राँची(RANCHI): राजधानी रांची की इन दिनों मिट्टी में घुली है सोंधी खुशबू, दीयों की लाली और बचपन की हंसी की झंकार। दीपावली की आहट ने राजधानी को फिर एक बार जगमग कर दिया है। मोरहाबादी मैदान इस वक्त किसी मेले से कम नहीं, रोशनी, रंग और रौनक का संगम। इस बार पटाखों की दुनिया में एक नई चमक आई है, ग्रीन क्रैकर्स की। कम धुआं, कम आवाज, लेकिन खुशी उतनी ही गूंजती हुई। दुकानदारों के मुताबिक पिछले दो सालों में इन पर्यावरण–मित्र पटाखों का चलन बढ़ा है और अब ये हर बच्चे की मुस्कान में शामिल हैं। मोरहाबादी का पूरा मैदान प्रशासन की देखरेख में है। हर दुकान के पास रेत, पानी और फायर सेफ्टी के उपकरण का इंतेजाम है, ताकि खुशियों की लौ किसी हादसे की छाया से धुंधली न हो। नन्हे हाथों के लिये रंगीन फुलझड़ियां, ग्लोइंग स्पार्कल्स और लाइट बम्स, सब कुछ उतना ही प्यारा जितनी उनकी मासूम हंसी। दुकानदार कहते हैं, “बच्चों की खुशी ही तो असली दीपावली है।” पटाखों की कीमतों में भले ही इस साल 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई हो, लेकिन उत्साह में रत्तीभर कमी नहीं। ग्राहकों की ज़ुबान पर बस एक ही बात, “दीपावली बिना पटाखों के अधूरी लगती है, थोड़ा बहुत धमाका तो बनता है।”
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

