धनबाद(DHANBAD):मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अब रांची और धनबाद नगर निगम आवेदकों से मृतक और खुद के अलावा पांच पड़ोसियों का आधार कार्ड और शपथ पत्र मांग रहा है। इन शपथ पत्रों में पड़ोसियों को लिखित रूप से यह प्रमाणित करना पड़ता है कि वे मृतक को 25 वर्षों से जानते हैं। यदि दी गई जानकारी गलत पाई गई तो वे जिम्मेदार होंगे। नगर निगम चुनाव नहीं होने के कारण मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना आम लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। पहले वार्ड पार्षद के सत्यापन पर प्रमाण पत्र जारी हो जाता था।लेकिन चुनाव न होने से पार्षदों के पद रिक्त हैं। अब धनबाद नगर निगम आवेदकों से मृतक और खुद के अलावा पांच पड़ोसियों का आधार कार्ड और शपथ पत्र मांग रहा है।इन शपथ पत्रों में पड़ोसियों को लिखित रूप से यह प्रमाणित करना पड़ता है कि वे मृतक को 25 वर्षों से जानते हैं, उसकी मृत्यु घर पर हुई है और अंतिम संस्कार श्मशान घाट पर किया गया।साथ ही यदि दी गई जानकारी गलत पाई गई तो वे स्वयं जिम्मेदार होंगे। मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए नई प्रक्रिया लोगों के लिए भारी सिरदर्द बन गई है। पड़ोसियों से आधार और शपथ पत्र लेना आसान नहीं है। इसके अलावा श्मशान घाट या कब्रिस्तान से भी प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले की प्रक्रिया में केवल मृतक और आवेदक का आधार कार्ड, वार्ड पार्षद का सत्यापन और श्मशान घाट का प्रमाण पत्र ही पर्याप्त था।अब पार्षद के स्थान पर पड़ोसियों का प्रमाणन जरूरी कर दिया गया है। मृतक के खून के रिश्तेदारों का आधार कार्ड प्रमाण के रूप में मान्य नहीं कर रहा है। निगम का तर्क है कि इसमें फर्जीवाड़े की संभावना रहती है, इसलिए पड़ोसियों का प्रमाणन जरूरी है।
NEWSANP के लिए धनबाद से ब्यूरो रिपोर्ट

