बिहार-बंगाल के चुनाव में बीजेपी का ‘ओबीसी कार्ड’! 2 सबसे अनुभवी नेताओं को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी…

बिहार-बंगाल के चुनाव में बीजेपी का ‘ओबीसी कार्ड’! 2 सबसे अनुभवी नेताओं को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी…

बिहार(BIHAR):भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को आगामी बिहार और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी ने अहम जिम्मेदारियों का बंटवारा कर दिया है. पार्टी ने दो बड़े अनुभवी चेहरों, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बिहार और भूपेंद्र यादव को पश्चिम बंगाल का चुनावी का प्रभारी नियुक्त किया है. बिहार विधानसभा चुनाव नवंबर में होने की उम्मीद है. दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में मार्च-अप्रैल में चुनाव प्रस्तावित हैं. भाजपा ने अपने एक बयान में कहा कि पार्टी की गुजरात इकाई के प्रमुख केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य बिहार चुनाव के लिए सह-प्रभारी हैं.

बिहार, बंगाल और तमिलनाडु चुनाव के लिए प्रभारी
प्रधान और यादव दोनों अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से आते हैं और वह भाजपा के सबसे अनुभवी चुनाव प्रबंधकों में से एक हैं. मौर्य भी ओबीसी जाति से आते हैं, जबकि देब बंगाली हैं, जो संबंधित राज्यों में पार्टी के लिए मददगार हो सकते हैं. बिहार चुनाव को लेकर प्रधान की औपचारिक नियुक्ति चुनाव के बहुत करीब होने पर की गई है. इसके अलावा भी वे कई राज्य चुनाव के मामलों से जुड़े रहे हैं. प्रधान हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक विधानसभा चुनावों के भी प्रभारी रह चुके हैं. वह साल 2010 के बिहार चुनावों में पार्टी के सह-प्रभारी थे, जब भाजपा-जदायू गठबंधन ने अपनी सबसे बड़ी जीत हासिल की थी.

तीनों नेता पहले भी रहे चुनाव प्रभारी
जबकि यादव ने 2024 में हुए महाराष्ट्र चुनावों के लिए इसी तरह का रोल निभाया था, भाजपा ने दोनों राज्यों में ही जीत हासिल की थी. इन्होंने अतीत में बिहार और गुजरात सहित अन्य राज्यों में चुनावों की जिम्मेदारी संभाली थी. पांडा इस साल के दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के चुनाव प्रभारी थे, जब भाजपा 25 सालों से ज्यादा से समय के बाद केंद्र शासित प्रदेश में सत्ता में लौटी है.

बंगाल में ममता के गढ़ पर नजर
भाजपा जहां बिहार में अपने मुख्य सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) के साथ सत्ता बरकरार रखने पर नजर गड़ाए हुए है. वहीं उसे पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने की उम्मीद है, जहां वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए मुख्य चुनौती बनकर उभरी है, जो अगले चुनाव तक सत्ता में 15 साल पूरे करने जा रही हैं.

तमिलनाडु में भाजपा एक सहयोगी पार्टी की भूमिका में बनी हुई है, जो सत्तारूढ़ द्रमुक से मुकाबला करने के लिए अन्नाद्रमुक के नेतृत्व में एक मजबूत गठबंधन बनाने की कोशिश कर रही है. अगले साल पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के साथ-साथ केरल, असम और पुडुचेरी में भी विधानसभा चुनाव होने है.

NEWSANP के लिए बिहार से ब्यूरो रिपोर्ट

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