TRADE BUSINESS:भारत को अमेरिका व चीन जैसे मजबूत अर्थव्यवस्था से मुकाबला करने और आत्मनिर्भर बनने का एक मात्र विकल्प है…”स्वदेशी उद्योग और निर्यात” पढ़िए NEWS ANP विशेष…

TRADE BUSINESS:भारत को अमेरिका व चीन जैसे मजबूत अर्थव्यवस्था से मुकाबला करने और आत्मनिर्भर बनने का एक मात्र विकल्प है…”स्वदेशी उद्योग और निर्यात” पढ़िए NEWS ANP विशेष…

नई दिल्ली (NEW DELHI): 24 सितंबर 25,भारत को पिछले लगभग पचास सालों से लगातार व्यापार घाटे का सामना करना पड़ रहा है। इसका मतलब है कि भारत ने जितना सामान विदेशों में बेचा (निर्यात), उससे कहीं ज़्यादा सामान खरीदा (आयात)। आखिरी बार भारत ने 1976-77 में पूरे साल के लिए व्यापार में फायदा (सरप्लस) कमाया था। उसके बाद से यह सिलसिला लगातार जारी है।
इस घाटे में सबसे बड़ा योगदान चीन का है, जिसके बाद रूस, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया जैसे देश आते हैं। भारत की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि वह अपनी ज़रूरत की चीज़ें भी खुद नहीं बना पाता और उन्हें बाहर से मँगाता है, जिससे देश में उद्योग-धंधे विकसित नहीं हो पा रहे हैं।

पेट्रोल ही नहीं, दूसरी चीज़ें भी हैं वजह
अक्सर सरकारें इस घाटे की वजह पेट्रोल के आयात को बताती हैं। यह सच है कि भारत अपनी ज़रूरत का 85-90% कच्चा तेल बाहर से मँगाता है। लेकिन यह पूरी सच्चाई नहीं है। अगर हम पेट्रोल को हटा दें, तो भी भारत का व्यापार घाटा बहुत ज़्यादा है।
असल में, असली समस्या इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल, प्लास्टिक, खाद और यहाँ तक कि छोटे-मोटे घरेलू सामान जैसे कॉटन स्वैब और किचन के बर्तनों के आयात में भारी बढ़ोतरी है। ये ऐसी चीज़ें हैं जिन्हें भारत आसानी से अपने देश में बना सकता है, लेकिन फिर भी हम इन्हें बड़ी मात्रा में बाहर से मँगा रहे हैं।

बिगड़ते आँकड़े और कमजोर होती अर्थव्यवस्था
2024-25 में भारत का आयात बढ़कर $720.24 बिलियन हो गया, जबकि निर्यात घटकर $437.42 बिलियन रहा। इससे व्यापार घाटा बढ़कर $282.83 बिलियन हो गया, जो अब तक का सबसे ज़्यादा है। हालाँकि, अगस्त 2025 में निर्यात में 6.7% की बढ़ोतरी हुई, जबकि आयात में 10% की कमी आई, जिससे घाटा कुछ कम हुआ। लेकिन यह सुधार अभी नियमित नहीं है।
यह सब दिखाता है कि भारत की औद्योगिक नींव बहुत कमज़ोर है। भारत में ज़्यादातर सामानों को केवल जोड़ा जाता है (असेंबलिंग), उनके मुख्य हिस्से जैसे सेमीकंडक्टर, डिस्प्ले और माइक्रोचिप अभी भी बाहर से आते हैं। यही स्थिति केमिकल्स, दवाइयों और मशीनों के मामले में भी है।

दूसरे देशों से मुक़ाबला
चीन की बात करें तो, 1950 के दशक में उसकी अर्थव्यवस्था भारत से भी छोटी थी। लेकिन उसने तेज़ी से अपनी नीतियों में बदलाव किया। चीन ने बड़े पैमाने पर फैक्ट्रियाँ बनाईं, रोज़गार पैदा किए और लगातार निर्यात पर ज़ोर दिया। आज वह दुनिया की सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरिंग पावर बन गया है, जो हर साल रिकॉर्ड-तोड़ मुनाफा कमाता है। 2024 में चीन ने $992.2 बिलियन का रिकॉर्ड सरप्लस दर्ज किया।
भारत के बाज़ारों में खिलौनों से लेकर बिजली के उपकरणों तक, हर जगह चीन का सामान भरा हुआ है। यहाँ तक कि भारतीय कंपनियाँ भी चीन से कच्चा माल मँगाकर ही मुक़ाबला कर पाती हैं।
भारत कहाँ खड़ा है?

आज भारत का दुनिया के कुल निर्यात में हिस्सा सिर्फ 1.8% है और वह 17वें नंबर पर है, जबकि चीन का हिस्सा 14% से ज़्यादा है। यहाँ तक कि वियतनाम और मलेशिया जैसे छोटे देश भी कुछ मामलों में भारत से आगे निकल गए हैं। वियतनाम, जो कभी युद्ध से तबाह हो गया था, आज इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़ों का एक बड़ा निर्यातक बन गया है। 2023 में उसका निर्यात $350 बिलियन से ज़्यादा था, जो भारत के बराबर है, जबकि उसकी आबादी भारत से 15 गुना कम है।
आगे क्या?
इस व्यापार घाटे के जाल से निकलने के लिए भारत को कुछ कड़े कदम उठाने होंगे:

  • कम ज़रूरी सामानों का आयात कम करें: ऐसे सामानों पर टैरिफ़ लगाएँ और देश में ही उनके विकल्प तैयार करें।
  • हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग पर ध्यान दें: इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और नई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाएँ।
  • निर्यात का आधार बढ़ाएँ: अमेरिका और यूरोपीय देशों पर अपनी निर्भरता कम करें और नए बाज़ारों की तलाश करें।
  • उद्योगों को बढ़ावा दें: लागत कम करने के लिए बिजली और लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था सुधारें और सरकारी नियमों को आसान बनाएँ।
    समाधान सिर्फ़ निर्यात में है
    यह समझना ज़रूरी है कि विदेश में काम करने वाले भारतीयों द्वारा भेजे गए पैसे (रेमिटेंस) और आईटी सेवाओं से मिली कमाई, मजबूत माल निर्यात का विकल्प नहीं हो सकती। व्यापार घाटे का मतलब है कि देश में नौकरियाँ कम हो रही हैं, उद्योग बंद हो रहे हैं और हमारी अर्थव्यवस्था कमज़ोर हो रही है।
    अगर भारत को इस समस्या से बाहर निकलना है, तो उसे सिर्फ़ नारे लगाने से काम नहीं चलेगा। इसे उद्योगों को बढ़ावा देने और निर्यात को बढ़ाने के लिए ठोस और निर्णायक कदम उठाने होंगे। नहीं तो, यह व्यापार घाटा हर साल बढ़ता रहेगा और भारत को एक आयातक देश ही बने रहने पर मजबूर कर देगा।

NEWS ANP के लिए नई दिल्ली से ब्यूरो रिपोर्ट…

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *