धनबाद(DHANBAD): देशभर में आज नरक चतुर्दशीयानी छोटी दिवाली मनाया जा रही है. यह त्योहार दीपावली से ठीक एक दिन पहले कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है और अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा करने पर मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
यम का दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त : कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष के दिन नरक चतुर्दशी मनाई जाती है. 19 अक्टूबर, रविवार के दिन दोपहर 01:51 बजे से सोमवार 20 अक्टूबर सोमवार दोपहर 01:44 बजे तक रहेगी. नरक चतुर्दशी पर प्रदोष काल में यम का दीपक जलाने की परंपरा है. इससे अकाल मृत्यु का दोष खत्म होता है.
- यम का दीपक जलाने का मुहूर्त : 19 अक्टूबर – 5:50 बजे से शाम 07:02 बजे तक
- अभ्यंग स्नान का मुहूर्त : 20 अक्टूबर – सुबह में 05:13 बजे से सुबह 06:25 बजे तक
अकाल मृत्यु का भय होता है दूर: इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व है. इसमें तिल या सरसों के तेल में हल्दी, तिल आदि मिलाकर पूरे शरीर पर मालिश करके स्नान किया जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से पापों का नाश और शरीर में तेज बढ़ता है.
“संध्या के समय घर की दक्षिण दिशा में यमराज के नाम का एक दीपक जलाया जाता है, जिसे यम दीपदान कहते हैं. ऐसा माना जाता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और नर्क के दुखों से मुक्ति मिलती है.”
कैसे करें छोटी दिवाली के दिन पूजा?:इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, यमराज और माता लक्ष्मी के साथ-साथ हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व है. हनुमान चालीसा का पाठ करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. रात्रि के समय एक दीप जलाकर घर से निकाला जाता है और उसे दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रख दिया जाता है. ऐसा करते समय घर की सभी लाइट और रोशनी के उपाय बंद कर दिए जाते हैं. घर से पूरा अंधेरा करके दीप निकाला जाता है, जिसे यमदीप कहते हैं.
नरक चतुर्दशी का पौराणिक आधार: नरक चतुर्दशी के इस त्योहार के पीछे की सबसे प्रसिद्ध पौराणिक कथा भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी है. मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक एक अत्यंत शक्तिशाली और अहंकारी राक्षस का वध किया था.
नरकासुर ने 16000 से अधिक कन्याओं को बंदी बना रखा थाऔर देवताओं को भी परेशान किया हुआ था. जब उसके अत्याचार सहन से बाहर हो गए, तब भगवान कृष्ण ने माता सत्यभामा के सहयोग से नरकासुर का वध किया और सभी कन्याओं को मुक्त कराया. इस विजय के कारण इस तिथि को नरक चतुर्दशी कहा जाने लगा.
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

