पेट्रोल-डीजल की कीमतों, बढ़ती महंगाई, कमजोर होती अर्थव्यवस्था और राशन कार्ड रद्दीकरण पर भाजपा सरकार जवाब दे …

पेट्रोल-डीजल की कीमतों, बढ़ती महंगाई, कमजोर होती अर्थव्यवस्था और राशन कार्ड रद्दीकरण पर भाजपा सरकार जवाब दे …

धनबाद(DHANBAD):केंद्र सरकार पर देश की जनता को आर्थिक संकट, महंगाई और योजनाबद्ध तरीके से अधिकारों से वंचित करने का कार्य कर रही है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी द्वारा पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर दिया गया बयान वास्तविकता से दूर और जनता को भ्रमित करने वाला है।

असली समस्या अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत नहीं, बल्कि भाजपा की “चुनावी तेल नीति” है। केंद्र सरकार ने स्वयं यह साबित किया कि पेट्रोल-डीजल के दाम आर्थिक आधार पर नहीं, बल्कि चुनावी लाभ-हानि देखकर तय किए जाते हैं। वर्ष 2022 में जब कच्चे तेल की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची, तब पांच राज्यों के चुनाव के दौरान 137 दिनों तक पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे गए। वहीं बाद में जब कच्चा तेल घटकर 75–80 डॉलर तक आ गया, तब जनता को वैसी राहत नहीं दी गई।

लोकसभा चुनाव 2024 के ठीक पहले अचानक ₹2 प्रति लीटर की कटौती यह साबित करती है कि भाजपा सरकार के फैसले बाजार नहीं, बल्कि चुनाव तय करते हैं। हमारा सवाल है कि जब इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी सरकारी तेल कंपनियों ने वित्त वर्ष 2023-24 में लगभग ₹81,000 करोड़ का रिकॉर्ड मुनाफा कमाया, तब “अंडर-रिकवरी” का रोना क्यों रोया जा रहा है?

2014 से अब तक केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल पर टैक्स के माध्यम से लगभग ₹38.89 लाख करोड़ की वसूली कर चुकी है। इसका पूरा बोझ देश के आम नागरिकों ने उठाया है। भाजपा सरकार ने 10 वर्षों तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों को आर्थिक नीति नहीं, बल्कि राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया।

देश में बढ़ती महंगाई और आर्थिक अस्थिरता का सबसे बड़ा संकेत सोने की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि है। पिछले एक वर्ष में सोने के दाम कई गुना बढ़े, लेकिन आम लोगों की आय, वेतन या बैंक जमा में वैसी वृद्धि नहीं हुई। उल्टा भारतीय रुपया लगातार कमजोर होता गया। यही कारण है कि पूरी दुनिया में सोने को “सेफ एसेट” माना जाता है, क्योंकि जब लोगों का अपनी करेंसी और अर्थव्यवस्था पर भरोसा घटता है, तो वे सोने की ओर रुख करते हैं।

भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों ने आम जनता की बचत, रोजगार और क्रय शक्ति को कमजोर कर दिया है। आज आम नागरिक महंगाई, बेरोजगारी और टैक्स के दोहरे बोझ के नीचे दबा हुआ है।

बिहार में लाखों राशन कार्ड रद्द किए जाने के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी गरीबों को योजनाओं से वंचित करने की कोशिश हो रही है। भाजपा झारखंड में भी एसआईआर जैसे बहानों के माध्यम से गरीब, आदिवासी, मूलवासी और झारखंडियों का राशन छीनने की साजिश कर रही है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा गरीबों के अधिकारों पर किसी भी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं करेगा। राज्य के हर जरूरतमंद परिवार को राशन, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार मिलना चाहिए। भाजपा सरकार जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए भ्रम और भय की राजनीति कर रही है, लेकिन देश और झारखंड की जनता अब सच्चाई समझ चुकी है।

NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

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