झारखंड(JHARKHAND): झारखंड में चूहों की ‘नशे की लत अब सुर्खियां बटोर रही है। कभी पुलिस थाने में रखा गांजा चट कर जाते हैं, तो कभी शराब की बोतलों को गटक जाते हैं। ये कोई मजाक नहीं, बल्कि असल घटनाएं हैं, जिनमें पुलिस और शराब कारोबारियों ने गायब नशीले पदार्थों का ठीकरा चूहों के सिर फोड़ा है। नतीजा? कोर्ट में आरोपी बरी। पूरा मामला सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। बात बढ़ने से अब उच्च अधिकारियों के दबाव पर दोबारा जांच शुरू हुई है। असली कहानी जांच के बाद सामने आएगी।
झारखंड की राजधानी रांची से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। साल 2022 में ओरमांझी पुलिस ने एक बोलेरो गाड़ी से करीब 200 किलो गांजा (कीमत लगभग 1 करोड़ रुपये) बरामद किया था। आरोपी इंद्रजीत राय उर्फ अनुरजीत राय को गिरफ्तार किया गया, जबकि उसके दो साथी फरार हो गए। मामला कोर्ट में चला, लेकिन जब सबूत पेश करने की बारी आई, तो पुलिस ने चौंकाने वाला दावा किया। थाने के मालखाने में रखा गांजा चूहों ने कुतर-कुतर कर खा लिया। पुलिस ने कोर्ट को लिखित रिपोर्ट दी कि अब सबूत के तौर पर गांजा उपलब्ध नहीं है। 19 दिसंबर 2025 को रांची की स्पेशल NDPS कोर्ट ने पुलिस की इस रिपोर्ट और अन्य खामियों (जैसे गवाहों के बयानों में विरोधाभास, जब्ती प्रक्रिया में लापरवाही) को देखते हुए आरोपी को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस आरोप साबित करने में पूरी तरह नाकाम रही। इस फैसले ने पुलिस की मालखाना सुरक्षा और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
झारखंड के चूहे यहीं नहीं रुके। इसी साल जुलाई में धनबाद के बलियापुर और प्रधानखंता शराब दुकानों में स्टॉक चेकिंग के दौरान 802 बोतलें अंग्रेजी शराब कम पाई गईं। कुछ बोतलें पूरी खाली, कुछ आधी और ढक्कनों में छेद। चूहों ने ढक्कन कुतरकर शराब पी ली। उन्होंने विस्तार से बताया कि चूहे बोतलों के ढक्कन चबाते, फिर पूंछ डालकर शराब भिगोते और चाटते जाते। विभागीय जांच में यह दावा खारिज हो गया, और संचालकों से नुकसान की भरपाई मांगी गई।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

