धनबाद : नीरज सिंह हत्याकांड में नया मोड़ : आदित्य राज वारदात के समय गिरिडीह में था, पुलिस की जांच पर उठे सवाल…

धनबाद : नीरज सिंह हत्याकांड में नया मोड़ : आदित्य राज वारदात के समय गिरिडीह में था, पुलिस की जांच पर उठे सवाल…

धनबाद(DHANBAD): झारखंड के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक नीरज सिंह हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया ने एक चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। विशेष अदालत में पेश सबूतों और मोबाइल लोकेशन डेटा के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि जिस आदित्य राज को पुलिस ने इस मामले में मुख्य चश्मदीद बताया था, वह दरअसल घटना के वक्त घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं था। अदालत ने इस तथ्य को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि आदित्य राज के विरुद्ध चश्मदीद गवाह के रूप में दर्ज किया गया पुलिस का दावा अविश्वसनीय और भ्रामक है।

दरअसल, अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार, 27 मार्च 2017 की सुबह 5 बजे आदित्य राज गिरिडीह के एक निजी अस्पताल में मरीज को भर्ती कराने पहुंचे थे। वहां के प्रवेश रजिस्टर में उनका नाम दर्ज है और चिकित्सीय दस्तावेजों से यह पुष्टि होती है कि वह करीब 7:45 बजे तक अस्पताल में मौजूद थे। इसके अलावा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और मोबाइल लोकेशन भी यही दर्शाते हैं कि वह उस समय गिरिडीह में ही थे, जबकि हत्या की वारदात धनबाद में करीब 8:30 बजे हुई थी।

विशेष अदालत के इस फैसले ने न केवल पुलिस जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी उजागर किया है कि कैसे बिना पुख्ता सबूतों के, किसी निर्दोष को चश्मदीद या आरोपी बनाया जा सकता है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि आदित्य राज की गिरिडीह में मौजूदगी के प्रमाण इतने मजबूत थे कि उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह स्पष्ट है कि पुलिस ने या तो जानबूझकर तथ्यों की अनदेखी की, या फिर जांच में भारी चूक की है।

इस घटनाक्रम के बाद आरोपी पक्ष के वकीलों और परिजनों ने जोरदार तरीके से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष दोबारा जांच हो, ताकि जिन लोगों को बिना पर्याप्त सबूतों के फंसाया गया है, उन्हें न्याय मिल सके। इस मामले में पूर्व विधायक संजीव सिंह सहित कुल 10 आरोपी पहले ही सबूतों के अभाव में अदालत से बरी हो चुके हैं, और अब यह नया तथ्य जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है।

नीरज सिंह, जो धनबाद नगर निगम के डिप्टी मेयर और कांग्रेस के युवा नेता थे, उनकी दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिससे पूरे राज्य में सनसनी फैल गई थी। यह मामला झारखंड की राजनीति, अपराध और पुलिस तंत्र के बीच गहरे संबंधों की जटिलता को दर्शाता है।

अब जब अदालत ने इस मामले में आदित्य राज को प्रत्यक्षदर्शी मानने से इनकार किया है, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस इस पर कैसा जवाब देती है, और क्या आगे की जांच में दोषियों को सही रूप से चिन्हित किया जा सकेगा।

NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

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