धनबाद(DHANBAD): एंबुलेंस चालक और तकनीशियन हड़ताल पर हैं। अभी एंबुलेंस नहीं मिल सकती। 108 में कॉल करने के लिए धन्यवाद। नि:शुल्क एंबुलेंस के लिए 108 पर कॉल करनेवाले मरीज के परिजनों को कॉलर यही जवाब दे रहे हैं। कारण जिले के 108 एंबुलेंस चालकों ने वेतन वृद्धि समेत विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के कारण जिले में संचालित सभी 33 एंबुलेंस के पहिए एक साथ थम गए। इससे गंभीर मरीजों की जान पर बन आयी है। धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बलियापुर निवासी राजेश के पिता की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
सुबह डॉक्टरों ने उन्हें रिम्स रेफर कर दिया। 108 पर कॉल करने पर भी निशुल्क एंबुलेंस नहीं मिली। राजेश पहले अपने घर गए। वहां पैसों का इंतजाम किया। तब दोपहर में वापस आकर चार हजार रुपए में प्राइवेट एंबुलेंस से पिता को लेकर रांची गए। प्रखंडों से धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल और यहां से रिम्स जाने वाले लगभग सभी मरीजों को यही परेशानी झेलनी पड़ रही है। इधर हड़ताल पर बैठे चालकों और तकनीशियनों ने सदर अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया। उन्होंने राज्य में 108 एंबुलेंस का संचालन कर रही एजेंसी सहयोग फाउंडेशन पर वादाखिलाफी और कर्मचारियों के शोषण का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे जिला और राज्यस्तर के अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बाध्य होकर उन्हें हड़ताल के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, हड़ताल जारी रहेगी। 100 से अधिक मरीजों लेते हैं हर दिन लाभ 108 एंबुलेंस सेवा ठप होने से स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। हर दिन 100 से अधिक मरीज इस सेवा का लाभ लेते थे। इनमें 10-12 मरीज धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल से रिम्स रांची रेफर होते हैं। बाकी मरीज जिला के अंदर अस्पताल आते थे। इन्हें अब प्राइवेट एंबुलेंस, ऑटो-टोटो आदि का सहारा लेना पड़ रहा है। गर्भवतियों को अस्पताल पहुंचने में सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगाए आरोप – 12-12 घंटे ड्यूटी लेकर भी न्यूनतम वेतन नहीं दिया जाता। – मेंटेंनेंस के अभाव में कई गाड़ियां खड़ी हैं। इस दौरान कर्मचारियों को ड्यूटी नहीं दी जाती। – बेवजह कर्मचारियों को स्पष्टीकरण और निलंबित किया जा रहा है। – पैसे लेकर नए लोगों को बहाल किया जा रहा है और उन्हें तुरंत ड्यूटी दी जा रही है। – भ्रष्ट अधिकारियों को पुन: बहाल कर लिया गया है। – ज्वाइनिंग लेटर, ईपीएफ, ईएसआई, साप्ताहिक अवकाश एवं त्योहारों में छुट्टी नहीं दी जाती। मुख्य मांगें – कर्मचारियों की सेवा अवधि 60 साल निर्धारित की जाए। – बिचौलियों को हटाकर एनएचएम सीधे कर्मचारियों को भुगतान करे। – निलंबित कर्मचारियों की सेवा बहाल की जाए। – एजेंसी के भ्रष्ट अधिकारियों को हटाया जाए। – न्यूनतम वेतन, ईपीएफ, ईएसआई, बीमा आदि का लाभ दिया जाए। वैकल्पिक व्यवस्था की कोशिश : दसौंधी 108 एंबुलेंस सेवा के जिला प्रभारी संजय दसौंधी ने बताया कि हड़ताल पर गए कर्मचारियों से बात चल रही है। साथ ही एजेंसी वैकल्पिक व्यवस्था की कर रही। प्राइवेट एंबुलेंस, ममता वाहन आदि की मदद ली जाएगी ताकि मरीजों को कम से कम परेशानी झेलनी पड़े।

