दरभंगा(BIHAR) : दरभंगा जिले के हरिनगर गांव में जातीय हिंसा की घटना के पांच दिन बाद अब बड़ा कदम उठाया गया है. गुरुवार (05 फरवरी, 2026) को प्रशासन की ओर से शांति व्यवस्था बहाल के लिए पहल की गई. बिरौल के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) प्रभाकर तिवारी और अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) शशांक राज के नेतृत्व में शांति समिति की बैठक हुई. दोनों पक्षों के लोगों से बातचीत कर शांति बनाए रखने पर सहमति बनी.
प्रभाकर तिवारी ने बताया कि जातीय तनाव को शांत करने के लिए घटना में शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजने का निर्णय लिया गया है. वहीं, शशांक राज ने बताया कि गांव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके.
पूरे गांव के एक समुदाय को आरोपी बनाए जाने की बात भ्रामक
प्रशासन ने सोशल मीडिया पर जातीय विद्वेष फैलाने वालों की भी पहचान कर कार्रवाई करने की बात कही है. एसडीपीओ ने स्पष्ट किया कि पूरे गांव के एक समुदाय विशेष को आरोपी बनाए जाने की बात भ्रामक है और इसे गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि गांव के मुखिया और सरपंच दोनों ब्राह्मण समुदाय से हैं, जिनमें मुखिया को आरोपी नहीं बनाया गया है जबकि सरपंच को नामजद किया गया है.
अधिकारी ने बताया कि लगभग तीन हजार ब्राह्मण आबादी वाले गांव में इस मामले में केवल 70 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है जबकि 100 से 150 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि प्राथमिकी में गांव से बाहर रहने वाले कुछ लोगों के नाम भी दर्ज किए गए हैं और ऐसे मामलों की जांच कर निर्दोष लोगों के नाम हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी.
पीड़ित दलित समुदाय के लोग भी इस बात से सहमत हैं कि घटना से असंबद्ध लोगों के नाम प्राथमिकी में नहीं होने चाहिए.
बता दें कि कुशेश्वरस्थान प्रखंड के हरिनगर गांव में 30 जनवरी की सुबह बकाया मजदूरी को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ था, जो बाद में जातीय तनाव में बदल गया. 31 जनवरी को मारपीट हुई. पुलिस के मुताबिक, मकान निर्माण की चार वर्ष से बकाया मजदूरी को लेकर दो पक्षों के बीच कहासुनी हुई थी.
फिलहाल गांव में स्थिति शांतिपूर्ण बताई जा रही है और एहतियातन प्रशासन की निगरानी जारी है.
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

