RIMS Controversy: मंत्री के समर्थन में उतरा स्वास्थ्य विभाग, रिम्स निदेशक पर लगाए गंभीर आरोप…

RIMS Controversy: मंत्री के समर्थन में उतरा स्वास्थ्य विभाग, रिम्स निदेशक पर लगाए गंभीर आरोप…

रांची(RANCHI):राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की बदहाली को लेकर एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ा जा रहा है। रिम्स निदेशक डॉ राजकुमार द्वारा झारखंड उच्च न्यायालय में रखे अपने पक्ष में मशीन-उपकरण खरीदने के लिए स्वास्थ्य मंत्री की अनुमति लेने को अनिवार्य किए जाने के आरोप लगाए जाने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग अपने मंत्री के समर्थन में उतर आया है।

विभाग ने कहा है कि रिम्स निदेशक शासी परिषद में विषय को लाने की बजाए जानबूझकर और नियम विरुद्ध फाइलें स्वयं मंत्री को भेज रहे हैं। बिना किसी अधिकारी के नाम के विभाग की ओर से जारी आरोप में कहा गया कि रिम्स निदेशक नियमों की अनदेखी कर मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं।

वे वित्तीय मामलों से जुड़ी फाइलें जानबूझकर सीधे मंत्री के पास भेजते हैं, जबकि नियमानुसार उन्हें शासी परिषद की बैठक में रखना चाहिए, ताकि उन पर चर्चा हो सके।

चर्चा होने से पारदर्शिता आएगी, लेकिन निदेशक को ऐसे मामलों पर जवाब भी देना होगा और वे जवाब देने से बचना चाहते हैं। इसलिए वे गोपनीय तरीके से ऐसी फाइलों को निपटाना चाहते हैं ताकि वे जवाबदेही से बच सकें।

रिम्स के पास प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि रिम्स के स्वायत्त संस्थान होने के कारण तमाम प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार शासी परिषद के पास हैं।

बताते चलें कि हाईकोर्ट में डॉ राजकुमार ने अपनी सफाई में स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के एक पीत पत्र का हवाला देते हुए कहा है कि उसमें कहा गया है कि निदेशक सिर्फ दैनिक कार्य और रोजाना इस्तेमाल होने वाली दवा सहित अन्य सामान ही खरीद सकते हैं।

जांच मशीन, भारी मशीन आदि बड़े सामान की खरीद करनी हो तो उन्हें मंत्री से अनुमित लेनी होगी। बिना अनुमति के कोई सामान नहीं खरीदा जाएगा।

शासी परिषद की बैठक नहीं बुलाने का आरोप
स्वास्थ्य विभाग ने रिम्स निदेशक पर शासी परिषद की बैठक नहीं बुलाने का भी आरोप लगाया है। कहा गया कि रिम्स अधिनियम, 2002 की धारा 13(3) और रिम्स विनियम, 2014 के विनियम चार के अनुसार, निदेशक सह सदस्य सचिव का कर्त्तव्य है कि वे शासी परिषद की बैठकें आयोजित करें।

लेकिन डॉ राजकुमार के कार्यकाल में अब तक केवल दो बैठकें ही हुई हैं, जिनमें से एक बैठक विभाग के हस्तक्षेप के बाद आयोजित की गई।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि शासी परिषद की बैठक बुलाने का कोई प्रस्ताव विभाग में लंबित नहीं है और न ही कभी बैठक के प्रस्ताव को अस्वीकृत किया गया है। निदेशक ने न तो त्रैमासिक बैठकें आयोजित कीं और न ही इस दिशा में कोई पहल की।

बजट की राशि खर्च करने में विफल रहे हैं निदेशक
विभाग ने यह भी आरोप लगाया कि रिम्स निदेशक स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवंटित बजट की राशि को खर्च करने में विफल रहे हैं। यहां तक कि बजटीय प्रविधान और वास्तविक खर्च का कोई मिलान नहीं किया गया, जिससे रिम्स में लगातार वित्तीय अनियमितताएं हो रहीं हैं।

निदेशक ने कभी भी वित्त एवं लेखा समिति की बैठक भी नहीं बुलाई ताकि वे पारदर्शिता से बच सकें और अपनी मनमानी जारी रख सकें।

NEWSANP के लिए रांची से ब्यूरो रिपोर्ट

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