झारखंड(JHARKHAND): : पलामू के लोमटाटार घाटी की चुप्पी एक बार फिर गोलियों से टूटी थी, पलामू के पांडू और हुसैनाबाद की पहाड़ियों के बीच फैले सन्नाटे को अचानक चीरती चली आईं गोलियों की आवाजें। एक तरफ पुलिस का काफिला था, दूसरी ओर छुपा बैठा था झारखंड का मोस्ट वांटेड तुलसी भुइयां, वही जिसने अपने AK 47 की गूंज से इलाके को दहला रखा था।
लेकिन इस बार सूचना पक्की थी। SP रीष्मा रमेशन ने तुरंत मोर्चा संभाला। अभियान ASP राकेश सिंह और हुसैनाबाद के SDPO मोहम्मद याकूब को बुलाया गया। जंगल में उतरने का फैसला हुआ, “इस बार किसी हाल में कोई छूटना नहीं चाहिए”। घंटों तक सर्च ऑपरेशन चलता रहा। फिर वह हुआ, जो गुजरे सात साल से नहीं हुआ था, तुलसी भुइयां की लाश, AK-47 के साथ जमीन पर पड़ी थी। उसके इर्द-गिर्द खोखे और गोलियां बिखरे पड़े थे। कुछ नक्सली भाग निकले। SP रीष्मा रमेशन ने ऐलान किया है कि “बचे हुये नक्सली जल्द खत्म होंगे।” उन्होंने नक्सलियों से अपील की है कि वे सरेंडर कर दें। सरकार की नीति उनके लिए रास्ता है। वरना यही अंजाम होगा। जंगल की वीरानी में तुलसी भुइयां का मारा जाना एक नया संदेश दे गया कि “अब नक्सलियों की रातें गिनी जा चुकी हैं।” पलामू की धरती पर पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है।
NEWSANP के लिए झारखंड से ब्यूरो रिपोर्ट

