धनबाद(DHANBAD): पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह समेत चार लोगों की हत्या के मामले में 8 साल बाद बुधवार को सुनवाई पूरी हो गई। एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष जज डीसी अवस्थी की अदालत में फैसले की तारीख 27 अगस्त तय की। अदालत ने उस दिन झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह समेत सभी आरोपियों को पेश करने का निर्देश दिया है, जो आरोपी जमानत पर जेल से बाहर हैं, उन्हें भी फैसले के समय अदालत में हाजिर होने का निर्देश दिया गया।
अभियोजन पक्ष ने अपनी बहस के आखिरी दिन चश्मदीद गवाह आदित्य राज के मौका-ए-वारदात पर मौजूदगी के तर्क दिए। कहा कि आदित्य व एकलव्य सिंह अखबार में प्रकाशित एक तस्वीर में नीरज सिंह को गाड़ी से निकालते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। उन्होंने वारदात की सूचना इस केस के वादी अभिषेक सिंह को मोबाइल फोन से दी थी। वे अस्पताल में इलाजरत थे। गवाहों ने भी उनकी मौजूदगी की पुष्टि की है। वहीं, बचाव पक्ष ने दस्तावेजों के हवाले से कहा कि वारदात के समय आदित्य वहां मौजूद नहीं था। गौरतलब है कि 21 मार्च 2017 को सरायढेला के स्टील गेट में ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर नीरज समेत चार लोगों की हत्या कर दी गई थी।
अभियोजन पक्ष बोला – कैमूर में साजिश, शूटरों ने की हत्या
अभियोजन पक्ष ने पुलिस की चार्जशीट को सत्य बताते हुए कहा कि पूरी कहानी अदालत में प्रमाणित हो चुकी है। कहा कि नीरज सिंह की हत्या की साजिश 11 फरवरी 2017 को बिहार के कैमूर में रंजय सिंह के श्राद्ध कर्म के दिन बनाई गई थी। उस दिन संजीव सिंह, संजय सिंह, डबलू मिश्रा, संजय सिंह, संतोष सिंह वहां मौजूद थे। 21 मार्च 2017 की सुबह रिंकू सिंह के कहने पर अमन सिंह धनबाद आया। शूटरों ने कुसुम बिहार में किराए का मकान लिया और वारदात को अंजाम दिया। आदित्य ने फायरिंग करनेवालों की पहचान की है और गवाहों ने संजीव को मौका-ए-वारदात से बाइक से सिंह मेंशन की ओर जाते देखा है। अभियोजन पक्ष ने सभी आरोपियों को कड़ी-से-कड़ी सजा देने की प्रार्थना अदालत से की।
बहस के आखिरी दिन चश्मदीद की मौजूदगी पर पक्ष-विपक्ष ने रखे अपने तर्क
बचाव का तर्क- सीडीआर में आदित्य का लोकेशन गिरिडीह
बचाव पक्ष ने दस्तावेजों के आधार पर अभियोजन के तक को झूठ बताया। आदित्य के बारे में कहा कि वारदात के समय उसका टावर लोकेशन एक सीडीआर में गिरिडीह बताया गया है। कैमूर में षड्यंत्र रचने के तर्क पर कहा कि सीडीआर में सिर्फ बिहार लिखा है। उसी आधार पर संजीव को कैमूर में बताया जा रहा है। उसी सीडीआर में 21 मार्च 2017 को भी संजीव का लोकेशन बिहार बताया गया है, तो क्या वे उस दिन धनबाद में नहीं थे। तब तो अभियोजन का सारा मुकदमा ही झूठा है।
वादी के निजी अधिवक्ता को नहीं मिली बहस की अनुमति
अदालत में बादी अभिषेक सिंह की ओर से मौजूद वरीय अधिवक्ता समर श्रीवास्तव को बहस की अनुमति नहीं मिली। बचाव पक्ष ने इस पर आपत्ति -जताते हुए कहा कि उन्हें अदालत ने पहले भी बहस करने से रोका था। हाईकोर्ट ने भी इस तरह बहस पर रोक लगा रखी है। आखिरकार अदालत ने भी कहा कि समर सिर्फ अभियोजन पक्ष का सहयोग कर सकते हैं।
एक और सीडीआर सौंपने पर बचाव पक्ष का कड़ा विरोध
अभियोजन पक्ष ने अदालत को दो पन्ने का एक सीडीआर सौंपा। उसके जरिए यह बताने की कोशिश की गई कि मौका-ए-वारदात पर पत्नी रागिनी सिंह के फोन के साथ संजीव सिंह मौजूद थे। बचाव पक्ष ने इस पर कड़ा विरोध जताया। कहा कि यह फर्जी दस्तावेज है। इस पर कार्रवाई हो। आखिर में अभियोजन पक्ष ने मान लिया कि गलती हो गई,
NEWS ANP के लिए धनबाद से ब्यूरो रिपोर्ट

