पटना(PATNA): याद कीजिये वो शर्मनाक खबर जब बिहार में ED की छापेमारी के दौरान नोट गिनने के लिए मशीनें कम पड़ गई थी। ये वही IAS अधिकारी है।
संजीव हंस 1997 बैच के बिहार कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी है। वह भारतीय प्रशासनिक सेवा के इतिहास में सबसे गंभीर भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में से एक के आरोपी हैं। मेडिकल, कंस्ट्रक्शन, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा जैसे मलाईदार विभागों में काम कर चुके संजीव हंस टेंडर घोटाले, आय से अधिक संपत्ति अर्जन और बड़े पैमाने पर धन शोधन में शामिल है। जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई में लगभग 100 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति और 70 संदिग्ध बैंक खातों का खुलासा हुआ। हालांकि अब नीतीश सरकार ने संजीव हंस का निलंबन वापस लेते हुए उन्हें राजस्व परिषद का अपर सचिव बनाया गया है। सरकार के इस फैसले ने नीतीश कुमार की ईमानदार के ढोंग और राज्य के प्रशासनिक व राजनीतिक ढांचे पर गहरे सवाल खड़े किए हैं।
हंस को अपने कार्यकाल में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के “पसंदीदा आईएएस अधिकारियों” में गिना जाता था, जिससे उन्हें लंबे समय तक महत्वपूर्ण पद प्राप्त होते रहे। जुलाई 2020 से अगस्त 2024 तक, वे ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (BSPCHCL) के चेयरमैन रहे। यही वो दौर था जब उन्होंने सबसे बड़े भ्रष्ट कार्य संचालित किए।
मुख्य आरोप और मामले
(1) सामूहिक दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न (2021)
2021 में एक महिला वकील ने संजीव हंस और पूर्व RJD विधायक गुलाब यादव के खिलाफ दिल्ली के एक होटल में सामूहिक दुष्कर्म का गंभीर आरोप लगाया। महिला का दावा था कि गुलाब यादव ने उसे महिला आयोग की सदस्यता का लालच देकर रूकणपुरा, पटना के अपने आवास पर बुलाया। उसे कहा गया कि वहां दुष्कर्म किया गया और एक अश्लील वीडियो भी बनाई गई। बाद में गुलाब यादव ने इस वीडियो से उसे ब्लैकमेल करना शुरू किया और दिल्ली के एक होटल में बुलाया, जहां संजीव हंस भी मौजूद थे। उसके अनुसार, दोनों ने बंदूक की नोक पर घटना को अंजाम दिया।
जनवरी 2023 में रूपसपुर थाने में FIR दर्ज की गई, जिसमें आईपीसी की धाराएं 323, 341, 376, 376डी (सामूहिक दुष्कर्म), 420 (धोखाधड़ी), 313 (गर्भपात के लिए बाध्य करना), 120B (आपराधिक साजिश), 504, 506, और 34 के तहत आरोप लगाए गए। हालांकि, पटना हाईकोर्ट ने सितंबर 2023 में इस FIR को रद्द कर दिया।
- टेंडर घोटाला – स्मार्ट मीटर (₹3,300 करोड़)
संजीव हंस के खिलाफ सबसे गंभीर आरोप स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में पाया गया कि उन्होंने 2022-23 में पूरे बिहार में स्मार्ट मीटर सप्लाई के ₹3,300 करोड़ के ठेकों में रिश्वत ली थी।
जीनस पावर इन्फ्रा लिमिटेड (GPIL) नामक कंपनी को स्मार्ट मीटर लगाने का ठेगा दिया गया था। ईडी की चार्जशीट में कहा गया है कि जीपीआईएल ने हंस के नियंत्रण वाले उप-ठेकेदारों के माध्यम से उन्हें रिश्वत दी। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि स्मार्ट मीटर ठेकेदार ने हंस को एक मर्सिडीज कार भी दी, जो उनके भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
इस मामले में ठेकेदार रिशु श्री (उर्फ रेशु रंजन सिन्हा) को मुख्य आरोपी बनाया गया। विशेष सतर्कता इकाई ने पाया कि रिशु श्री और हंस की पूरी नेटवर्क सरकारी ठेकों को “मैनेज” करने का काम करती थी। - सोलर लाइट घोटाला
बिहार मुखिया महासंघ ने संजीव हंस पर गंभीर आरोप लगाया कि उन्होंने पंचायतों में सोलर लाइट लगवाने की योजना में भारी घोटाला किया। आरोप है कि 17,000 रुपये की गुणवत्ता वाली सोलर लाइट को 30,500 रुपये में लगवाया गया—लगभग 80% अधिक कीमत पर। ये लाइटें घटिया चाइनीज क्वॉलिटी की थी जो तुरंत खराब हो गई, जिससे पंचायत स्तर पर करोड़ों का नुकसान हुआ।
आय से अधिक संपत्ति और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग)
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में पाया कि 2018 से 2023 के बीच 5 वर्षों में, हंस ने अपने कानूनी आय से लगभग ₹90 करोड़ अधिक सम्पत्ति अर्जित की।
जब्त की गई संपत्तियां और मूल्य
नकद: ₹11.64 करोड़ (सात ठिकानों से, सातों घंटे तक काउंटिंग मशीन से गिनना पड़ा)
अचल संपत्ति (जब्त): ₹23.72 करोड़
नागपुर: 3 प्लॉट्स
दिल्ली: 1 फ्लैट (9.60 करोड़ मूल्य)
जयपुर: 3 फ्लैट्स
सोने के आभूषण: ₹1.25 करोड़
विलासिता की घड़ियां: ₹65 लाख
चांदी की बुलियन: ₹11 लाख
शेयर्स (प्रॉक्सी खातों में): ₹60 करोड़
बेनामी रियल एस्टेट निवेश: ₹18 करोड़
हिमाचल प्रदेश (कसौली) में ग्लेनव्यू रिसॉर्ट: ₹95 करोड़ निवेश
पुणे में सीएनजी पेट्रोल पंप: ₹1.80 करोड़ (संयुक्त उद्यम)
लखनऊ में फ्लैट: ₹90 लाख
कुल जब्त/संलग्न: ₹23.72 करोड़ + अन्य संपत्तियां
कुल संचित अवैध दौलत: लगभग ₹100-120 करोड़
बैंक खातों का नेटवर्क
ईडी ने 70 से अधिक बैंक खातों में ₹6 करोड़ की संदिग्ध जमा राशि जब्त की। ये खातें विभिन्न नामों में थे, जो हवाला लेनदेन और बेनामी निवेश का स्पष्ट संकेत देते हैं।
राजनीतिक संबंध और सहयोगी नेटवर्क
नीतीश कुमार से संबंध
संजीव हंस को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के “पसंदीदा” और “विश्वस्त” आईएएस अधिकारियों में माना जाता था। इसी कारण उन्हें लंबे समय तक ऊर्जा विभाग जैसे महत्वपूर्ण और शक्तिशाली विभागों का नेतृत्व करने का अवसर दिया गया। दिसंबर 2025 में, नीतीश सरकार ने उनका निलंबन समाप्त कर दिया और उन्हें राजस्व परिषद का अपर सचिव बनाया गया। यह निर्णय बताता है कि मनी लॉन्ड्रिंग, आय से अधिक संपत्ति, टेंडर घोटाला जैसे गंभीर मामले चलने के बावजूद हंस को राजस्व परिषद जैसा अहम विभाग मिला है। यह बताता है कि उनकी पहुंच कितनी अधिक है।
गुलाब यादव, पूर्व झंझारपुर विधायक और RJD के करीबी, संजीव हंस के मुख्य सहयोगी और व्यावसायिक साझेदार थे। दोनों के गहरे गहरे व्यापारिक संबंध थे।
व्यावसायिक: पुणे में एक संयुक्त सीएनजी पेट्रोल पंप (1.80 करोड़ रुपये में खरीदा गया, 2015) जो दोनों की पत्नियों के नाम पर संचालित था।
वित्तीय: दिल्ली फ्लैट में हंस के परिवार का निवास, जो ₹9.60 करोड़ की कीमत का था, ठेकेदार प्रवीण चौधरी के नाम पर था।
अपराधिक: सामूहिक दुष्कर्म के मामले में संयुक्त रूप से आरोपी।
अन्य राजनीतिक जुड़ाव
सुनील कुमार सिन्हा: पूर्व सेना कर्मी, राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के नेता। हंस के निर्देश पर, सिन्हा ने एक महिला वकील को ₹2.44 करोड़ रुपये हवाला के माध्यम से दिए और लखनऊ में ₹90 लाख का फ्लैट दिलवाया। यह भुगतान उस महिला को “चुप रखने” का एक तरीका था जिसने सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई और जांच
छापेमारी और नकदी की जब्ती
जुलाई 2024: पहली छापेमारी में ₹80 लाख नकद, 13 किग्रा चांदी की बुलियन, 2 किग्रा सोना और ₹1.50 करोड़ की लग्जरी चीजें मिलीं।
मार्च 2025: ईडी ने पटना के सात सरकारी अधिकारियों के ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की। इस बार ₹11.64 करोड़ की नकद राशि जब्त की गई, जो इतनी ज़्यादा थी कि सात घंटे तक नकद गिनने की मशीनें चलानी पड़ीं। इसके साथ ही, सम्पत्तियों के दस्तावेज, रिश्वत वितरण के रिकॉर्ड और डिजिटल प्रमाण भी जब्त किए गए।
दिसंबर 2024: ईडी ने ₹23.72 करोड़ की संपत्ति स्थायी रूप से अटैच की: नागपुर में 3 प्लॉट, दिल्ली में 1 फ्लैट, और जयपुर में 3 फ्लैट्स। ये संपत्तियां हंस के प्रॉक्सी खातों (प्रवीण चौधरी, पुष्पराज बजाज) के नाम पर थीं।
गिरफ्तारी और जेल
18 अक्टूबर 2024: संजीव हंस को पटना के अपने सरकारी आवास से गिरफ्तार किया गया। गुलाब यादव को एक दिन पहले दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। दोनों को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया गया।
जेल की अवधि: हंस को लगभग 10 महीने (अक्टूबर 2024 से अक्टूबर 2025 तक) बेऊर केंद्रीय जेल, पटना में न्यायिक हिरासत में रखा गया।
चार्जशीट और आरोप
प्रवर्तन निदेशालय ने 20,000 पेज की विशाल चार्जशीट दाखिल की, जिसमें:
14 नामजद आरोपी (हंस, गुलाब यादव, महिला वकील, प्रवीण चौधरी, आदि)
₹100 करोड़ का घोटाला आरोप
विस्तृत वित्तीय लेनदेन के ब्यौरे
हवाला संचालन के सबूत
15 दिसंबर 2025 को बिहार सरकार ने संजीव हंस का निलंबन औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया। सामान्य प्रशासन विभाग ने आधिकारिक अधिसूचना जारी की। फिर 29 दिसंबर 2025 को हंस को राजस्व परिषद का अपर सचिव नियुक्त किया गया। यह निर्णय विवादास्पद रहा क्योंकि:
मनी लॉन्ड्रिंग का मामला अभी भी न्यायालय में लंबित है
उनके खिलाफ अभी भी कई अन्य मामलों की जांच चल रही है
भ्रष्टाचार के तंत्र और नेटवर्क
ईडी की जांच से संजीव हंस के परिष्कृत भ्रष्टाचार नेटवर्क का खुलासा हुआ:
बेनामी संपत्ति: करीबी सहयोगियों (प्रवीण चौधरी, पुष्पराज बजाज, गुलाब यादव) के नाम पर संपत्ति रजिस्टर करना
हवाला लेनदेन: भारी नकद राशि को “अनौपचारिक” तरीके से स्थानांतरित करना, विशेषकर सुनील कुमार सिन्हा के माध्यम से
ठेके में हेराफेरी: जीनस पावर जैसी कंपनियों को ₹3,300 करोड़ के ठेके देना, उप-ठेकेदारों को हंस के करीबियों को रखना
परिवार को शामिल करना: पत्नी (हरलोविलिन कौर/मोना हंस) और अन्य परिवार के सदस्यों को व्यावसायिक निवेश में शामिल करना
बहु-राज्य संपत्ति: दिल्ली, जयपुर, नागपुर, हिमाचल (कसौली) में बिखरी संपत्तियां, जिससे ट्रेस करना मुश्किल हो अब सवाल उठता है कि इन सबमें नीतीश कुमार की भूमिका क्या थी? क्या वे हंस के भ्रष्ट कार्यों से अनजान थे, या उन्होंने जानबूझकर संरक्षण प्रदान किया? इस मामले के अन्य आरोपी कहां हैं? क्योंकि अभी भी 12 अन्य नामजद आरोपी (ठेकेदार, सिविल इंजीनियर, बैंकर) गायब हैं। कैसे एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी इतने व्यापक भ्रष्टाचार को 5 वर्षों तक संचालित कर सकता था?
संजीव हंस का मामला बिहार की खोखली प्रशासनिक व्यवस्था और अफसरशाही के संकट का जीता जागता प्रतीक है। यह दर्शाता है कि कैसे एक शीर्ष-स्तरीय सरकारी अधिकारी, सत्ता के समर्थन से, ₹100 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित कर सकता है। बिहार सच में कभी नहीं सुधर सकता।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

