पूर्ववर्ती छात्रसंघ की बैठक में उभरा शैक्षणिक मार्गदर्शन और संस्थागत नवाचार का स्वर – मिहिजाम जनजातीय संध्या डिग्री महाविद्यालय बना प्रेरणास्रोत…

पूर्ववर्ती छात्रसंघ की बैठक में उभरा शैक्षणिक मार्गदर्शन और संस्थागत नवाचार का स्वर – मिहिजाम जनजातीय संध्या डिग्री महाविद्यालय बना प्रेरणास्रोत…

जामताड़ा(JAMTADA):झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्र मिहिजाम स्थित जनजातीय संध्या डिग्री महाविद्यालय में मंगलवार को आयोजित पूर्ववर्ती छात्रसंघ की बैठक ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि शिक्षा संस्थान केवल डिग्री प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सामाजिक दिशा निर्धारण का केंद्र भी होते हैं। महाविद्यालय के प्रांगण में पूर्व छात्रों का यह आत्मीय समागम न केवल संस्मरणों का आदान-प्रदान बना, बल्कि वर्तमान छात्र-छात्राओं के लिए एक प्रेरक शैक्षणिक संवाद और मार्गदर्शन का मंच भी सृजित हुआ।

पूर्ववर्ती छात्रों ने साझा की अपनी उपलब्धियां

बैठक में महाविद्यालय से स्नातक कर देश के विभिन्न हिस्सों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे या कार्यरत पूर्व छात्रों ने अपनी उपलब्धियों को साझा किया। खुशी कुमारी, मेघा कुमारी, धर्मेन्द्र तिवारी, विश्वजीत कुमार, ओमप्रकाश पासवान सहित अन्य पूर्ववर्ती विद्यार्थियों ने मंच से अपने शैक्षणिक अनुभवों एवं जीवन संघर्षों की प्रस्तुति दी। इन अनुभवों ने वर्तमान छात्रों को न केवल उत्साहित किया, बल्कि उन्हें यह भी दर्शाया कि सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित एक डिग्री महाविद्यालय से भी राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचना संभव है, यदि मार्गदर्शन और संसाधनों का उचित प्रयोग हो।

प्राचार्य का वक्तव्य : प्लेसमेंट और छात्र-कल्याण की दिशा में कार्यरत है महाविद्यालय

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. कृष्ण मोहन साह ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि महाविद्यालय प्रशासन छात्रों के विकास और उनकी समस्याओं के समाधान हेतु प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि—

“महाविद्यालय में प्लेसमेंट सेल, स्किल डेवलपमेंट प्रकोष्ठ, महिला सशक्तिकरण सेल जैसी कई उपयोगी इकाइयों का गठन किया गया है। ये सेल समय-समय पर विद्यार्थियों के लिए आवश्यक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।”

प्रो. साह ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार, राज्य सरकार और निजी कंपनियों के सहयोग से एप्रेंटिसशिप मेले तथा कौशल विकास शिविरों का आयोजन होता रहा है, जिनका लाभ अनेक छात्रों ने उठाया है। उन्होंने बैंकों के सहयोग से आयोजित क्विज़ प्रतियोगिताओं का भी उल्लेख किया, जिनके माध्यम से छात्र बौद्धिक रूप से समृद्ध हो रहे हैं।

‘दिशा-संकेतक’ बन सकते हैं पूर्व छात्र

प्राचार्य ने विशेष रूप से पूर्व छात्रों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि—

“पूर्ववर्ती छात्रसंघ, महाविद्यालय के वर्तमान छात्रों के लिए एक दिशा-सूचक की भूमिका निभा सकते हैं। आप सबकी जीवन यात्रा हमारे छात्रों के लिए एक जीवंत उदाहरण है।”

करियर के लिए लक्ष्य निर्धारण जरूरी : कृष्णकांत द्विवेदी

बैठक में कृष्णकांत द्विवेदी ने ‘फ्यूचर प्लान, प्रोजेक्ट्स और उद्देश्य’ पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने छात्रों को अपने करियर के प्रारंभिक चरण में ही स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण की सलाह दी और कहा कि—

“सटीक मार्गदर्शन के लिए अपने शिक्षण संस्थान के शिक्षकों से संवाद बनाए रखें। आपका लक्ष्य ही आपको सुदृढ़ दिशा देगा।”

मंच संचालन और धन्यवाद ज्ञापन

बैठक का मंच संचालन देवकी पंजियारा ने किया। उन्होंने कहा कि—

“आज की यह बैठक हमारे लिए कई मायनों में उपयोगी रही। छात्र जीवन से आगे बढ़ चुके साथियों की अनुभव यात्रा से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं।”

बैठक के अंत में राष्ट्रीय गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसके पश्चात प्रो. देवकी पंजियारा ने उपस्थितजनों का धन्यवाद ज्ञापन किया। सभी को महाविद्यालय प्रशासन की ओर से अल्पाहार भी कराया गया।

शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर महाविद्यालय के अनेक सम्मानित शिक्षक एवं शिक्षिकाएं उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से डॉ. सोमेन सरकार, डॉ. राकेश रंजन, शंभू सिंह, अरविंद कुमार सिन्हा, शबनम खातून, अमित सिंह, पुष्पा टोप्पो, डॉ. किरण बरनवाल, बासुकीनाथ प्रसाद, दिनेश किस्कु, रंजीत यादव, पूनम कुमारी, रामप्रकाश दास, रेखा शर्मा, और अभिजीत सिंह ख़रतौल शामिल रहे।

छात्रों की व्यापक भागीदारी

बैठक में महाविद्यालय के वर्तमान छात्र-छात्राओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। राजकुमार मिस्त्री, दिनेश रजक सहित दर्जनों विद्यार्थियों ने विभिन्न बिंदुओं पर प्रश्न भी पूछे, जिनका उत्तर वरिष्ठ छात्रों एवं शिक्षकों द्वारा दिया गया।

झारखंड के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता

झारखंड जैसे राज्य में जहाँ अब भी ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में उच्च शिक्षा और करियर मार्गदर्शन की कमी एक गंभीर चुनौती है, मिहिजाम जनजातीय संध्या डिग्री महाविद्यालय द्वारा आयोजित यह बैठक एक सकारात्मक दृष्टांत प्रस्तुत करती है। यह न केवल पूर्ववर्ती छात्रों की संस्थागत प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि स्थानीय महाविद्यालय भी रोज़गारोन्मुखी और लक्ष्य आधारित शिक्षा का मंच बन सकते हैं — यदि संस्थागत नेतृत्व और पूर्व छात्रों की सहभागिता हो।

इस प्रकार, यह आयोजन झारखंड के शिक्षा परिदृश्य में एक स्थानीय से वैश्विक (Local to Global) दृष्टिकोण की भावना को पुष्ट करता है और शिक्षा के माध्यम से सामाजिक पुनर्निर्माण की दिशा में एक सशक्त कदम के रूप में उभरता है।

NEWSANP के लिए धनबाद से आर पी सिंह की रिपोर्ट

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