पर काफी आगे की प्रगति हो रही है।”
उन्होंने कहा, “मैं तकनीकी प्रगति को लेकर काफी आशावादी हूं। लेकिन इतिहास गवाह है कि तकनीकी विकास की राह में कई बार अस्थायी ठहराव (plateau) आता है। क्या हम निश्चित रूप से AGI की ओर बढ़ रहे हैं? इसका कोई ठोस उत्तर नहीं है।”
Waymo और YouTube के विस्तार पर भी जताया भरोसा
AI के अलावा पिचाई ने अल्फाबेट की स्वायत्त वाहन परियोजना Waymo, गूगल की क्वांटम कंप्यूटिंग पहलों और यूट्यूब की वैश्विक लोकप्रियता पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने खासतौर पर भारत में यूट्यूब की “विस्फोटक वृद्धि” को रेखांकित करते हुए इसे एक प्रमुख अवसर बताया।
जहां एक ओर टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के कई दिग्गज AI को मानव श्रमिकों के लिए खतरे के रूप में देख रहे हैं, वहीं सुंदर पिचाई जैसे नेता इसे मानव क्षमता को बढ़ाने वाले उपकरण के रूप में देखते हैं। उनके विचार यह दर्शाते हैं कि तकनीक के साथ सहअस्तित्व और उसका सकारात्मक उपयोग ही भविष्य की कुंजी है।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

