झारखंड(JHARKHAND):झारखंड में भ्रष्टाचार किस कदर हावी है, इसका ताजा मामला धनबाद से सामने आया है। जहां गरीब आदिवासी बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगा है। नवोदय और एकलव्य विद्यालय में नामांकन के लिए जरूरी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने पहुंचे बच्चों और उनके परिजनों ने सिविल सर्जन कार्यालय में जमकर हंगामा किया। आरोप है कि सर्टिफिकेट के नाम पर 1500 रुपये की मांग की जा रही है।
दरअसल, ग्रामीण क्षेत्र के कई आदिवासी बच्चे पिछले 5 दिनों से सिविल सर्जन कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उनका मेडिकल टेस्ट तक नहीं किया गया है। जबकि इन बच्चों को 20 अप्रैल तक नवोदय और एकलव्य विद्यालय में नामांकन के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करना अनिवार्य है।
परिजनों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि बिना पैसे दिए सर्टिफिकेट नहीं बनाया जा रहा है। इसे लेकर निरसा और पूर्वी टुंडी के जिला परिषद सदस्यों के साथ परिजन सिविल सर्जन कार्यालय पहुंचे और विरोध जताया।
जिला परिषद सदस्य पिंकी मरांडी ने कहा कि बच्चे 5 दिन से चक्कर लगा रहे हैं। 1500 रुपये मांगा जा रहा है। गरीब आदिवासी बच्चे कहां से पैसा देंगे।
जिला परिषद सदस्य जोबा मरांडी ने कहा कि 20 अप्रैल तक सर्टिफिकेट जमा करना है। नहीं तो बच्चों का नामांकन रुक जाएगा। ये सीधा-सीधा उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
वहीं भाजपा नेता राजीव ओझा ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए सरकार और प्रशासन पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आदिवासी सरकार में आदिवासी बच्चों का ही काम नहीं हो रहा। 1500 रुपये की मांग बेहद गंभीर मामला है।
हालांकि, सिविल सर्जन आलोक विश्वकर्मा ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि बच्चों के कागजात जमा हो चुके हैं और प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि मेडिकल का प्रोसेस चल रहा है। जल्द जांच कर सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाएगा।
फिलहाल सवाल यही है कि अगर समय पर बच्चों का मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं बना। तो उनके नामांकन पर संकट खड़ा हो सकता है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट
