जामताड़ा(JAMTADA):मनरेगा से छेड़छाड़ और उसका नाम बदलने की कथित साजिश के खिलाफ सोमवार को जामताड़ा की सड़कों पर कांग्रेस का जनाक्रोश फूट पड़ा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं, महिलाओं और युवाओं की भारी मौजूदगी के साथ हुआ यह प्रदर्शन सिर्फ एक विरोध नहीं। बल्कि केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ चेतावनी था—कि गरीब के हक़ पर हाथ पड़ा तो जवाब ईंट का पत्थर से मिलेगा। नारे ऐसे गूंजे कि सत्ताधारी कान ढकने को मजबूर दिखे—“नाम बदला, हक छीना नहीं चलेगा”, “मनरेगा हमारा अधिकार है।”
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने तंज और मुहावरों की धार से भाजपा पर सीधा प्रहार किया। वक्ताओं ने कहा—“जिस सरकार के पास रोज़गार देने का रोडमैप नहीं, वह नाम बदलकर इतिहास मिटाने निकली है। यह वही नीति है—ऊपर से चमक, अंदर से खोखलापन।”
डॉ. इरफान अंसारी का तीखा हमला: ‘गरीब की थाली पर राजनीति’
झारखंड सरकार के मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने मंच से भाजपा को खुली चुनौती देते हुए कहा कि मनरेगा कांग्रेस की ऐतिहासिक देन है—यह काग़ज़ी योजना नहीं, करोड़ों गरीब परिवारों की जीवनरेखा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा—“भाजपा को काम से नहीं, नाम से एलर्जी है। काम कर नहीं पाती, नाम बदलकर श्रेय लूटना चाहती है।”
उन्होंने कहा कि कभी 60:40 जैसे प्रावधानों की आड़, तो कभी नाम बदलने का खेल—यह सब गरीबों के संवैधानिक अधिकारों पर ‘चुपचाप हमला’ है। “झारखंड जैसे गरीब राज्य में यह प्रयोगशाला की राजनीति मजदूरों की पीठ पर बोझ डालने का षड्यंत्र है,” उन्होंने जोड़ा।
डॉ. अंसारी ने बेरोजगारी और महंगाई पर कटाक्ष करते हुए कहा—“युवा काम ढूंढ रहे हैं, सरकार बहाने। महंगाई ने कमर तोड़ दी है और सत्ताधारी आंखें मूंदे बैठे हैं। अगर अच्छा नहीं कर सकते तो कम से कम बुरा करना बंद करें।”
उन्होंने चेताया—“मनरेगा की आत्मा से छेड़छाड़ हुई तो कांग्रेस सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी। जरूरत पड़ी तो घेराव और उग्र आंदोलन भी होगा।”
गांधी का नाम हटाना—गरीब के स्वाभिमान पर वार’
वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा से गांधी का नाम हटाना सिर्फ नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि गरीबों के सम्मान पर हमला है। “इतिहास मिटाकर भविष्य नहीं बनता,” यह संदेश बार-बार दोहराया गया।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष दीपिका बेसरा का ऐलान
जामताड़ा जिला कांग्रेस अध्यक्ष दीपिका बेसरा ने कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए कहा—“यह लड़ाई किसी एक योजना की नहीं, गरीब के हक़ की है। कांग्रेस मनरेगा के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ को सफल नहीं होने देगी। हम एकजुट हैं और पूरी ताकत से लड़ेंगे।”
निशापति हांसदा का प्रहार
निशापति हांसदा ने भाजपा को गरीब-विरोधी और आदिवासी-विरोधी बताते हुए कहा—“यह पार्टी छीनने की राजनीति करती है। आदिवासी और मजदूर इसके एजेंडे में नहीं, सिर्फ नारों में हैं।”
आंदोलन के प्रमुख संदेश
- मनरेगा से गांधी का नाम हटाना गरीबों के सम्मान पर हमला
- 60:40 प्रावधान के जरिए राज्यों पर बोझ डालने की साजिश
- भाजपा की नीतियों से बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई
- कांग्रेस गरीब–मजदूर–किसान के साथ चट्टान की तरह खड़ी
- संघर्ष और तेज़ करने का ऐलान
उपस्थित प्रमुख नेता व कार्यकर्ता
कार्यक्रम में जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष विजय दुबे, अजित दुबे, मुक्ता मंडल, बाम सरखेल, पूर्णिमा धर, कमरुद्दीन अंसारी, नंदकिशोर सिंह, अरुण दास, मिरुदी सोरेन, विनोद छतरी, प्रकाश मंडल, दानिश रहमान, वर्षा खान, जसबीर गांधी, तनवीर आलम, आरसी, राजकुमार दास, अभय पांडेय, बीरबल अंसारी, मुनमुन चक्रबर्ती सहित महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कुल मिलाकर संदेश साफ़ था—मनरेगा से छेड़छाड़ अब राजनीतिक खेल नहीं, जनआंदोलन बनेगा।
NEWSANP के लिए आर पी सिंह की रिपोर्ट

