अभियोजन ने कोर्ट में शशि सिंह को बताया सुरेश सिंह का हत्यारा…

अभियोजन ने कोर्ट में शशि सिंह को बताया सुरेश सिंह का हत्यारा…

धनबाद(DHANBAD): धनबाद के सबसे चर्चित हत्याकांड में बहस के दौरान अभियोजन पक्ष ने जिले के दूसरे चर्चित हत्याकांड का हवाला देते हुए सनसनीखेज आरोप लगाया है। अभियोजन ने 13 अगस्त को हुई बहस में सीधे तौर पर कहा था कि संजीव सिंह का चचेरा भाई शशि सिंह जब सिंह मेंशन में रहता था, तब उसने धनबाद के जाने-माने व्यवसायी और कांग्रेस नेता सुरेश सिंह की हत्या की थी। एमपी-एमएलए के विशेष न्यायाधीश दुर्गेशचंद्र अवस्थी ने अपने फैसले में इसका जिक्र किया है। जजमेंट में उल्लेखित अभियोजन की बहस में झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह को दोषी सिद्ध करने के लिए अभियोजन ने जो दलील पेश की है, उसमें सिंह मेंशन को कुख्यात बताया गया है।

कांड के सूचक अभिषेक सिंह के आरोपों को पुख्ता करने के लिए कोर्ट में दाखिल लिखित बहस में एपीपी सत्येंद्र राय ने कहा है कि जिस सिंह मेंशन में संजीव सिंह रहते हैं, वह कई हत्याओं के लिए कुख्यात रहा है। सिंह मेंशन के खिलाफ आवाज उठाने का दुस्साहस कोई नहीं कर सकता था। मेंशन धनबाद और धनबाद जिले के बाहर अनगिनत हत्याओं के लिए बदनाम रहा है। — शशि सिंह को ढाल बना संजीव को दोषी बताने का प्रयास अभियोजन ने सिंह मेंशन के अतीत (अप्रमाणित) और बलिया के पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष रामधीर सिंह के पुत्र शशि सिंह को ढाल बना कर झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह को दोषी साबित करने का जो प्रयास किया, उसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। सात दिसंबर 2011 को धनबाद क्लब में कोयला कारोबारी सुरेश सिंह की हत्या हुई थी। सुरेश सिंह की हत्या के बाद से ही शशि सिंह फरार है। हत्या में शशि सिंह को शूटर बताया गया था। हालांकि अभी सुरेश सिंह हत्याकांड की सुनवाई कोर्ट में चल रही है। कानून के जानकारों के बीच इस बात की चर्चा जोरों पर है कि कोर्ट में फैसला आने से पहले अभियोजन ने शशि सिंह को सुरेश सिंह का हत्यारा मानते हुए इस तथ्य को बहस में शामिल किया। — 2008 से पहले रघुकुल के लोग भी रहते थे सिंह मेंशन में कोर्ट में अभियोजन ने जिस सिंह मेंशन को कुख्यात और बदनाम बताया है। दरअसल वर्ष 2008 से पहले उसी सिंह मेंशन में रघुकुल के सदस्य भी रहते थे। नीरज हत्याकांड में गवाही के जिरह के दौरान कांड के सूचक व नीरज सिंह के अनुज अभिषेक सिंह ने खुद इसका खुलासा किया है। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि वर्ष 2010 तक उनका मेंशन में आना-जाना था। पिता राजन सिंह की तबीयत बिगड़ने के बाद उनका मेंशन आना-जाना खत्म हो गया। — मोबाइल धारकों को गवाह नहीं बनाने के कारण तकनीकी साक्ष्य फेल पुलिस ने नीरज मर्डर केस में कथित चारों शूटर, शूटरों को धनबाद बुलाने का आरोपी पंकज सिंह, शूटरों को कुसुम विहार में ठहराने का आरोपी डबलू मिश्रा और डबलू मिश्रा के दोस्त विनोद सिंह, कांड का संदेही संतोष कुमार (असत्यापित आरोपी) के जिन मोबाइल नंबरों का सीडीआर चार्जशीट में शामिल किया था, दरअसल वे सभी मोबाइल नंबर किसी और के नाम के थे। कोर्ट ने जजमेंट में सवाल उठाया कि पुलिस ने इन नंबरों के सीडीआर के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध साक्ष्य जुटाने का दावा तो किया, लेकिन इन नंबरों के धारकों को कोर्ट में गवाह के तौर पर पेश नहीं किया, जिससे यह साबित हो सके कि असल में इन नंबरों का इस्तेमाल वे आरोपी ही कर रहे थे। आरोपियों के पास से इन मोबाइल नंबरों को जब्त करने के संबंध में जब्ती सूची का साक्षी भी किसी को नहीं बनाया गया।

NEWSANP के लिए धनबाद से ब्यूरो रिपोर्ट

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