धनबाद(DHANBAD): झारखंड में नगर निकाय चुनाव-2026 की प्रशासनिक तैयारियां तेज हो चुकी हैं। वार्ड से लेकर मेयर तक की आरक्षण सूची जारी कर दी गई है और माना जा रहा है कि 26 जनवरी के बाद 27 से 31 जनवरी के बीच चुनाव की तारीखों का ऐलान हो जाएगा।
मेयर चुनाव को लेकर भाजपा में उथल-पुथल
भले ही नगर निकाय चुनाव गैर-दलीय होंगे, लेकिन राजनीतिक दलों के भीतर सियासी सरगर्मी अपने चरम पर है। झामुमो, भाजपा और कांग्रेस अंदरखाने रणनीति बनाने में जुटे हैं। इनमें सबसे ज्यादा उथल-पुथल भारतीय जनता पार्टी के भीतर देखने को मिल रही है, खासकर धनबाद नगर निगम के मेयर पद को लेकर।
सहमति बनाने को तीन सदस्यी कमेटी
भाजपा ने प्रत्याशियों के नाम पर सहमति बनाने के उद्देश्य से प्रमंडल स्तर पर समितियों का गठन किया है। उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जिसमें धनबाद विधायक राज सिन्हा, पूर्व मंत्री अमर बाउरी और पूर्व सांसद रवींद्र राय शामिल हैं।
कमेटी को धनबाद, बोकारो और गिरिडीह जिले के नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में प्रत्याशियों के नाम पर एक राय बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि, धनबाद नगर निगम के मेयर पद को लेकर पार्टी के भीतर हालात इतने उलझे हुए हैं कि सहमति बनना बेहद कठिन नजर आ रहा है।
चंद्रशेखर अग्रवाल का चुनाव लड़ना तय
धनबाद में भाजपा के पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल का चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है। सवाल यह है कि क्या पार्टी उनके नाम पर एकजुट हो पाएगी। वहीं, धनबाद के पूर्व सांसद पीएन सिंह अपने छोटे बेटे प्रवीर प्रियदर्शी को मेयर पद के लिए आगे बढ़ाना चाहते हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पीएन सिंह का टिकट काटकर ढुलू महतो को उम्मीदवार बनाया था, जिसे पीएन सिंह ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी किया। अब वे चाहते हैं कि पार्टी के फैसले का सम्मान करने के बदले उनके बेटे के नाम पर विचार किया जाना चाहिए।
ढुलू की पत्नी के भी नाम चर्चे में
दूसरी ओर, धनबाद के मौजूदा सांसद ढुलू महतो भी अपनी पत्नी सावित्री देवी को मेयर पद के लिए मैदान में उतारने के इच्छुक हैं। वे चाहेंगे कि पार्टी नेतृत्व उनके प्रस्ताव को हरी झंडी दे।
संजीव ने अभी नहीं खोले पत्ते
इसके अलावा कुंभनाथ सिंह, भृगुनाथ भगत, रमा सिन्हा, मुकेश पांडेय, शांतनु चंद्रा उर्फ बबलू पासवान, अंकेज राज और उदय प्रताप सिंह भी मेयर पद की दौड़ में सक्रिय हैं। झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह पर भी सभी की निगाहें टिकी हुई हैं, हालांकि उन्होंने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं और समय आने पर निर्णय लेने की बात कह रहे हैं।
धनबाद भाजपा में एका नहीं
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस समय धनबाद भाजपा में एकजुटता का घोर अभाव दिख रहा है। गुटबाजी और आपसी कटुता इस कदर बढ़ चुकी है कि कई नेता एक-दूसरे के साथ सहज नहीं हैं।
विधायक राज सिन्हा और चंद्रशेखर अग्रवाल के बीच का टकराव जगजाहिर है। राज सिन्हा और सांसद ढुलू महतो के रिश्ते भी तनावपूर्ण बताए जाते हैं। वहीं, झरिया की विधायक रागिनी सिंह के भी राज सिन्हा और ढुलू महतो से संबंध सहज नहीं माने जाते।
अतीत का अनुभव अच्छा नहीं
भाजपा के लिए यह स्थिति नई नहीं है। वर्ष 2015 के धनबाद नगर निगम चुनाव में भी मेयर प्रत्याशी के नाम पर पार्टी एक राय नहीं बना पाई थी। तब प्रदेश नेतृत्व ने उद्योगपति प्रदीप संथालिया को आगे बढ़ाया था, जिन्हें तत्कालीन सांसद पीएन सिंह और विधायक राज सिन्हा का समर्थन था।
जिला संगठन भी उनके साथ था, लेकिन चंद्रशेखर अग्रवाल और राजकुमार अग्रवाल नहीं माने और दोनों ने नामांकन दाखिल कर दिया। अंततः प्रदीप संथालिया ने चुनाव मैदान छोड़ दिया और पार्टी ने राजकुमार अग्रवाल को समर्थन दिया, जिन्हें हार का सामना करना पड़ा। उस चुनाव में चंद्रशेखर अग्रवाल मेयर चुने गए।
एका की राह भाजपा के लिए मुश्किल
अब एक बार फिर वही तस्वीर उभरती दिख रही है। पार्टी ने राज सिन्हा, अमर बाउरी और रवींद्र राय को सहमति बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन मौजूदा हालात में यह जिम्मेदारी आसान नहीं दिखती। चंद्रशेखर अग्रवाल का चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा उनके नाम पर एकजुट हो पाएगी या फिर अंदरूनी खींचतान पार्टी की राह एक बार फिर मुश्किल कर देगी।
NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

