झारखण्ड :परवान पर दो राज्यसभा सीटों की लड़ाई ,क्या निर्दलीय नाथवानी मार लेंगे मैदान..?

झारखण्ड :परवान पर दो राज्यसभा सीटों की लड़ाई ,क्या निर्दलीय नाथवानी मार लेंगे मैदान..?

शिवपूज़न सिंह /वरिष्ठ पत्रकार रांची (Ranchi ):– झारखण्ड की सियासत की बिसात में मोहरे अपने डग तो भरते रहते हैं. कब सियासी तूफान उठ जाए और कब शांत हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता. लेकिन हकीकत हैं कि इसकी ललाट में ही उथल -पुथल लिखा हुआ हैं.

यहां समंदर की लहरों के माफिक हलचले और हिचकोले होते रहती हैं. जो एक़ तरह से सियासी मिजाज और मिथक सा बन गया हैं.सियासत का नया एपिसोड अभी दो राजयसभा सीट क़ो लेकर हैं. जहां एनडीए और सत्तारुढ इंडिया गठबंधन आमने -सामने हैं…

जेएमएम ने बैधनाथ राम क़ो उतारा हैं और उनकी जीत लगभग तय मानी ज़ा रहीं हैं. वही कांग्रेस की तरफ से प्रणव झा और तीसरे प्रत्याशी निर्दलीय के तौर पर परिमल नाथवानी राजयसभा के रण में हैं.

सबसे दौलतमंद उम्मीदवार नाथवानी क़ो भाजपा से समर्थन मिला हुआ हैं.मुकबला त्रिकोणीय हैं लेकिन असल लड़ाई नाथवानी और प्रणव झा के बीच ही हैं.

माना ज़ रहा हैं कि बेशक आकड़ा इंडिया गठबंधन के पास हैं. लेकिन नाथवानी के पास तजुर्बा, जुगाड़ और बाजी पलटने का दम रखते हैं. पहले भी झारखण्ड से वह राज्यसभा से सांसद रह चुके हैं.अभी पेंच उनके नामांकन क़ो लेकर फंसा था.लेकिन दिक्कते दूर हो गई और कांग्रेस का विरोध यहां बेकाम और बेवजह साबित हुआ. चुनाव से पहले ही परिमल ने एक़ तरह से पटखनी दे डाली है …

दरअसल, बुधवार क़ो स्क्रूटनी के दौरान परमिल नाथवानी के नाम और हिन्दू अविभाजित परिवार से जुड़े तकनीकी दास्तावेजो पर गंभीर आपत्तियां जताई गई थी. कांग्रेस ने तो इसे लेकर अपने वरिष्ठ नेता और प्रसिद्ध वकील सलमान खुर्शीद क़ो बुलाया था. लेकिन निर्वाची पदाधिकारी ने तमाम दलीले क़ो सुनने और दस्तावेजों की गहन जाँच के बाद परिमल के पक्ष में फैसला सुनाया और नामांकन से होल्ड हटाकर क्लीन चिट दे दिया .इससे आग बबूला और झल्लाई कांग्रेस ने निर्वाची पदाधिकारी पर नाथवानी और भाजपा क़ो मदद करने की तोहमत लगाई.

आकड़ो के गणित क़ो देखे और समझें तो इंडिया गठबंधन के पास पर्याप्त सख्या हैं.उनके पास 56 वोटों का जादुई आंकड़ा हैं. वही निर्दलीय नाथवानी क़ो भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए का भरोसा और हाथ हैं. 24 विधायकों के समर्थन का दावा किया जा रहा हैं.हालांकि 28-28 वोट मिल गए तो झारखण्ड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के राजयसभा के उम्मीदवार आसानी से जीत जायेंगे. लेकिन अगर एक़ वोट में भी खेला हो गया तो फिर मजारा ही पलट जायेगा. एक़ समीकरण ये भी हैं कि इंडिया गठबंधन के एक़ प्रत्याशी पर ही अधिक वोटिंग हो गई यानि 28 से ज्यादा हो गई तो यहां भी सूरत बिगड़ सकती हैं.

ऐसे में महज आकड़ो की बाजीगरी और गुलाबी तस्वीर से दिल क़ो सुकून दे देना तो भूल ही नहीं बल्कि अपने पैरो पर कुल्हाड़ी मारने जैसी होंगी.क्योंकि झारखण्ड के राजयसभा चुनाव के इतिहास के पिछले पन्ने पलटेंगे तो मालूम आसानी से पड़ेगा कि हॉर्स ट्रेडिंग, क्रॉस वोटिंग और पैसो का खेल होता रहा हैं.

लिहाजा अब ऐसा नहीं होगा और हो नहीं सकता यह सोच रखना अपना दिल बहलाने और मुगालते पालने सरीखा होगा. इधर, कांग्रेस प्रणव झा क़ो जीत दिलाने के लिए हर मोर्चे पर खड़ी हैं. नाथवानी क़ो मुकाबले से बाहर करने के लिए भी पूरी ताकत झोक दी. लेकिन सक नहीं पाई.

कही न कही झारखण्ड में 16 विधायकों वाली कांग्रेस कों शायद अपने गठबंधन पर ही ऐतबार नहीं हैं. इधर परिमल नाथवानी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मुलाक़ात की थी. इसे लेकर भी तरह की सियासी चर्चाएं और शिगूफा बाजार में अपने -अपने तरीके से जोड़ -तोड़ और गुना -भाग लगा रहें हैं.राज्यसभा की दो सीटों की लड़ाई कौन जीतेगा, ये तो 18 तारीख कों मालूम पड़ेगा. लेकिन यहां अग्निपरीक्षा और इम्तिहान कांग्रेस के लिए ज्यादा लगती हैं. क्योंकि विपक्ष भाजपा इस चुनाव में दूर से ही बस तमाशा देखकर खूब ख़ुश हैं…

परिमल नाथवानी कों आगे कर एक़ तीर से दो निशाने लगाई हैं.

मतलब यहां साफ यह हैं कि एनडीए तो इस चुनाव से बाहर हैं, लड़ाई तो असल में इंडिया गठबंधन के अंदर हैं,जो अंदर ही अंदर सुलग रहीं है, कब ये आग में तब्दील हो जाए, डर इसी का हैं. . तब ही तो कांग्रेस बेचैन और बदहवास हैं क्योंकि यहां लड़ाई परिमल नाथवानी जैसे गैरों से नहीं अपनों से हैं. जहां मैदान राजयसभा चुनाव का जरूर हैं, लेकिन उसे इस चक्रव्यू को अपने दम पर भी तोडना हैं और विजय पताका फहराना हैं…

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