बिहार(BIHAR):बिहार में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है! चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा से पहले, राजनीतिक दल पूरी ताकत से मैदान में उतर चुके हैं। इसी कड़ी में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को बिहार के पूर्णिया पहुंचे। यहां उन्होंने एक नहीं, बल्कि दो बड़े ‘मास्टरस्ट्रोक’ चले। पीएम मोदी ने नए सिविल एन्क्लेव के अस्थायी टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया, जिससे पूर्णिया बिहार का चौथा कमर्शियल एयरपोर्ट बन गया। इसके साथ ही, उन्होंने 36,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। क्या यह ‘विकास’ का दांव सीमांचल क्षेत्र में बीजेपी की चुनावी ‘लॉटरी’ लगा पाएगा?
बिहार को मिला चौथा ‘उड़ान’ का ठिकाना
पूर्णिया में नया एयरपोर्ट खुलने से सीमांचल क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। अब तक, हवाई यात्रा के लिए उन्हें पटना, गया या दरभंगा जाना पड़ता था। अब पूर्णिया के साथ-साथ अररिया, कटिहार, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा और सुपौल के लोगों को भी सीधा फायदा मिलेगा। यह नया एयरपोर्ट न सिर्फ हवाई यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि इलाके के विकास और इंटरकनेक्टिविटी में भी मदद करेगा। फिलहाल, यहां से कोलकाता और अहमदाबाद के लिए सीधी उड़ानें मिलेंगी। इंडिगो एयरलाइन की कोलकाता के लिए उड़ानें हफ्ते में तीन दिन होंगी। पूर्णिया एयरपोर्ट परिसर में आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। इसमें टर्मिनल बिल्डिंग, एप्रोन, कार्गो कॉम्प्लेक्स, एसटीपी, वॉटर एंड फायर टैंक, इलेक्ट्रिक सब स्टेशन, एविएशन फ्यूल फार्म, एडमिन ऑफिस, कमर्शियल प्लाजा और स्टिल्ट पार्किंग जैसी सुविधाएं हैं।
‘36,000 करोड़’ का चुनावी दांव
पूर्णिया में शीशाबाड़ी एसएसबी ग्राउंड में आयोजित जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने 36,000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान उनके साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा और सिविल एविएशन मिनिस्टर राम मोहन नायडू भी मौजूद रहे। यह भारी-भरकम राशि बिहार के विकास को गति देने के लिए एक बड़ा संकेत है। चुनाव से पहले इतनी बड़ी राशि की परियोजनाओं का ऐलान, बीजेपी के ‘विकास के एजेंडे’ को मजबूती से पेश करता है।
चुनावी समीकरणों पर असर
पूर्णिया का यह दौरा न सिर्फ विकास से जुड़ा है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने भी हैं। सीमांचल क्षेत्र में मुस्लिम आबादी अधिक है और यह क्षेत्र आरजेडी का गढ़ माना जाता है। ऐसे में, बीजेपी इस क्षेत्र में विकास परियोजनाओं के जरिए जनता का विश्वास जीतने की कोशिश कर रही है। बीजेपी का मानना है कि विकास और बेहतर कनेक्टिविटी के वादे से वह जातीय समीकरणों को तोड़कर ‘नए वोटर’ बना सकती है। अब देखना यह होगा कि पीएम मोदी का यह ‘विकास का दांव’ आगामी चुनावों में बीजेपी को कितना फायदा पहुंचाता है।
NEWSANP के लिए बिहार से ब्यूरो रिपोर्ट

