जामताड़ा(JAMTADA):जिला मुख्यालय के पास दक्षिणबहाल की जोड़िया में यात्री सहित वैगेनार बह गया। जिसमें एक व्यक्ति लापता है। जिसने जिला प्रशासन की नाकामी और भ्रष्टाचार की गवाही को मौत के पत्थर पर अंकित कर दिया। जिस पुल पर लाखों लोगों की ज़िंदगी और रोज़मर्रा टिका था, वह बरसात के थपेड़ों में क्षतिग्रस्त हो चुका था। देवघर-दुमका-पश्चिम बंगाल-बिहार को जोड़ने वाला यह मार्ग महीनों से बंद पड़ा था। जनता, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, चिकित्सक, छात्र और किसान बार-बार प्रशासन से गुहार लगाते रहे कि वैकल्पिक सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराया जाए, लेकिन भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता में डूबे अफसर के कानों पर जूं तक नहीं रेंगा।
मौत का रास्ता बना डायवर्सन
आज उसी लापरवाही का नतीजा सामने आया। ग्रामीणों द्वारा बनाया गया अस्थायी डायवर्सन तेज़ पानी के बहाव में बह गया। इसी दौरान एक वेगनर कार उसमें फंसकर बह गई। कार में पाँच लोग सवार थे। चार लोगों ने किसी तरह तैरकर अपनी जान बचा ली। लेकिन एक व्यक्ति बहाव में समा गया। सभी सवार परिवहन कार्यालय, जामताड़ा से जुड़े बताए जा रहे हैं। लापता व्यक्ति की तलाश पुलिस और ग्रामीण कर रही है।
करोड़ों के फंड के बावजूद लापरवाही
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन ने इस गंभीर संकट के समाधान के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया?
- आपदा और आपातकालीन स्थिति के लिए राज्य और केंद्र सरकार की ओर से जिला प्रशासन के पास करोड़ों रुपये का फंड हर वक्त उपलब्ध रहता है।
- यही फंड ऐसे मौके पर जनता की सुरक्षा, पुल की मरम्मत और वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग के निर्माण में खर्च होना चाहिए था।
- लेकिन अफसरशाही ने उस फंड को दबाकर रखा और हजारों लोगों को मौत के रास्ते पर भगवान भरोसे छोड़ दिया।
जनता का गुस्सा – “यह हादसा नहीं, हत्या है”
इस त्रासदी ने सभी को हिलाकर रख दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की यह लापरवाही किसी हादसे से कम नहीं, बल्कि ‘प्रशासनिक हत्या’ है।
- लोगों ने मृतक के लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों और पदाधिकारियों के वेतन से पाँच करोड़ रुपये मुआवज़ा देने की मांग की है।
- उनका कहना है कि जब जनता टैक्स देती है और अफसर मोटा वेतन पाते हैं। तो उनकी जिम्मेदारी भी बनती है कि जनता की जान की रक्षा करें।
- असुरक्षित डायवर्सन की अनुमति देकर और वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग उपलब्ध न कराकर प्रशासन ने सीधे तौर पर एक को मौत के हवाले कर दिया।
जवाबदेही से प्रशासन बच नहीं सकता
यह मामला केवल एक हादसा नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
- क्या जिला प्रशासन की संवेदनशीलता सिर्फ कागज़ी बैठकों और प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित है?
- क्यों जनता की बार-बार की चेतावनी और गुहार को नज़रअंदाज़ किया गया?
- जब करोड़ों रुपये उपलब्ध थे, तो पुल और मार्ग की मरम्मत के लिए तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
चेतावनी
जामताड़ा की जनता गुस्से और आक्रोश में है। दक्षिणबहाल की जोड़िया केवल एक नदी नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बन चुकी है। जिस मौत से आज एक परिवार उजडझा। उसकी जिम्मेदारी से जिला प्रशासन किसी भी सूरत में पल्ला नहीं झाड़ सकती।
जनता की मांग साफ है – दोषी अफसरों पर कार्रवाई हो, मृतक के परिवार को पाँच करोड़ का मुआवज़ा मिले और पुल की मरम्मत तत्काल शुरू की जाए। वरना यह मामला आने वाले दिनों में बड़े जनांदोलन का रूप ले सकता है।
NEWSANP के लिए जामताड़ा से आर पीआइ सिंह की रिपोर्ट

