धनबाद (DHANBAD): वैसे तो कृष्णा अग्रवाल खुद को राजनैतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता बताने के साथ बीजेपी के समर्थक मानते है..उन्होंने धनबाद मौजूदा राजनीति और बीजेपी के अंदर मेयर चुनाव को लेकर मचे घमासान पर अपनी समीक्षात्मक विचार व्यक्त किए है..पढ़िए पूरा आलेख..
धनबाद की राजनीति का बदलता समीकरण और नई राजनीतिक खींचतान प्रारम्भ…
धनबाद की राजनीति इन दिनों एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है।यहाँ जातिगत समीकरण,राजनीतिक वर्चस्व और नेतृत्व की प्रतिस्पर्धा जिस तरह बदल रही है,वह आने वाले धनबाद नगर निगम चुनाव को बेहद रोचक और प्रभावी बनाती है।
सबसे पहले बात सांसद ढुल्लू महतो की जो वर्तमान सांसद होने के साथ-साथ बाघमारा से लगातार तीन बार विधायक रह चुके हैं।पिछले चुनाव में उन्होंने खुले तौर पर बैकवर्ड–फॉरवर्ड की जातिगत राजनीति को उछाला ओर पूरे लोकसभा क्षेत्र में फारवर्ड विरोधी एक नया ओर बड़ा माहौल बनाने में सफल हुए। ढुल्लू महतो के सांसद बनने से पहले यह सीट भाजपा के ही वरिष्ठ नेता पशुपतिनाथ सिंह के पास थी जो लगातार तीसरी बार सांसद,तीन बार विधायक,झारखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। लगभग चार दशकों तक धनबाद की राजनीति में वर्ग विशेष बाहरी समाज खासकर सिंह मेंशन–रघुकुल एवँ निर्वतमान सांसद श्री पशुपतिनाथ सिंह जी का व्यापक प्रभाव रहा।समय बदला,समीकरण बदले और आज राजनीति के केंद्र में ढुल्लू महतो जी हैं जो यह भी दर्शाता है कि धनबाद की राजनीति में अब एक नया युग की शुरआत हो चुकी है और जनता नए नेतृत्व के रूप में ढुल्लू महतो को मौका देकर अपनी स्वीकार्यता दी है।
धनबाद नगर निगम के पहले चुनाव 2010 में नीरज सिंह उपमहापौर निर्वाचित हुए थे।बाद मे उनकी सरेआम हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड का आरोप उनके ही चचेरे भाई,सिंह मेंशन निवासी और झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह पर लगा। यही घटना धनबाद की राजनीति का वह मोड़ बनी जिसने सिंह मेंशन और रघुकुल के बीच स्थायी और गहरे पारिवारिक एवँ राजनीतिक विरोध को जन्म दिया,जो आज भी जारी है।
पिछला लोकसभा चुनाव भी अत्यंत हाई-प्रोफाइल रहा। भाजपा प्रत्याशी ढुल्लू महतो का मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी अनुपमा सिंह से हुआ,जो बेरमो विधायक अनूप सिंह की पत्नी और 6 बार के विधायक स्व. राजेन्द्र सिंह की पुत्रवधू हैं। मजबूत राजनीतिक परिवार और कांग्रेस संगठन का साथ होने के बावजूद ढुल्लू महतो ने लगभग 3.5 लाख मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज की जो उनकी बढ़ती पकड़ और भाजपा के मत-समीकरण का स्पष्ट संकेत था।
धनबाद नगर निगम चुनाव को लेकर सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि निवर्तमान महापौर चंद्रशेखर अग्रवाल ने दोबारा चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है और अपने कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों के आधार पर उनकी दावेदारी स्वाभाविक मानी जा रही है।दूसरी ओर बड़ी तेजी से यह कयास लगाया जा रहा है कि सांसद ढुल्लू महतो अपनी पत्नी सावित्री देवी को नगर निगम चुनाव में महापौर प्रत्याशी के रूप में खड़ा करेंगे। ढुल्लू महतो के विरोधी खेमे में शामिल कोई भी बड़े नेता ने अभी तक चुनाव लड़ने की घोषणा नहीं की है,जिससे यह प्रतीत होता है कि पूरा विरोधी मोर्चा बिखरा और असमंजस में है।
एक बड़ा दिलचस्प तथ्य यह भी है कि चंद्रशेखर अग्रवाल और ढुल्लू महतो दोनों ही OBC (पिछड़ा वर्ग) से आते हैं। ऐसे में ढुल्लू महतो की सबसे चर्चित रणनीति “बैकवर्ड–फॉरवर्ड” का इस चुनाव में बिल्कुल असरदार नहीं रह पाएगी, क्योंकि उनके सामने सबसे प्रमुख संभावित चेहरा भी उसी OBC समुदाय से है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ढुल्लू महतो अपनी पत्नी सावित्री देवी जी को जिताकर नगर निगम पर कब्जा कर लेते हैं,तो इसका सीधा असर धनबाद विधायक राज सिन्हा और झरिया विधायिका रागिनी सिंह के राजनीतिक भविष्य पर पड़ सकता है। सांसद ढुल्लू महतो का लगातार बढ़ता प्रभाव भविष्य में इन दोनों के लिए गंभीर चुनौती बनाना तय है।
इसके अलावा यह भी कयास लगाया जा रहा है कि अगर ढुल्लू महतो नगर निगम चुनाव जितवाने में सफल होते हैं,तो उनका अगला लक्ष्य जिला परिषद अध्यक्ष का चुनाव जीतना होगा।यानी शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक पूरे भूगोल में अपना एकछत्र राजनीतिक नियंत्रण स्थापित करना और यदि यह दोनों मोर्चे उनके हाथ में आ जाते हैं,तो पूरे कोयलांचल में उनका एकतरफा राजनीतिक साम्राज्य स्थापित हो जाएगा जिससे अन्य सभी परंपरागत राजनैतिक शक्तियाँ हाशिये पर जा सकती हैं।
ढुल्लू महतो बनाम ढुल्लू विरोधी यही चुनाव की असली लड़ाई,वर्तमान स्थिति में दो खेमों में स्पष्ट रूप से बंटी हुई है पहला पक्ष ढुल्लू महतो ओर दूसरा पक्ष ढुल्लू महतो विरोधी खेमा। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि दूसरे पक्ष के सभी प्रमुख घटक सिंह मेंशन,रघुकुल, धनबाद विधायक,निवर्तमान सांसद,निवर्तमान महापौर सब आपस में ही एक-दूसरे के विरोधी हैं। ऐसे में यह आशंका वास्तविक है कि विरोधी खेमे के आपसी मतभेद और आंतरिक कलह अनजाने में ही ढुल्लू महतो के लिए जीत का रास्ता और आसान न बना दें।
धनबाद की राजनीति आज एक निर्णायक मोड़ पर है। हर छोटा निर्णय,हर नया चेहरा और हर सामरिक चाल आने वाले वर्षों की राजनीति को तय करेगी। चुनाव भले कुछ समय दूर हो,लेकिन उसकी सरगर्मी और खींचतान अभी से पूरे क्षेत्र को राजनीतिक ताप से भर चुकी है।
धनबाद फिर एक बार चर्चा के केंद्र में है और इस बार मुकाबला पहले से कहीं ज़्यादा दिलचस्प।
NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

