धनबाद(DHANBAD):अनुशासन, आस्था और प्रकृति से गहरे जुड़ाव का प्रतीक चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा शनिवार, 25 अक्टूबर से नहाय-खाय के साथ कोयलांचल धनबाद क्षेत्र में पूरे उत्साह और भक्ति भाव से शुरू हो गया है. धनबाद, झरिया, सिंदरी, गोविंदपुर, बलियापुर, निरसा और आसपास के इलाकों में सुबह से ही व्रतियों ने नदी, तालाबों और जलाशयों में स्नान कर सूर्य देव की आराधना करते हुए इस पवित्र और अनुशासित व्रत की शुरुआत की.छठ पूजा का पहला दिन नहाय-खाय शरीर और मन की शुद्धि का प्रतीक है .व्रती इस दिन स्नान कर शरीर को पवित्र करते हैं और केवल कद्दू-भात तथा चना दाल का सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं. यह चरण व्रती को सांसारिक मोह से हटकर पूरी तरह ईश्वर भक्ति और आत्मसंयम के मार्ग पर अग्रसर करता है.यह महापर्व अत्यंत सादगी और शुद्धता के साथ चार दिनों तक मनाया जाता है शनिवार 25 अक्टूबर नहाय-खाय के साथ सात्विक भोजन ,रविवार, 26 अक्टूबर को खरना दिनभर निर्जला उपवास और शाम को गुड़-चावल की खीर, रोटी व केले का प्रसाद ग्रहण करना,सोमवार 27 अक्टूबर को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य ) देकर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है और मंगलवार 28 अक्टूबर को उदयमान सूर्य को अर्घ्य ( उगते सूर्य को अर्घ्य )देकर व्रत का समापन.छठ पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जल, अन्न और सूर्य जैसे जीवन के आधार तत्वों की पूजा कर प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और आभार प्रकट करने का पर्व है .नहाय-खाय के दिन का सादा भोजन हमें सादगी और आत्मसंयम का महत्वपूर्ण संदेश देता है.
वहीं पर्व को देखते हुए धनबाद जिला प्रशासन ,नगर निगम और सामाजिक संस्थाएं छठ घाटों की सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के लिए तेजी से काम कर रही हैं. प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए घाटों पर गोताखोर, एंबुलेंस और पुलिस बल की तैनाती की है.
NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

