IIT (IDM) धनबाद के पूर्व छात्र डॉ. ओ. पी. मिश्रा को रूस की विटस बेरिंग कामचाटका स्टेट यूनिवर्सिटी ने ऑनरेरी प्रोफेसर की उपाधि दी….

IIT (IDM) धनबाद के पूर्व छात्र डॉ. ओ. पी. मिश्रा को रूस की विटस बेरिंग कामचाटका स्टेट यूनिवर्सिटी ने ऑनरेरी प्रोफेसर की उपाधि दी….

धनबाद(DHANBAD):आईआईटी (आईएसएम) धनबाद गर्व के साथ यह साझा करता है कि विभाग एप्लाइड जियोफिजिक्स के 1990 बैच के पूर्व छात्र और इस समय नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस), नई दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. ओ. पी. मिश्रा को रूस की विटस बेरिंग कामचाटका स्टेट यूनिवर्सिटी ने ऑनरेरी प्रोफेसर की उपाधि प्रदान की है। यह सम्मान उनके भूकंप विज्ञान (सीस्मोलॉजी) के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट शोध कार्य का प्रमाण है और भारत तथा रूस के बीच शैक्षणिक और वैज्ञानिक सहयोग को और मजबूत करने वाला कदम है।

डॉ. मिश्रा ने आईआईटी (आईएसएम) धनबाद से एप्लाइड जियोफिजिक्स में एम.एससी. टेक की डिग्री हासिल की और इसके बाद जापान के एहिमे यूनिवर्सिटी के जियोडायनमिक्स रिसर्च सेंटर से पीएच.डी. और डी.एससी. की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने एआईएमए, नई दिल्ली से प्रबंधन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी किया है। 30 से अधिक वर्षों के करियर में उन्होंने एप्लाइड जियोफिजिक्स, सीस्मोलॉजी और डिजास्टर मैनेजमेंट के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने आईडीआरसी-कनाडा और सीएमपीडीआई, सीआईएल के साथ प्रोजेक्ट पर काम किया, करीब 20 साल तक जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया में सेवाएं दीं, सार्क डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर, नई दिल्ली के डायरेक्टर रहे और जापान में एहिमे यूनिवर्सिटी में विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे। उन्होंने भारत और सार्क देशों का प्रतिनिधित्व कई संयुक्त राष्ट्र के मंचों पर किया और यूएन तथा वर्ल्ड बैंक से फंडेड डिजास्टर रिस्क प्रोजेक्ट्स में अहम भूमिका निभाई।

डॉ. मिश्रा नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया के फेलो (FNASc) हैं और उन्हें कई बड़े सम्मान मिले हैं, जिनमें 2008 में भारत सरकार का नेशनल मिनरल अवॉर्ड, 2014 में आईआईटी रुड़की का ए.एस. आर्य अवॉर्ड और 2015 में इंडियन जियोफिजिकल यूनियन का अन्नी तलवानी गोल्ड मेडल शामिल है। उन्हें 2005 में जापान सोसायटी फॉर द प्रमोशन ऑफ साइंस (JSPS) ने विजिटिंग प्रोफेसरशिप से भी सम्मानित किया था। उन्होंने अब तक 40 से ज्यादा विद्यार्थियों और शोधार्थियों को गाइड किया है जिनमें 10 पीएच.डी. स्कॉलर्स शामिल हैं और उनके 150 से अधिक शोध लेख, किताबें और रिपोर्ट्स राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हुए हैं।

यह सम्मान एक बार फिर साबित करता है कि आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के पूर्व छात्र वैश्विक स्तर पर विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे हैं।

NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

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