असमाजिक तत्वों ने फर्जी हस्ताक्षरों से मुख्यमंत्री को भेजा शिकायत पत्र
कतरास(DHANBAD): कतरास थाना की पुलिस व थाने में पदस्थापित इमानदार ASI
खिलाफ लगाए गए तथाकथित आरोप अब साजिश की बू देने लगी हैं। मुख्यमंत्री को भेजे गए जिस शिकायत पत्र के आधार पर पुलिस पर सवाल खड़े किए जा रहे थे, उसकी सच्चाई पर गंभीर संदेह खड़ा हो गया है। जांच में सामने आ रहा है कि आवेदन में जिन दुकानदारों के हस्ताक्षर दर्शाए गए हैं, वे पूरी तरह फर्जी हैं।
स्थानीय व्यापारियों ने दो टूक कहा है कि उन्होंने न तो कोई शिकायत की है और न ही किसी पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। कई दुकानदारों ने यह भी आरोप लगाया कि उनका नाम और हस्ताक्षर जानबूझकर गलत तरीके से इस्तेमाल किए गए, ताकि कतरास थाना और वहां पदस्थ पुलिसकर्मियों को बदनाम किया जा सके।
सूत्रों की मानें तो हाल के दिनों में कतरास थाना पुलिस द्वारा अवैध कारोबार, अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी से बौखलाए कुछ असमाजिक तत्व अब पुलिस पर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाकर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
शिकायत पत्र को देखकर यह साफ प्रतीत होता है कि इसे किसी गिरोह या स्वार्थी तत्व द्वारा योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया गया है। शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि पुलिस जबरन 7 से 8 बजे रात्रि के बीच दुकानों को बंद करवा देती है जबकि जांच में यह सामने आया है कि बाजार की लगभग दुकानें व थाना चौक की दुकान साढे नौ से 10:00 बजे रात्रि को बंद होता है जिसका प्रमाण इलाके में लगे विभिन्न सीसीटीवी फुटेज से उपलब्ध किया जा सकता है. शिकायत में बताया गया है कि खेतान टावर स्थित ज्वेलरी दुकान में डकैती मामले में दुकानदारों को पुलिस द्वारा फसाने की धमकी दी जाती है जबकि मामले में कतरास थाना प्रभारी असित कुमार सिंह के नेतृत्व में घटना के तुरंत बाद उद्वेदन कर लिया गया लूट का सामानों को भी बरामद कर लिया गया यहां तक कि अपराधियों की भी गिरफ्तारी कर ली गई . धनबाद एसएसपी ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उद्वेदन की जानकारी दी है. यहां तक की अपराधियों को रिमांड पर भी लिया गया है तो इस कांड में किसी को फंसाने का मामला ही नहीं बनता है। पत्र में इसी तरह के कई बेबुनियाद आरोप प्रशासन पर लगाया गया है जो जांच पड़ताल में पूरी तरह से निराधार व मनगढ़ंत साबित होता है।
शिकायत पत्र में न तो कोई ठोस प्रमाण है, न ही किसी घटना की स्पष्ट जानकारी। उल्टा, अब जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे यह मामला जाली व फर्जी हस्ताक्षर और प्रशासन को गुमराह करने का बनता दिख रहा है, जो खुद एक गंभीर अपराध है।
यदि यह साबित होता है कि शिकायत पत्र फर्जी है, तो इसके पीछे शामिल लोगों पर कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।
कतरास थाना पुलिस ने दोहराया है कि वह कानून के तहत काम कर रही है और आगे भी अपराध व अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस की सख्ती से घबराकर अगर कोई झूठे आरोपों और फर्जी शिकायतों का सहारा लेगा, तो उसे कानून का सामना करना पड़ेगा। वही पुलिस ने इलाके की मीडिया कर्मियों से भी अपील की है कि वह भ्रामक खबरों को तवज्जो ना दे ताकि मीडिया और पुलिस की विश्वसनीयता आम जनों के बीच बना रहे।
अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। सूत्रों की माने तो
कतरास थाना को बदनाम करने की यह गहरी साजिश ज्यादा दिन नहीं टिकने वाली पुलिस उन असामाजिक तत्वों जल्द चिन्हित कर उन पर कानूनी शिकंजा कसने की रणनीति में जुटी है। इधर सामाजिक कार्यकर्ताओं व कतरास के आम जनों ने मामले को लेकर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि कतरास पुलिस लगातार लोगों की सुरक्षा व्यवस्था व अपराध को नियंत्रित करने में ईमानदारी से दिन-रात जुटी रहती है लेकिन कुछ घटिया मानसिकता के लोग पुलिस और आम जनों के बीच साजिश के तहत गहरी खाई बनाने का नाकाम प्रयास कर रहे हैं जो किसी भी सूरत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा।
NEWS ANP के लिए बाघमारा से ब्यूरो रिपोर्ट

