ज्येष्ठ प्रदोष और वट सावित्री व्रत की पूर्व संध्या पर शिवालय में दिव्य दर्शन…

ज्येष्ठ प्रदोष और वट सावित्री व्रत की पूर्व संध्या पर शिवालय में दिव्य दर्शन…

जामताड़ा(JAMTARA):ॐ नमः शिवाय”
ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी की संध्या पर चित्तरंजन स्टेशन रोड स्थित शिवालय परिषद महादेव मंदिर में प्रदोष कालीन आरती के पवित्र अवसर पर भगवान शिव का मनोहारी श्रृंगार किया गया। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अलौकिक अनुभूति से भरा रहा।

2. तिर्थ पुरोहित की साधना से साकार हुआ अद्भुत रूप

“शिवाय नमस्तुभ्यं”
मंदिर में विराजमान देवाधिदेव महादेव का यह दिव्य रूप तिर्थ पुरोहित की घंटों की साधना, श्रम और श्रद्धा का परिणाम था। संध्या होते ही जैसे ही दीप जले, पूरे परिसर में भक्ति की लहर दौड़ गई।

3. नर्मदेश्वर शिवलिंग: जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति

“दारिद्र्यदुःखदहनं शिवनामस्मरणं सदा”
यहाँ स्वयंभू नर्मदेश्वर शिवलिंग विराजमान हैं, जिनके दर्शन मात्र से जन्मों-जन्म के पाप ताप का अंत हो जाता है। श्रद्धालु इस दिव्य लिंग को देखकर भावविभोर हो उठते हैं।

4. त्रिपुंड भस्म और कुमकुम का सौम्य श्रृंगार

“त्रिपुण्ड्रं भस्मधारणं शिवस्य लक्षणं सदा”
महादेव के मस्तक पर सफेद भस्म का त्रिपुण्ड और मध्य में लगा कुमकुम का तिलक – यह रूप हृदय को शीतलता और भक्ति से भर देता है। शिव का यह मनोहर स्वरूप दर्शकों को मंत्रमुग्ध करता रहा।

5. फूलों-अबीर से रचा गया अनोखा अलंकरण

“पुष्पैः पूजयेद्देवं”
महादेव को लाल गुलाब, पीले गेंदा फूल, और लाल अबीर से सुसज्जित किया गया। फूलों की पंखुड़ियों और अबीर से बना मंडल उनके चारों ओर दिव्य आभा बिखेर रहा था। यह सजावट श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही।

6. पंचतत्वों का दीपक: जलती गोल बत्ती का प्रतीकात्मक स्वरूप

दीपक में जल रही गोल बत्ती को पंचतत्व – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश – का प्रतीक माना गया। यह दीप महादेव की उपस्थिति में सृष्टि की एकता और ध्यान की स्थिरता का प्रतीक था।

7. सावित्री व्रत की पूर्व संध्या पर शिव का विशेष महत्व

“नमः शिवाय शान्ताय मृत्युञ्जयाय नमः”
ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी को वट सावित्री व्रत मनाया जाएगा, जब पतिव्रता सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज से वापिस पाया था। ऐसे पुण्य अवसर की पूर्व संध्या पर शिव का यह श्रृंगार करोड़ों गुना फलदायी माना गया।

8. दर्शन करने वालों की श्रद्धा और भक्ति में वृद्धि

पूरे मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। महादेव के दर्शन करते ही आस्था, भक्ति और शांति की अनुभूति हर भक्त के मन में स्पष्ट दिखाई दी।

9. संध्या आरती में गूंजे शिव मंत्र

“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”
संध्या आरती के समय मंत्रोच्चारण से वातावरण शिवमय हो गया। भजनों और घंटियों की ध्वनि से मंदिर परिसर गूंज उठा।

10. श्रद्धा और भक्ति से सजी शिव महोत्सव की झलक

यह श्रृंगार, भक्ति, साधना और शिव आराधना का अद्वितीय संगम था। शिव की कृपा पाने हेतु इस रात मंदिर में प्रदोष व्रतधारियों और शिवभक्तों की विशेष उपस्थिति रही।

समापन मंत्र:
“शिवो भूतेश्वरः साक्षात् शिवो रक्षतु नः सदा”
भगवान शिव का यह रूप न केवल श्रद्धालुओं के लिए दर्शनीय रहा, बल्कि आत्मा को जागृत करने वाला, शांत और शक्तिशाली अनुभव भी प्रदान करता है।

NEWSANP के लिए जामताड़ा से आर पी सिंह की रिपोर्ट

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