कानपुर(KANPUR): ITBP जवान विकास सिंह की माँ को साँस लेने में दिक्कत हुई थी। इलाज के नाम पर कृष्णा अस्पताल ने उनका हाथ काट दिया। इसके बाद एक बेटा… जो देश की सीमाओं पर ड्यूटी करता है… अपनी माँ का कटा हाथ लेकर 3 दिन तक FIR दर्ज कराने के लिए भटकता रहा।
सबसे शर्मनाक बात ये रही कि वीडियो में एक पुलिस अफसर कटा हुआ हाथ देखने के बाद भी कार्रवाई की जगह खामोश खड़ा दिखाई दिया।
फिर मैदान में उतरे ITBP कमांडेंट गौरव प्रसाद साहब।
उन्होंने अपने जवान को अकेला नहीं छोड़ा। उनके नेतृत्व में ITBP जवान पुलिस कमिश्नरेट पहुंचे और घेराव कर दिया। मामला इतना बढ़ा कि पूरे प्रशासन में हड़कंप मच गया। यूपी के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा दृश्य दिखा, जब देश की सीमा संभालने वाले जवानों को अपनी माँ के लिए इंसाफ मांगने सड़कों पर उतरना पड़ा।
- अगर एक केंद्रीय अर्धसैनिक बल का जवान FIR के लिए भटक सकता है, तो आम आदमी की क्या हालत होती होगी?
- अगर कटा हुआ हाथ देखने के बाद भी सिस्टम नहीं जागता, तो कानून व्यवस्था के दावे किस काम के हैं?
- अगर ITBP अपने जवान के साथ न खड़ा होता, तो क्या मामला ऐसे ही दब जाता?
इस घटना ने दो चेहरे साफ कर दिए
एक तरफ वो सिस्टम जो दर्द देखकर भी फाइल ढूंढता रहा…
दूसरी तरफ वो कमांडेंट जिसने बता दिया कि “वर्दी सिर्फ नौकरी नहीं, अपने जवान के लिए खड़े रहने की शपथ भी होती है।”
कमांडेंट गौरव प्रसाद को सैल्यूट…
क्योंकि हर अफसर कुर्सी संभालता है, लेकिन कुछ अफसर अपने जवान का सम्मान भी संभालते हैं।

