पृथ्वी दिवस पर बच्चों ने प्रकृति संरक्षण और राष्ट्र के नाम दिया संदेश..

पृथ्वी दिवस पर बच्चों ने प्रकृति संरक्षण और राष्ट्र के नाम दिया संदेश..

धनबाद(DHANBAD ): बुधवार को पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) के अवसर पर झरिया के सामाजिक संगठनों ने एक अनोखे तरीके से एक विश्वव्यापी ‘हरित चेतना संदेश’ देने कि पहल किए। पृथ्वी दिवस पर भारतीय राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम् के पहली छंद से लिया गया के ‘सुजलाम सुफलाम शस्य शमालम’ शब्दावली को वैश्विक हरित चेतना संदेश बताया गया। भाग लेने वाले बच्चों ने ‘वन्दे मातरम्’ गीत में वर्णित ऐसी हरित देश की मांग की।

यह कार्यक्रम झरिया के सामाजिक संस्था इंस्टीट्यूशन फॉर नेशनल एमिटी (INA) और कोलफील्ड चिल्ड्रन क्लासेज (CCC) द्वारा संयुक्त रूप से सदी पुराने अग्नि प्रभावित झरिया कोलफील्ड्स के घोनूडीह इलाके में आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य वंदे मातरम् के 150 वर्षों के स्मरणत्सव’ को पृथ्वी दिवस के अवसर के साथ जोड़ना था।

पृथ्वी दिवस के अवसर पर बच्चों ने अपने सिर पर मट्टी से बना पृथ्वी का मॉडल रखा और आकर्षक रैली निकाली । बच्चों ने कई पोस्टर पकड़ेते हुए कोलियर इलाका घूमे और जोर जोर से नारे लगाए , कहा कि-
‘ वंदे मातरम हम खूब गायेंगे – धरती को भी हरा बनाएंगे’,
‘क्या कहती है धरती माता, मेरा रूप वापस करो।’
‘यदि वंदे मातरम की मान बढ़ाना हैं, -तो धरती पर पेड़ लगाने है।‘

कार्यक्रम ‘वसुंधरा वंदना’ के साथ शुरू हुआ, जहाँ केन्दुआ के छात्राओं नंदिनी कुमारी, दुर्गा कुमारी, मुस्कान कुमारी, दुर्गी कुमारी ने वंदे मातरम् गाना पर नृत्य प्रस्तुत किए। लोग मंत्रमुग्ध हो कर तालियां बंटोरे।

मुख्य आकर्षण पृथ्वी का एक मॉडल था जो देवी दुर्गा और धरती (मातृभूमि) के समानता को दिखाता है। जिसे बंकिन चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा ‘वन्दे मातरम् गीत’ में वर्णित किया गया था। पृथ्वी मॉडल का विचार पिनाकी रॉय द्वारा बनाए गए एक थीम कार्ड से आया। कलाकार संजय पंडित ने इसे अंतिम रूप दिया।

इंस्टीट्यूशन फॉर नेशनल एमीटी (INA) के संस्थापक पिनाकी राय ने कहा कि ‘हरित पृथ्वी और प्रदूषण रहित प्राकृतिक जल का वर्णन, 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखे गए वंदे मातरम राष्ट्रभक्ति गीत में किया गया था। हमारे देश में वंदे मातरम् के 150 वर्ष के उत्सव के अवसर पर अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम ऐसी प्रदूषण मुक्त पानी, हवा और पृथ्वी को बनाए रखें। “

परिवेश संचेतना बढ़ाने ये अनूठा पहल झरिया कोयलांचल की भूमि की सुरक्षा के लिए कुछ संदेश थे और साथ ही सभी भारतीयों और राष्ट्रीय राजनीतिज्ञों को याद दिलाने का संदेश भी था, कि भारत को राष्ट्रीय गीत में वर्णित हरा बनाने के लिए कदम उठाएं। कोयलांचल के भूमि को सुरक्षित करें।

सीसीसी के मौसमी राय और संजय पंडित के नेतृत्व में झरिया कोयला खदानों काम करने वाले परिवारों के वंचित समुदाय के 30 से अधिक बच्चे ‘वंदे बसुंधरा, वंदे मातरम्’ कार्यक्रम में शामिल हुए।

ये अनूठा पहल झरिया के घोनूडीह इलाके में परित्यक्त बीसीसीएल कार्यालय के के सामने सुरक्षित दूरी पर आयोजित हुआ, जिसे एक दशक पहले भूमिगत कोयला आग के कारण खाली किया गया था।

कार्यक्रम में, कुछ फलदार पेड़ छात्रों में माउसुमी रॉय द्वारा वितरित किए गए। सभी ने पेड़ लगाने का संकल्प लिया। 18 साल की लड़की नंदिनी कुमारी ने कहा, “दुनिया को हरा-भरा बनाने के लिए, हम और पेड़ लगाएंगे जैसा कि हमने अपने नारे में कहा था।”

पिनाकी रॉय, संजय पंडित और मोसुमी रॉय के अलावा, पत्रकार चंदन पाल, पवन कुमार और छात्रा सुहानी कुमारी, दीपशिखा कुमारी, रागिनी कुमारी आरती कुमारी, गुंजन कुमारी, सुनयना कुमारी, सिमरन कुमारी, जीवन कुमार, अंग्शु कुमार, विवेक कुमार, घनश्याम कुमार, किन्जल कुमारी, चांदनी कुमारी, तान्या कुमारी, अंजलि कुमारी आदि उपस्थित थे।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गान ‘वन्दे मातरम्’ और राष्ट्रीय गीत ‘जन गण मन’ के साथ हुआ।

NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

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