नई दिल्ली(NEW DELHI):चीनी विदेश मंत्री वांग यी दो दिन के भारत दौरे पर आ रहे हैं। 18-19 अगस्त तक चलने वाले इस दौरे में वांग यी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से स्पेशल रिप्रेंजेंटेटिव फॉर्मेट के 24वें चरण में शामिल होने के लिए भारत आ रहे हैं। इस दौरान वो विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मुलाकात करेंगे। ये मुलाकात ऐसे मौके पर हो रही है, जब प्रधानमंत्री एससीओ समिट के लिए इस महीने के आखिर में चीन में होंगे। पीएम का चीन दौरा बीते सात सालों में पहली बार हो रहा है। इस दौरे की तस्वीरें सामने आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हैरान होना तय है।
विशेष प्रतिनिधियों के फॉर्मेट वाली ये बैठक बीते अक्टूबर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम मोदी की कजान में द्विपक्षीय मुलाकात के बाद फिर से बहाल हुई है। गलवान संघर्ष के बाद बैठकों के इस फॉर्मेट पर विराम लग गया था। कजान की बैठक में इसकी बहाली पर फिर से सहमति बनी, जिसके बाद बीती 18 दिसंबर को विशेष प्रतिनिधियों की 23वें दौर की बैठक बीजिंग में हुई। दिसंबर में डोवाल और वांग यी के बीच हुई इस बैठक से पहले साल 2019 के दिसंबर में ही इस फॉर्मेट की मुलाकात हुई थी। बता दें कि गलवान संघर्ष के बाद चीनी विदेश मंत्री की ये पहली भारत यात्रा है।
क्या डिएस्क्लेशन पर होगी बात?
जुलाई महीने में विदेश मंत्री एस जयशंकर चीन के दौरे पर गए थे। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। जयशंकर तियानजिन में एससीओ के विदेश मंत्रियों की समिट में हिस्सा लेने के लिए गए थे। इस दौरान उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात भी की थी। इस बातचीत में उन्होंने कहा था कि अब वक्त है कि दोनों देश सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ते हुए रिश्तों के अगले पायदान पर कदम बढ़ाए जिसमें डि-एस्क्लेशन शामिल है। बता दें कि कजान में बनी सहमति के बाद दोनों देशों ने ईस्टर्न लद्दाख में डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया को पूरा किया था।
विवाद से इतर आगे बढ़े हैं दोनों देश
कजान समिट के बाद से ही दोनों देश लगातार संबंधों के सामान्यीकरण को लेकर कदम उठाते आ रहे हैं। इसी कड़ी के मद्देनजर पहले कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली हुई। इसके बाद बाद भारत ने चीन के लिए टूरिस्ट वीजा की बहाली की। इसके साथ ही भारत और चीन के बीच डायरेक्ट फ्लाइट्स की बहाली को लेकर भी बात चल रही है। भारत सरकार ये कई बार कह चुकी है कि चीन के साथ संबंध सकारात्मक दिशा में हैं।
अब पड़ोसी देशों तक आउटरीच
विदेश सचिव विक्रम मिस्री 17-18 अगस्त को नेपाल के दौरे पर होंगे। भारत के बयान के मुताबिक, नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय के न्योते पर मिस्री नेपाल दौरे पर होंगे। विदेश सचिव की यात्रा पड़ोसी देशों के लिए भारत की नेबरहुड फर्स्ट की नीति की ही एक कड़ी है। यात्रा को लेकर नेपाल का बयान कहता है कि इस यात्रा में दोनों विदेश सचिव दोनों देशों की साझेदारी के कई मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इनमें कनेक्टिविटी, विकास सहयोग और साझा महत्व के दूसरे मुद्दे शामिल हैं। दरअसल ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत भारत ने डिप्लोमैटिक आउटरीच की रणनीति अख्तियार की थी, लेकिन उसमें पड़ोसी देश रह गए थे। भारतीय विदेश नीति अब पड़ोसी देशी पर तवज्जो देने की है।
NEWSANP के लिए नई दिल्ली से ब्यूरो रिपोर्ट

