धनबाद(DHANBAD):दुर्गा पूजा 2025 का पर्व 2 अक्टूबर को पूरे उल्लास के साथ संपन्न हुआ और 3 अक्टूबर को देवी प्रतिमाओं का विसर्जन भी सम्पन्न कर दिया गया। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में पूजा समितियों द्वारा लगाए गए अस्थायी पूजा पंडाल, भव्य गेट और तोरणद्वार अब तक जस के तस खड़े हैं। इन अवशेषों के कारण न केवल आमजन को यातायात जाम से जूझना पड़ रहा है, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना भी लगातार बनी हुई है।
इस पर सख्त रुख अपनाते हुए जिला प्रशासन ने सभी पूजा समितियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे तत्काल प्रभाव से अधिकतम दो दिनों के भीतर इन अस्थायी संरचनाओं को हटा दें और स्थल को समतल कर व्यवस्थित करें। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि तय समयसीमा के भीतर कार्रवाई न करने पर संबंधित समितियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।
जिला प्रशासन ने यह भी याद दिलाया कि झारखंड उच्च न्यायालय ने W.P. (PIL) No. 4838/2025 में दिनांक 23 सितंबर को ही आदेश जारी कर यह स्पष्ट कर दिया था कि दुर्गा पूजा या किसी भी पर्व के समाप्त होने के बाद पंडाल और तोरणद्वार हटाना अनिवार्य होगा और भूमि को पूर्ववत स्थिति में लाना होगा।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यातायात पुलिस और नगर निगम की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। जहां भी अव्यवस्था पाई जाएगी, वहां तुरंत कार्रवाई होगी। अधिकारी यह भी मानते हैं कि त्यौहार के दौरान भव्यता दिखाने की होड़ के कारण शहर में कई जगहों पर बड़े-बड़े पंडाल और गेट बनाए जाते हैं, लेकिन इन्हें समय पर न हटाना आम जनता के लिए परेशानी और खतरे का कारण बनता है।
प्रशासन ने अपील की है कि सभी पूजा समितियों के अध्यक्ष और सचिव स्वयं इस जिम्मेदारी को गंभीरता से लें और सार्वजनिक हित में सहयोग करें।
NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

