धनबाद(DHANBAD): आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी इको-फ्रेंडली तकनीक विकसित की है, जिसके माध्यम से नारियल के सख्त खोल से उच्च गुणवत्ता वाली ग्रेफीन (Graphene) तैयार की गई है। यह शोध इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर मनोदीपन साहू के मार्गदर्शन में शोधार्थी आरती कुमारी, अनिमेष दुबे और आर. बंगाल ने किया है। यह उपलब्धि न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
इस नवाचार से संबंधित शोधपत्र प्रतिष्ठित ‘मटेरियल केमिस्ट्री एंड फिजिक्स’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोध में बताया गया है कि सूखे नारियल के खोलों को 400°C और 600°C तापमान पर कार्बोनाइजेशन प्रक्रिया से गुजारकर रिड्यूस्ड ग्रेफीन ऑक्साइड तैयार किया गया। इस प्रक्रिया से प्राप्त ग्रेफीन की सतह का क्षेत्रफल 356.97 वर्ग मीटर प्रति ग्राम पाया गया, जिसमें सूक्ष्म छिद्रों का आकार 1.85 से 86.71 नैनोमीटर के बीच रहा।
ग्रेफीन की भौतिक, प्रकाशीय और विद्युत गुणों की जांच एक्स-रे डिफ्रैक्शन, रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी, एक्सपीएस, एचआरटीईएम, एफटीआईआर और यूवी-विजिबल एनआईआर स्पेक्ट्रोस्कोपी जैसी आधुनिक तकनीकों से की गई। अध्ययन में यह पाया गया कि जब तापमान 400°C से बढ़ाकर 600°C किया गया, तो ऑप्टिकल बैंड गैप 1.95 eV से घटकर 1.53 eV रह गया, जबकि इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी 289 से बढ़कर 400 माइक्रो-सीमेंस प्रति सेंटीमीटर तक पहुँच गई।
रिसर्च में विकसित ग्रेफीन न केवल बेहतर विद्युत चालकता वाली है, बल्कि इसकी सतह भी उच्च गुणवत्ता की पाई गई है। यह तकनीक कम लागत वाली और पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। भविष्य में इसका उपयोग गैस सेंसर, बायोसेंसर, ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उपकरणों के निर्माण में किया जा सकेगा।
यह शोध इस बात का प्रमाण है कि कचरे को भी मूल्यवान संसाधन में बदला जा सकता है। नारियल के खोल जैसे बायो-वेस्ट से ग्रेफीन तैयार करना न केवल टिकाऊ औद्योगिक विकल्प प्रदान करता है, बल्कि प्रदूषणकारी पारंपरिक तकनीकों का एक हरित और आर्थिक रूप से लाभकारी विकल्प भी है।
NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

