नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर, विरोध की देशी व विदेशी राजनीति और अब डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ प्रहार…

नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर, विरोध की देशी व विदेशी राजनीति और अब डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ प्रहार…

जामताड़ा(JAMTADA):भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक जीवन संघर्ष, साधना और सेवा का ट्राएंगल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक प्रचारक के रूप में उन्होंने जीवन का आरंभ उस दौर में किया, जब राष्ट्र निर्माण का विचार ही जीवन की धुरी हुआ करता था। हिमालय की गुफाओं में बिताया उनका एकांत साधना काल में अध्यात्मिक विकास से आत्मबल का आधार।
गुजरात में मुख्यमंत्री बनने के बाद और फिर 2014 में देश की बागडोर संभालने के बाद, नरेंद्र मोदी ने स्वयं को एक दूरदर्शी, निर्णायक और जननायक नेता के रूप में स्थापित किया। लेकिन उनका यह उत्थान विरोधों की आँधियों के बीच हुआ—जो आज तक थमा नहीं है।

राजनीतिक विरोधियों की श्रृंखला
नरेंद्र मोदी का सबसे पहला संगठित विरोध 2002 के गुजरात दंगों के बाद शुरू हुआ। कांग्रेस, वामपंथी दल, तथाकथित सेक्युलर मीडिया और विदेशी मानवाधिकार समूहों ने उन्हें अल्पसंख्यक विरोधी नेता के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया।

विरोधी शक्तियाँ:

  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस: “चाय वाला”, “नीच राजनीति”, और “तानाशाह” जैसे शब्दों से मोदी को लगातार लक्ष्य बनाया।
  • वामपंथी विचारधारा: मोदी के राष्ट्रवाद, सैन्य सशक्तिकरण और “हिंदू गौरव” को फासीवाद की संज्ञा दी।
  • बुद्धिजीवी वर्ग: साहित्यिक मंचों, विश्वविद्यालय परिसरों और मीडिया संस्थानों में उनका चरित्र-हनन मुख्य एजेंडा बना।
  • विदेशी संगठनों व मानवाधिकार संस्थाएं: जो अक्सर मोदी सरकार की नीतियों को ‘लोकतंत्र विरोधी’ बताकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को नीचा दिखाने का प्रयास करती हैं।
    इसके बावजूद, मोदी ने 2014 और 2019 में भारी बहुमत से जीतकर सिद्ध कर दिया कि जनता का विश्वास इन विरोधियों से अधिक मजबूत है।

2025 का परिदृश्य: विरोध की राजनीति, मोदी की स्थिति
2025 में नरेंद्र मोदी अपने कार्यकाल के अंतिम वर्षों में हैं, लेकिन उनकी लोकप्रियता का ग्राफ अब भी ऊँचा है। “विकसित भारत @2047” की योजना, तकनीकी नवाचार, आधारभूत संरचना विकास, और वैश्विक स्तर पर भारत की सशक्त स्थिति उनके नेतृत्व की विशेषताएं बन चुकी हैं।
उनके विरोधी आज तीन श्रेणियों में बंटे हुए हैं:

  1. राजनीतिक – अब भी रणनीति विहीन, केवल “मोदी हटाओ” की तुक में फंसे हुए।
  2. वैचारिक – जिन्हें भारत की संस्कृति और परंपराओं की वैश्विक प्रतिष्ठा से ही समस्या है।
  3. अंतरराष्ट्रीय – जिनमें अब एक बड़ा नाम जुड़ चुका है: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।

डोनाल्ड ट्रंप का दोस्त से दुश्मनी तक का सफर
‘Howdy Modi‘: डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी की दोस्ती कभी अमेरिका-भारत संबंधों का सबसे उज्ज्वल पक्ष मानी जाती थी। 2019 में ‘Howdy Modi’ (ह्यूस्टन) और 2020 में ‘Namaste Trump’ (अहमदाबाद) जैसे कार्यक्रमों ने इस रिश्ते को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया था।
परंतु 2025 में ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद परिदृश्य पूरी तरह से बदल गया है।

अब ट्रंप क्या कर रहे हैं?

भारत पर टैरिफ का दबाव:** अमेरिकी कंपनियों को भारत में ‘अनुचित कराधान’ का हवाला देते हुए ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर भारी टैरिफ लगा दिए हैं, जिससे भारत की निर्यात अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।

  • H-1B नीति पर सख्ती: भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए अमेरिका का रास्ता और कठिन कर दिया गया है।
  • रक्षा सौदों में देरी: कई संयुक्त रक्षा परियोजनाओं पर निर्णय लंबित हैं या नकारात्मक दिशा में जा रहे हैं।

चीन-भारत संतुलन:

ट्रंप प्रशासन चीन के साथ आंशिक व्यापारिक तालमेल बनाने में लगा है, जिससे भारत की रणनीतिक स्थिति को सीधी चुनौती मिल रही है।

ट्रंप विरोध से नरेंद्र मोदी के वैश्विक नेतृत्व पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

1. वैश्विक मंच पर भारत की चुनौती बढ़ेगी:
‘America First’ is supported by the World Trade Organization (WTO), the Group of Twenty (G-20), and the Quadrature.

2. घरेलू राजनीति में मोदी को रणनीतिक लाभ:
भारत में ट्रंप विरोधी आर्थिक नीतियों को विदेशी हस्तक्षेप के रूप में प्रचारित कर मोदी विरोधियों को “बाहरी एजेंट” दिखाने की नई रणनीति बन सकती है।
3. मोदी का विकल्पहीन वर्चस्व और मज़बूत होता जाएगा:
जैसे-जैसे ट्रंप विरोधी कदम भारतीय उद्योग और युवाओं को प्रभावित करेंगे, मोदी सरकार ‘राष्ट्रीय हित’ की रक्षक के रूप में सामने आएगी।

आज मोदी विरोधी कौन कौन और कहाँ पर हैं?

  • कांग्रेस: भीतरी कलह और नेतृत्वहीनता से जूझ रही है।2014
  • आप, टीएमसी, सपा-राजद: क्षेत्रीय महत्व तक सिमटी ताकतें हैं।
  • बुद्धिजीवी वर्ग: अपने सीमित प्रभाव क्षेत्र में सीमित संवाद कर रहा है।
  • अंतरराष्ट्रीय विरोध: अब केवल नैरेटिव तक सीमित है, जमीनी प्रभाव नहीं।
    आज विरोधियों की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि वे स्वयं मोदी के राजनीतिक एजेंडे को अप्रत्यक्ष रूप से मजबूत करते हैं। उनका हर असंतुलन, हर अविश्वसनीय आलोचना नरेंद्र मोदी की छवि को और दृढ़ करती है।

नरेंद्र मोदी और विरोध की परिभाषा
नरेंद्र मोदी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार बन चुके हैं। विरोधियों की राजनीति अब इतनी बौनी हो चुकी है कि वह न तो नैतिक विकल्प प्रस्तुत कर पाती है, न ही ठोस समाधान।
डोनाल्ड ट्रंप का वर्तमान विरोध भारत और मोदी के लिए सामरिक चुनौती तो है, लेकिन यह चुनौती मोदी की राष्ट्रवादी और वैश्विक नेतृत्व की छवि को और अधिक धार देने वाली है।
अब नरेंद्र मोदी को न केवल घरेलू विपक्ष से, बल्कि एक विश्व महाशक्ति के राष्ट्रपति से विरोध का सामना करना पड़ रहा है — लेकिन यह टकराहट मोदी को भारतीय जनमानस में और अधिक सुदृढ़ बना सकती है, जैसा कि उनके अब तक के इतिहास ने बार-बार सिद्ध किया है।

NEWSANP के लिए जामताड़ा से आर पी सिंह की रिपोर्ट

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