सीईओ की नियुक्ति के इंतजार में झरिया पुनर्वास…

सीईओ की नियुक्ति के इंतजार में झरिया पुनर्वास…

धनबाद(DHANBAD): सीईओ की नियुक्ति नहीं होने से झरिया पुनर्वास प्रभावित है। अभी दो दिन के दौरे पर धनबाद पहुंचे कोयला मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी हिटलर सिंह ने विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। बीसीसीएल और जेआरडीए के अधिकारियों से बात की। अंदरखाने की सूचना के अनुसार सीईओ की नियुक्ति नहीं होने से झरिया पुनर्वास का काम प्रभावित है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो पुनर्वास में हो रही देरी पर कोयला मंत्रालय चिंतित है। दौरे पर हिटलर सिंह कोयला मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपेंगे। अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने जो संकेत दिए हैं उसके अनुसार सीईओ की अविलंब नियुक्ति प्राथमिकता होगी।

संशोधित मास्टर प्लान को स्वीकृति के समय ही पुनर्वास योजना की मॉनिटरिंग एवं बीसीसीएल-जेआरडीए के बीच समन्वय के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी को सीईओ के रूप में नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है। केंद्र व राज्य को मिलकर सीईओ की नियुक्ति करनी है, जिसमें राज्य सरकार की भूमिका ज्यादा है। अबतक सीईओ की नियुक्ति नहीं होने से कई अहम टेंडर व नीतिगत निर्णय आदि में दिक्कत हो रही है। झरिया पुनर्वास के लिए संशोधित मास्टर प्लान की स्वीकृति के बाद जिस गति से पुनर्वास की उम्मीद थी वह नहीं हो रहा है। सिर्फ बीसीसीएल के कुछ कर्मियों का पुनर्वास होना है। मुख्य फोकस गैर-बीसीसीएल परिवारों के पुनर्वास पर है। झरिया पुनर्वास प्रथम चरण के तहत दिसंबर तक भूमिगत आग प्रभावित क्षेत्र में रह रहे बीसीसीएल कर्मियों के परिवारों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। प्रभावित क्षेत्र के क्वार्टर में रहने वाले 648 बीसीसीएल कर्मियों के परिवार में से 25 अक्तूबर 2025 तक 425 बीसीसीएल कर्मियों को शिफ्ट कर दिया गया है। बाकी को दिसंबर तक हर हाल में सुरक्षित क्षेत्र में क्वार्टर आवंटित कर दिया जाएगा। वहीं जेआरडीए की ओर से कोयला मंत्रालय के अधिकारियों को बताया गया कि बेलगड़िया में सुविधा बहाली का काम जारी है। इसके बाद पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कोयला मंत्रालय की ओर से झरिया पुनर्वास की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर समीक्षा की गई। इसमें बीसीसीएल एवं जेआरडीए के अधिकारी शामिल हुए। मंत्रालय की ओर से भू-धंसान व अग्नि प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित करने पर जोर दिया गया। कहा गया कि सुरक्षित पुनर्वास सरकार की प्राथमिकता है। झरिया क्षेत्र में कुल 595 अग्नि प्रभावित क्षेत्र हैं, इनमें 81 क्षेत्र अतिसंवेदनशील हैं। पहले चरण में 81 सबसे संवेदनशील क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया गया है। मालूम हो कि 81 अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में 14,460 परिवार रहते हैं, इनमें 1,860 रैयत और करीब 12,600 परिवार अवैध कब्जेधारी हैं। उन्हें शिफ्ट करने की जिम्मेदारी बीसीसीएल व झरिया पुनर्वास व विकास प्राधिकार की है। मंत्रालय ने झरिया पुनर्वास में देरी पर चिंता जताई है। प्रभावित परिवारों को निर्धारित समय सीमा में शिफ्टिंग कराने पर जोर दिया गया। इस दौरान बीसीसीएल और जेआरडीए की ओर से अबतक किए गए कार्यों की जानकारी दी गई। जून में ही संशोधित मास्टर प्लान को स्वीकृति: भारत सरकार के मंत्रिमंडल ने 25 जून-2025 को 5,940 करोड़ के संशोधित झरिया मास्टर प्लान को मंजूरी दे दी है। योजना का उद्देश्य झरिया में भूमिगत कोयला आग, धंसान और पुनर्वास की समस्याओं से निपटना है, जिसमें प्रभावित परिवारों के लिए आजीविका और बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है। यह निर्णय झरिया के लाखों प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया है जो वर्षों से इन समस्याओं से पीड़ित हैं। योजना का मुख्य लक्ष्य आग और धंसान से प्रभावित परिवारों का पुनर्वास करना और उनके लिए आजीविका के अवसर प्रदान करना है। पुनर्वास स्थल पर सड़क, बिजली, पानी, स्कूल और अस्पताल जैसी आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *