हरचंडी गांव में सड़क दुर्घटना में महिला की मौत पर शोक की लहर, भाजपा नेत्री बबीता झा ने परिजनों से मिलकर दी सांत्वना और आर्थिक मदद…

हरचंडी गांव में सड़क दुर्घटना में महिला की मौत पर शोक की लहर, भाजपा नेत्री बबीता झा ने परिजनों से मिलकर दी सांत्वना और आर्थिक मदद…

जामताड़ा(JAMTADA):जिले के हरचंडी गांव में शनिवार को उस समय शोक का माहौल गहरा गया जब एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में गांव की 42 वर्षीय महिला प्रमिला सोरेन की असमय मृत्यु हो गई। इस घटना ने न सिर्फ उनके परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया, बल्कि पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार प्रमिला सोरेन एक मेहनती, सामाजिक और सदैव दूसरों की मदद को तत्पर रहने वाली महिला थीं, जिनकी जीवनयात्रा का इस तरह दुखद अंत होना सबको विचलित कर गया।

घटनाक्रम का विवरण:

जानकारी के अनुसार, प्रमिला सोरेन शनिवार की सुबह किसी आवश्यक कार्यवश सड़क पार कर रही थीं, तभी एक तेज गति से आ रही बाइक ने उन्हें टक्कर मार दी। स्थानीय लोगों ने उन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर जैसे ही गांव में पहुँची, मातम पसर गया और लोग उनके घर की ओर दौड़ पड़े।

भाजपा नेत्री बबीता झा ने जताया शोक, पहुंचीं परिजनों से मिलने

घटना की जानकारी मिलते ही भाजपा की वरिष्ठ नेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता बबीता झा हरचंडी गांव पहुँचीं। उन्होंने मृतका के परिजनों से मिलकर गहरी संवेदना प्रकट की और परिवार को ढांढस बंधाया। बबीता झा ने कहा,

“प्रमिला सोरेन जैसी मेहनती महिला की इस प्रकार असमय मौत अत्यंत पीड़ादायक है। यह केवल एक परिवार की नहीं, पूरे समाज की क्षति है। मैं और मेरी पूरी टीम इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़ी है।”

उन्होंने पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए तत्काल नकद आर्थिक सहायता भी प्रदान की और आश्वासन दिया कि आगे भी परिवार को हरसंभव सहयोग मिलेगा।

मानवता का परिचय देती संवेदनशील पहल

बबीता झा ने अपने संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण का परिचय देते हुए कहा कि आज समाज में राजनैतिक गतिविधियों से परे, मानवता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा,

“राजनीति सेवा का माध्यम होनी चाहिए, सत्ता का साधन नहीं। ऐसी घटनाएं हम सबको जिम्मेदारी और चेतना का एहसास कराती हैं। पीड़ित परिवार के साथ खड़ा होना हम सबका मानवीय कर्तव्य है।”

स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश और दुःख

हरचंडी गांव के अनेक ग्रामीण प्रमिला सोरेन की मौत से आहत हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रमिला बेहद मिलनसार महिला थीं और समाज में सभी के सुख-दुख में भाग लेती थीं। गांव की बुजुर्ग महिला सोनी मुर्मू ने कहा,

“प्रमिला दी हमारे त्योहारों, विवाहों और संकटों में सदा आगे रहती थीं। उनका जाना ऐसा खालीपन छोड़ गया है जिसे भर पाना मुश्किल है।”

सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल

भाजपा नेत्री बबीता झा ने इस दुखद घटना को सड़क सुरक्षा से भी जोड़ा और प्रशासन से आग्रह किया कि गांव के पास की सड़कों पर सुरक्षा चिन्ह, स्पीड ब्रेकर और ट्रैफिक नियंत्रण के उपाय किए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा,

“ग्रामीण सड़कों पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही पर अंकुश लगना चाहिए। प्रमिला सोरेन की मौत केवल एक हादसा नहीं, एक चेतावनी है। हमें जागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए।”

प्रशासन से सरकारी मुआवजे की मांग

बबीता झा ने मौके से ही प्रशासन से संपर्क साधा और प्रमिला सोरेन के परिजनों को आपदा राहत कोष, मुख्यमंत्री राहत निधि, या अनुग्रह अनुदान के तहत सहायता शीघ्र उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसी आपात स्थितियों में सरकारी सहायता में विलंब नहीं होना चाहिए।

भाजपा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी

इस अवसर पर भाजपा मंडल अध्यक्ष रमणी मरांडी, महिला मोर्चा की सक्रिय सदस्य सविता हेम्ब्रम, और अनेक स्थानीय कार्यकर्ता भी मौजूद थे। कार्यकर्ताओं ने भी मृतका के परिजनों को ढांढस बंधाया और कहा कि पार्टी संगठन उनके साथ खड़ा है।

गांव में न्याय और पुनर्वास की मांग

प्रमिला सोरेन की असामयिक मौत के बाद अब गांव के लोग प्रशासन से न्यायिक जांच, वाहन चालक की गिरफ्तारी, और पीड़ित परिवार के सामाजिक पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस पर कार्रवाई की मांग की है।

महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण की ओर एक नई दृष्टि

बबीता झा ने इस अवसर पर ग्रामीण महिलाओं को संबोधित करते हुए महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गांव की महिलाएं जागरूक बनें और संगठनात्मक रूप से एकजुट हों ताकि कोई भी अन्याय या हादसा अकेले न सहना पड़े।

“प्रमिला सोरेन जैसी महिला को हम कभी नहीं भूल पाएंगे, लेकिन उनके सपनों को जिंदा रखने के लिए हमें उनके परिवार को सशक्त करना होगा,” उन्होंने कहा।

ग्रामीणों की प्रतिक्रिया – एकजुटता की मिसाल

घटना के बाद गांव में असाधारण एकजुटता देखने को मिली। पड़ोसी, रिश्तेदार, युवा, महिला मंडल की सदस्य और पंचायत प्रतिनिधि सभी मृतका के घर पहुंचे और अपने स्तर से सहयोग दिया। यह एक प्रमाण था कि सामाजिक मूल्य आज भी जीवित हैं।

समाप्ति टिप्पणी: दुख को संकल्प में बदलने का संकल्प

प्रमिला सोरेन की मौत न सिर्फ एक निजी त्रासदी है, बल्कि एक सामाजिक प्रश्न भी है – क्या हम सड़क सुरक्षा, आपातकालीन चिकित्सा सुविधा, और संवेदनशील प्रशासनिक तंत्र को लेकर सजग हैं? भाजपा नेत्री बबीता झा की सक्रियता, संवेदनशीलता और तत्परता इस घटना को केवल समाचार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का मुद्दा बना देती है।

यह हादसा भले ही बीत गया हो, लेकिन इसका असर, इसकी पीड़ा और इससे जुड़ा संदेश लंबे समय तक लोगों के दिलों में रहेगा।

NEWSANP के लिए जामताडा से आर पी सिंह की रिपोर्ट

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