रांची(RANCHI): रांची में रिम्स-2 के निर्माण पर संकट के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं. राज्य सरकार ने पहले कांके के सुकुरहुटू में 102 एकड़ जमीन चिह्नित की थी, लेकिन विवाद के बाद अब कांके के नगड़ी में नई जमीन चिह्नित की गई है. हालांकि, इस नई जमीन पर भी विवाद बढ़ रहा है. ग्रामीणों के विरोध के बीच इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है.
नेता प्रतिपक्ष ने लिया जायजा, जताई आपत्ति
31 मई 2025 को नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने नगड़ी के विवादित स्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने राज्य सरकार से इस जमीन पर रिम्स-2 का निर्माण न करने का अनुरोध किया. रैयतों से मुलाकात के बाद मरांडी ने कहा कि यह जमीन कृषि योग्य है और यहां वर्षों से खेती हो रही है. उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को इसके आसपास 5-10 किलोमीटर के दायरे में बंजर जमीन पर निर्माण कराना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘राज्य में खाद्यान्न की कमी है. ऐसी उपजाऊ जमीन का इस तरह उपयोग करना उचित नहीं है. अगर सरकार को बंजर जमीन नहीं मिलती, तो हमें बताए, हम मदद करेंगे.’
बाबूलाल मरांडी ने दी आंदोलन की चेतावनी
बाबूलाल मरांडी ने चेतावनी दी कि यदि इस जमीन पर निर्माण कार्य नहीं रोका गया, तो बड़ा आंदोलन होगा, जिसमें राज्य भर के आदिवासी शामिल होंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस बहाने आदिवासियों को उनके खेतों से बेदखल कर रही है. उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि स्थानीय लोगों को खेती करने की अनुमति दी जाए, अन्यथा व्यापक आंदोलन किया जाएगा.
रिम्स-2 परियोजना और चुनौतियां
स्वास्थ्य विभाग ने रांची में 1,074 करोड़ रुपये की लागत से रिम्स-2 के निर्माण का निर्णय लिया है. इसके लिए 110 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी, जिस पर 700 बेड का अस्पताल बनेगा. इस परियोजना में स्नातक (UG) और 50 स्नातकोत्तर (PG) सीटों के लिए पढ़ाई की व्यवस्था की घोषणा की गई है. हालांकि, जमीन को लेकर चल रहे विवाद के कारण निकट भविष्य में इसका शिलान्यास होने की संभावना कम नजर आती है.
NEWSANP के लिए रांची से ब्यूरो रिपोर्ट

