आज है महिला दिवस.. यहां पढ़ें नारी शक्ति को समर्पित सुंदर, भावपूर्ण और गहरे अर्थ वाली कविताएं…

आज है महिला दिवस.. यहां पढ़ें नारी शक्ति को समर्पित सुंदर, भावपूर्ण और गहरे अर्थ वाली कविताएं…

DESK:हर साल International Women’s Day 8 मार्च को दुनिया भर में मनाया जाता है। यह दिन महिला सशक्तिकरण और उनके सामाजिक योगदान को बढ़ावा देने के अवसर के रूप में देखा जाता है। चाहे वह शिक्षा हो, राजनीति हो, विज्ञान हो या कला का संसार समाज के हर क्षेत्र में महिलाएं आज अपनी पहचान बना रही हैं। महिला दिवस के इस खास मौके पर आइए पढ़ते हैं नारी की शक्ति, सपनों और संघर्ष को समर्पित प्रेरणादायक कविताएं।

श्याम तन, भर बँधा यौवन,

नत नयन प्रिय, कर्म-रत मन,

गुरु हथौड़ा हाथ,

करती बार-बार प्रहार :

सामने तरु-मालिका अट्टालिका, प्राकार।

चढ़ रही थी धूप;

गर्मियों के दिन

दिवा का तमतमाता रूप;

उठी झुलसाती हुई लू,

रुई ज्यों जलती हुई भू,

गर्द चिनगीं छा गईं,

प्राय: हुई दुपहर :

वह तोड़ती पत्थर।

देखते देखा मुझे तो एक बार

उस भवन की ओर देखा, छिन्नतार;

देखकर कोई नहीं,

देखा मुझे उस दृष्टि से

जो मार खा रोई नहीं,

सजा सहज सितार,

सुनी मैंने वह नहीं जो थी सुनी झंकार

एक क्षण के बाद वह काँपी सुघर,

ढुलक माथे से गिरे सीकर,

लीन होते कर्म में फिर ज्यों कहा

‘मैं तोड़ती पत्थर।’

मैं नीर भरी

मैं नीर भरी दु:ख की बदली!

स्पंदन में चिर निस्पंद बसा;

क्रंदन में आहत विश्व हँसा,

नयनों में दीपक-से जलते

पलकों में निर्झरिणी मचली!

मेरा पग-पग संगीत-भरा,

श्वासों से स्वप्न-पराग झरा,

नभ के नव रँग बुनते दुकूल,

छाया में मलय-बयार पली!

मैं क्षितिज-भृकुटि पर घिर धूमिल,

चिंता का भार, बनी अविरल,

रज-कण पर जल-कण हो बरसी

नवजीवन-अंकुर बन निकली!

पथ को न मलिन करता आना,

पद-चिह्न न दे जाता जाना,

सुधि मेरे आगम की जग में

सुख की सिहरन हो अंत खिली!

विस्तृत नभ का कोई कोना;

मेरा न कभी अपना होना,

परिचय इतना इतिहास यही

उमड़ी कल थी मिट आज चली!

मैं नीर भरी दु:ख की बदली!

NEWSANP के लिए रागिनी पांडेय की रिपोर्ट

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