झारखंड(JHARKHAND): झारखंड पुलिस में एक अजीबो गरीब मामला सामने आया है। खूंटी के सायको थाना में तैनात दारोगा रामसुधार सिंह ने वर्दी का दुरुपयोग कर अपने जमीन विवाद के तीन दशक पुराने मामले में विरोधी को फंसाने की कोशिश की है। दारोगा ने बिहार के बेगूसराय के रहने वाले अमरेंद्र कुमार को अवैध अफीम की खेती के मामले में झूठा अभियुक्ति बना दिया। डीजीपी के निर्देश पर हुई जांच में सच सामने आ गया। इसके बाद खूंटी के एसपी मनीष टोप्पो ने दारोगा रामसुधार सिंह को निलंबित कर दिया है। दारोगा के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरु कर दी गयी है। वहीं एनडीपीएस मामले की जांच से रामसुधार सिंह को हटा दिया गया है। अब इस केस की जांच की जिम्मेदारी दारोगा प्रभात रंजन पांडेय को सौंपी गयी है।
सायको थाना में 20 फरवरी 2025 को एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला कांड संख्या 13 /25 दर्ज किया गया था। इस केस में मुख्य अभियुक्त लाखा पाहन को गिरफ्तार किया गया था। केस के अनुसंधानकर्ता दारोगा रामसुधार सिंह ने लाखा पाहन के कथित बयान के आधार पर रिपोर्ट तैयार की, जिसमें यह दिखाया गया कि अमरेंद्र कुमार ने जिलिंगकेला में अफीम की खेती के लिए लाखा पाहन को 25 हजार रुपये दिये थे। जांच में यह दावा पूरी तरह गलत साबित हुआ।
डीएसपी की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि अमरेंद्र कभी खूंटी नहीं गया था और न ही लाखा पाहन कभी बेगूसराय आया था। दोनों के बीच फोन पर भी कोई बातचीत नहीं हुई थी, इसके बावजूद रामसुधार सिंह ने वर्षो पुराना जमीन विवाद में जानबूझकर अमरेंद्र को मामले में मुख्य अभियुक्त बना दिया।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

