हेलमेट नहीं तो पेट्रोल नहीं : जामताड़ा एसपी के ‘सड़क सुरक्षा महायज्ञ’ में पेट्रोल पंप संचालकों की आहूति, लेकिन डीसी अब तक ‘कनिष्ठ ब्रह्मचारी’ की तरह दूर खड़े…

हेलमेट नहीं तो पेट्रोल नहीं : जामताड़ा एसपी के ‘सड़क सुरक्षा महायज्ञ’ में पेट्रोल पंप संचालकों की आहूति, लेकिन डीसी अब तक ‘कनिष्ठ ब्रह्मचारी’ की तरह दूर खड़े…

जामताड़ा(JAMTADA): 28 जुलाई 2025
जिले के नवपदस्थापित पुलिस अधीक्षक राज कुमार मेहता ने जैसे ही योगदान दिया, वैसे ही हेलमेट-बिन-बाइकिंग के खिलाफ बिगुल बजा दिया। उन्होंने जिले में जन-जीवन की सुरक्षा के लिए ‘महायज्ञ’ का श्रीगणेश किया है — वो भी अकेले, बिना किसी औपचारिक तामझाम के, लेकिन बुलंद इरादों के साथ।

एसपी मेहता ने इस सड़क सुरक्षा अभियान को जन आंदोलन बनाने के लिए न केवल चौक-चौराहों पर सख्ती की, बल्कि अब इसकी अग्निशाला को और अधिक ताप देने का बीड़ा उठाया है। सोमवार को उन्होंने जिले भर के सभी पेट्रोल पंप संचालकों के साथ बैठक कर ‘हेलमेट नहीं तो पेट्रोल नहीं’ नीति पर मुहर लगवाई। यह किसी ‘शंखनाद’ से कम नहीं है।

बैठक में एसपी ने कहा —

“अगर हर पंप संचालक यह प्रण ले लें कि बिना हेलमेट वालों को ईंधन नहीं देंगे, तो लोगों की आदतों में बदलाव आना शुरू हो जाएगा। हम हर पहलू पर आपके साथ खड़े हैं।”

पेट्रोल पंप संचालकों ने भी इस अभियान को जनहित में यज्ञ की आहुति मानते हुए, पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। यह पहल अपने आप में अभिनव और अनुकरणीय मानी जा रही है।

परंतु यज्ञ में मुख्य आहुतिकर्ता गायब!

जहाँ एक तरफ एसपी ने ‘प्राण रक्षा’ के महायज्ञ का आरंभ कर दिया है, वहीं जिले के टर्मिनेटर माने जाने वाले डीसी (जिला उपायुक्त) अब तक इस यज्ञ मंडप से दूरी बनाए हुए हैं। यह वही डीसी हैं जो सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष हैं, पर एसपी के इस अभियान में अब तक एक मूक दर्शक की भूमिका में हैं।

लोग कह रहे हैं कि

“बिना डीसी की संजीवनी के यह यज्ञ अधूरा है।”

अगर डीसी अपनी भूमिका में सक्रिय होकर स्कूलों, कॉलेजों, और सरकारी संस्थानों के माध्यम से जन-जागरण का बिगुल फूंक दें, तो आधे से अधिक बाइकर्स स्वतः ही हेलमेट पहनने लगेंगे। लेकिन फिलहाल तो डीसी की चुप्पी इस जनहित अभियान की असफलता पर एक ‘तानाशाही मौन’ जैसी प्रतीत हो रही है।

हेलमेट-बिन-बाइकिंग : नींद में मौत को दावत

जिले में एक बड़ी समस्या स्कूली समय में नींद में डूबी बाइकिंग है। सुबह-सुबह अर्धनिंद्रा में बाइक चलाते अभिभावक, जो बिना हेलमेट के अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने निकलते हैं, पूरे ट्रैफिक सिस्टम के लिए चलती-फिरती दुर्घटना बन जाते हैं।

अगर डीसी सचमुच इस अभियान को समर्थन देना चाहते हैं, तो सभी स्कूलों के प्राचार्य और प्रबंधकों के माध्यम से ऐसे अभिभावकों को हेलमेट पहनने का स्पष्ट अल्टीमेटम दिलवाएं। आखिर स्कूल ही वह संस्था है, जहाँ बच्चे सुरक्षित भविष्य की उम्मीद के साथ पहुंचते हैं।

एक प्रेरक कथा : जब यज्ञ मैदान बना था कोयला साइडिंग

जिले की मिट्टी में यज्ञों की परंपरा और समर्पण की कहानियाँ रची-बसी हैं। वर्षों पूर्व, जब स्व. विष्णु प्रसाद भैया विधायक थे, तब उन्होंने कोयला साइडिंग में एक ‘सामाजिक यज्ञ’ का श्रीगणेश किया था। देखते ही देखते समाज के हर तबके के लोग उस यज्ञ में आहुतियाँ देने उमड़ पड़े थे। वह साइडिंग क्षेत्र यज्ञ मैदान बन गया था — और आज भी लोग उस जागरण को गौरव से याद करते हैं।

इस बार यज्ञ बाइकिंग का है, आहुतियाँ चाहिए हर वर्ग से

यदि आज एसपी मेहता द्वारा प्रारंभ किया गया ‘हेलमेट-बिथ-बाइकिंग महायज्ञ’ भी सभी वर्गों — प्रशासन, विद्यालय, स्वयंसेवी संस्थाओं और आमजन — की सहभागिता प्राप्त कर ले, तो यह सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि जामताड़ा का भविष्य बदलने वाला आंदोलन बन जाएगा।

समाज को अब यह तय करना है —

“क्या हम फिर एक बार यज्ञ मैदान बनाएँगे, या अपने सिर पर बिना हेलमेट लिए मौत को न्योता देते रहेंगे?”

एसपी की पहल ने चिंगारी सुलगा दी है। अब ज़िम्मेदारी है कि प्रशासनिक हवाएँ उसे आँधी बना दें। क्योंकि ‘प्राण रक्षा’ सबसे बड़ी सेवा है — और हेलमेट उसका सबसे छोटा उपाय।

NEWSANP के लिए जामताड़ा से आर.पी. सिंह कि रिपोर्ट

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