धनबाद( DHANBAD): रेल मंडल द्वारा जनप्रतिनिधियों का आमंत्रण अंतिम समय पर रद्द किए जाने के विवाद ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। हालांकि, मंगलवार को सीनियर डीसीएम मनीष सौरव और सीनियर डीओएम मोहम्मद इकबाल सहित अन्य अधिकारियों ने ‘सिंह मेंशन’ जाकर इस चूक के लिए खेद प्रकट करते हुए माफी मांगी, लेकिन विवाद पूरी तरह शांत होता नहीं दिख रहा।
सोमवार को एक रेलवे कार्यक्रम के लिए महापौर संजीव सिंह और झरिया विधायक रागिनी सिंह को विधिवत आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम स्थल पर उनके नाम के बैनर-पोस्टर भी लग चुके थे। किंतु, कार्यक्रम शुरू होने से मात्र एक घंटे पहले अचानक आमंत्रण रद्द कर दिया गया और आनन-फानन में पोस्टर हटा दिए गए। इस अप्रत्याशित कदम से राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश फैल गया।
महापौर संजीव सिंह ने इसे जनप्रतिनिधियों का सार्वजनिक अपमान करार दिया। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कुछ लोग मेरी लोकप्रियता से घबराए हुए हैं और उनका बीपी बढ़ गया है। ऐसे लोगों को मेरी सलाह है कि वे दिल्ली एम्स के अच्छे डॉक्टरों से अपना इलाज कराएं।
जवाबदेहीपरसवाल :
रेलवे अधिकारियों की माफी के बावजूद लोगों का मानना है कि केवल खेद जताना पर्याप्त नहीं है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसके निर्देश या दबाव में अंतिम समय पर आमंत्रण रद्द हुआ? प्रशासनिक और संस्थागत समन्वय में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए केवल माफी नहीं, बल्कि दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करना अनिवार्य है ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों के सम्मान की रक्षा हो सके।
NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

