धनबाद(DHANBAD): झारखंड विधानसभा में पार्टी के सचेतक एवं धनबाद विधायक राज सिन्हा ने आज सदन में राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग से जुड़े एक अत्यंत गंभीर एवं अहम मामले को जोरदार तरीके से उठाया।
विधायक सिन्हा ने जानकारी देते हुए बताया कि धनबाद जिला अंतर्गत गोविंदपुर एवं धनबाद निबंधन कार्यालयों में पिछले दो वर्षों में 1600 से अधिक चल–अचल संपत्तियों का निबंधन बिना पैन कार्ड प्रस्तुत किए किया गया है, जिनमें 400 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद–बिक्री दर्ज की गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों निबंधन कार्यालयों से सैकड़ों ऐसे संदिग्ध डीड बरामद हुए हैं, जिनका मूल्यांकन करोड़ों में है, जबकि ऐसे मामलों में फॉर्म–60 का प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है। यह स्पष्ट संकेत है कि उच्च मूल्य वाली संपत्तियों के निबंधन में भारी अनियमितताएँ बरती गई हैं और पैन/फॉर्म–60 उपलब्ध नहीं कराए जाने से राज्य सरकार को राजस्व की भारी क्षति उठानी पड़ी है।
विधायक राज सिन्हा ने सदन में उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण में वे सभी कर्मचारी एवं पदाधिकारी चिन्हित किए जाएँ जिनकी मिलीभगत से यह घोर अनियमितता हुई है। उन्होंने जोरदार ढंग से मांग किया कि दोषियों पर विधि सम्मत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लग सके और राज्य के राजस्व हितों की रक्षा हो।
विधायक सिन्हा ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव की सूचना के तहत धनबाद जिला अंतर्गत वर्ष 1954 में राष्ट्रीय हित में निर्मित मैथन डैम परियोजना के लिए दामोदर घाटी निगम डीवीसी ने 50 से भी अधिक परिवारों को विस्थापन नीति के तहत अन्यत्र पूर्णवासित किया जिसमें से 30 विस्थापित अनुसूचित जनजाति परिवारों की पूर्वजों की कृषि भूमि का अधिग्रहण की गई ।
इस प्रक्रिया में उनके पुश्तैनी गांव सीजुआ तत्कालीन( प्रखंड कार्यालय निरसा धनबाद) वर्तमान एंगारकुंड प्रखंड धनबाद से विस्थापित कर मौजा केसरकुराल (एगारकुंड प्रखंड) एवं अन्य जगहों में पुनर्वासित किया गया। परंतु उन्हें पुनर्वासित भूमि पर आज तक किसी भी प्रकार का कानूनी स्वामित्व अधिकार प्रदान नहीं किया गया है ।इसके बावजूद पुनर्वा वास के समय दामोदर घाटी निगम डीवीसी ने उनके पूर्वजों को हुकुम नामा सौंपा ।जिसे विस्थापित परिवार विश्वास के साथ स्वामित्व मानकर दस्तावेज स्वीकार कर लिया। इन दस्तावेजों के आधार पर उनके पूर्वज पिछले 7 दशकों से पुनर्वासित स्थान पे जमीन पर घर बनाकर तथा खेती कर जीवन यापन कर रहे हैं। उनकी पुनर्वासित जमीन आज भी बिहार सरकार के नाम दर्ज है। वर्तमान में उनके समक्ष सबसे बड़ी समस्या यह उत्पन्न हो गई है कि उनके पुनर्वासित जमीन का आज तक मालिकाना हक नहीं मिल पाने के कारण उन अनुसूचित जनजाति परिवारों को सरकार द्वारा किसी भी प्रकार का कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विधायक सिन्हा ने सदन के माध्यम से मांग किया कि धनबाद जिला अंतर्गत 1954 में निर्मित मैथन डैम परियोजना से विस्थापित 30 अनुसूचित जनजाति परिवारों ,जो मौज केसरकुराल ग्राम नीमडंगा में पुनर्वासित किए गए हैं। उन्हें पुनर्वासित भूमि का अविलंब स्वामित्व अधिकार मालिकाना हक प्रदान किए जाने की मांग की।
NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

