राँची(RANCHI): झारखंड की जेलों में कैद कुख्यात अपराधियों की मोबाइल पर चलती ‘5G सरकार’ पर लगाम लगाने की कोशिश फिलहाल ठहर गई है। कारण, वही कंपनी, जिसे सबसे कम बोली (L1) देकर 4G-5G जैमर लगाने का बड़ा काम सौंपा गया था, अब बिल्कुल खामोश हो गई है। जेलों में 2G जैमर पुराने हो चुके हैं और 5G मोबाइल से चल रहे हाई-प्रोफाइल अपराध कई बार पकड़े जा चुके हैं। ऐसे में यह प्रोजेक्ट बेहद अहम था, लेकिन अब इस पर ग्रहण लगता दिख रहा है। जेल IG सुदर्शन मंडल ने मीडिया को बताया कि हैदराबाद की जिस कंपनी को टेंडर मिला था, वही L-1 भी थी, वही सबसे कम रेट देने वाली, वही काम करने की जिम्मेदार, लेकिन अब, कंपनी का कोई जवाब नहीं आया। रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं, अधिकारी फोन और मेल लगातार कर रहे हैं, लेकिन कंपनी जैसे गायब हो चुकी है। जेल प्रशासन को शक है कि टेंडर हासिल करने के लिये कंपनी ने बहुत कम रेट कोट कर दिया। अब जब काम सामने आया, तो कम कीमत में 5G जैमर इंस्टॉल करना उन्हें महंगा पड़ रहा है। यही कारण है कि कंपनी अब हाथ पीछे खींच रही है।
केवल दो कंपनियां पूरे देश में अधिकृत
देशभर में जेलों में जैमर लगाने का अधिकार सिर्फ दो कंपनियों को है भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) एवं इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) है। इन दोनों कंपनियों के जैमर SPG, IB और कैबिनेट सचिवालय से मान्य हैं। लेकिन झारखंड ने किसे अधिकृत किया, यह अभी साफ नहीं हो सका। इधर, कंपनी की बेरुखी से जेल मुख्यालय परेशान है। सूत्र बताते हैं कि पुराना टेंडर रद्द हो सकता है, नये सिरे से फिर टेंडर निकाला जा सकता है। फिलहाल रिमाइंडर का इंतजार है, लेकिन जवाब अब तक नहीं मिला।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

