“डिजिटल नटवरलाल” गिरोह का फन कुचलने में क्यों जुटी है पुलिस?

“डिजिटल नटवरलाल” गिरोह का फन कुचलने में क्यों जुटी है पुलिस?

सच जान जांच अधिकारी के छूटे पसीने, साइबर ठगों के नये हाईटेक प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई , तीन गिरफ्तार, मौके से संचालक फरार

जामताड़ा(JAMTADA): जामताड़ा में साइबर अपराध की काली दुनिया एक बार फिर सुर्खियों में है। कभी देशभर में ठगी की कहानियों के लिए चर्चित कुख्यात ठग नटवरलाल का नाम आज भी लोगों के जेहन में है। जिसने अपनी चालाकी और फरेबी दिमाग से बड़े-बड़े उद्योगपतियों, अधिकारियों और व्यापारियों को चकमा दिया था। फर्क सिर्फ इतना है कि उस दौर में ठगी कागज, दस्तावेज और मीठी बातों से होती थी। जबकि आज का “डिजिटल नटवरलाल” मोबाइल एप, फर्जी लिंक और साइबर तकनीक के जरिए लोगों की जमा पूंजी पर बदस्तूर हाथ साफ कर रहा है।

जामताड़ा पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है । साइबर अपराधियों के एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस अधीक्षक शंभु कुमार सिंह को मिली गुप्त सूचना के आधार पर साइबर अपराध थाना की टीम ने नारायणपुर थाना के ग्राम दखनीडीह स्थित एक बंद पड़े प्राथमिक विद्यालय में छापेमारी की। पुलिस के अनुसार यह विद्यालय अपराधियों के लिए “डिजिटल अड्डा” बन चुका था। जहां बैठकर देशभर के लोगों को ऑनलाइन जाल में फंसाया जा रहा था।

बंद सरकारी स्कूल बना साइबर अपराध का हाईटेक अड्डा

छापेमारी का नेतृत्व साइबर अपराध थाना प्रभारी पु०नि० राजेश मंडल ने किया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने तीन साइबर अपराधियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। गिरफ्तार अभियुक्तों में —

28 वर्षीय राजेश मंडल ,अजय मंडल और 30 वर्षीय हीरालाल मंडल शामिल हैं। तीनों नारायणपुर थाना क्षेत्र के ग्राम मिरगा के निवासी हैं।

पुलिस ने मौके से आठ सिम आधारित मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी लोगों के व्हाट्सएप नंबर पर “IPG GAS” नामक APK फाइल भेजते थे। यह मैसेज देखने में किसी सरकारी गैस सेवा या LPG सुविधा से जुड़ा प्रतीत होता था। जैसे ही कोई व्यक्ति उस APK फाइल को डाउनलोड करता। उसके मोबाइल की गोपनीय जानकारियां अपराधियों तक पहुंच जाती थीं।

ऐसे चलता था ठगी का खेल

साइबर अपराधियों की यह शैली बिल्कुल उसी तरह की मानी जा रही है जैसे पुराने दौर में नटवरलाल लोगों का विश्वास जीतकर उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाता था। फर्क बस तकनीक का है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी फर्जी एप डाउनलोड कराने के बाद —

मोबाइल का एक्सेस प्राप्त करते थे। बैंकिंग जानकारी चुराते थे, OTP और ई-वॉलेट डाटा हासिल करते थे। फिर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर रकम निकाल लेते थे।

जांच एजेंसियों का मानना है कि गिरोह का नेटवर्क केवल झारखंड तक सीमित नहीं था। बल्कि भारत के विभिन्न राज्यों में फैला हुआ था। पुलिस अब इनके बैंक खातों, कॉल डिटेल्स और डिजिटल ट्रांजैक्शन की भी जांच कर रही है।

“नटवरलाल” से “साइबर ठग” तक की कहानी

भारत में ठगी का इतिहास नया नहीं है। नटवरलाल ने कभी ताजमहल, लालकिला और संसद भवन तक बेच देने की चर्चित कहानियों से देश को चौंका दिया था। वह लोगों की मानसिकता को समझता था और भरोसे को हथियार बनाता था।

आज जामताड़ा जैसे क्षेत्रों में साइबर अपराधी उसी मनोविज्ञान का डिजिटल संस्करण बन चुके हैं। वे लोगों की लालसा, डर, सुविधा और सरकारी योजनाओं पर भरोसे का फायदा उठाकर उन्हें ठगते हैं। कभी KYC अपडेट, कभी बैंक खाता बंद होने का डर, कभी गैस सब्सिडी, तो कभी नौकरी और लोन के नाम पर ठगी की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जामताड़ा का नाम अब केवल एक जिले तक सीमित नहीं रहा। बल्कि साइबर अपराध की राष्ट्रीय बहस का प्रतीक बन चुका है। यहां के कई गिरोह तकनीकी रूप से इतने प्रशिक्षित हो चुके हैं कि वे महानगरों के पढ़े-लिखे लोगों तक को आसानी से अपना शिकार बना लेते हैं।

पुलिस की सक्रियता और बढ़ती चुनौती

जामताड़ा पुलिस ने इस मामले में साइबर अपराध थाना कांड संख्या 26/26 दर्ज किया है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 तथा आईटी एक्ट और टेलीकम्युनिकेशन एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

छापेमारी दल में —

पु०नि० राजेश मंडल, पु०अ०नि० संजय कुमार सिंह, पु०अ०नि० कुन्दन कुमार वर्मा, पु०अ०नि० हीरालाल महतो तथा साइबर थाना के रिजर्व गार्ड के जवान शामिल थे।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और आम लोगों को जागरूक करना भी प्राथमिकता है।

आम लोगों के लिए चेतावनी

विशेषज्ञों और पुलिस ने लोगों से अपील की है कि —

किसी अनजान APK फाइल को डाउनलोड न करें,

व्हाट्सएप पर आए संदिग्ध लिंक से बचें,

बैंकिंग OTP या पासवर्ड साझा न करें,

केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही एप डाउनलोड करें।

यदि किसी प्रकार की साइबर ठगी होती है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

बदलते दौर की ठगी का चेहरा

कभी गांव-कस्बों में लोग नटवरलाल की कहानियां सुनकर आश्चर्य करते थे कि कोई व्यक्ति इतनी सफाई से लोगों को कैसे ठग सकता है। आज वही कहानी इंटरनेट और मोबाइल स्क्रीन पर जीवित दिखाई देती है।

जामताड़ा की यह कार्रवाई केवल तीन अपराधियों की गिरफ्तारी भर नहीं है। यह उस बदलती अपराध दुनिया की तस्वीर है। जहां अपराधी अब बंदूक नहीं। बल्कि मोबाइल और इंटरनेट को हथियार बना चुके हैं।

“डिजिटल इंडिया” के इस दौर में जहां तकनीक सुविधा बनकर आई है। वहीं साइबर अपराधियों के लिए वही तकनीक सबसे बड़ा हथियार बन गया है।

NEWSANP के लिए आर पी सिंह की रिपोर्ट

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