वेद-पौराणिक परंपराओं के बीच शिवधाम में शिव-पार्वती प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा, गूंजे वैदिक मंत्र, जागा धर्मानुष्ठान का आलोक”…

वेद-पौराणिक परंपराओं के बीच शिवधाम में शिव-पार्वती प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा, गूंजे वैदिक मंत्र, जागा धर्मानुष्ठान का आलोक”…

शिवधाम में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ शिव-पार्वती प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न

जामताड़ा(JAMTADA):जामताड़ा शहर के कोर्ट रोड स्थित शिवधाम मोहल्ले के शिव मंदिर में वैदिक परंपरा एवं पौराणिक विधि-विधान के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इस अवसर पर काशी से आमंत्रित विद्वान आचार्यों और स्थानीय प्रतिष्ठित पुरोहितों के वैदिक मंत्रोच्चारण से संपूर्ण क्षेत्र गूंज उठा।

पौराणिक पृष्ठभूमि और धार्मिक महात्म्य

वेदों और पुराणों के अनुसार मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का अर्थ है – उसमें दैविक चेतना का संचार। यह वही क्षण होता है जब पत्थर की मूर्ति देवत्व का प्रतीक बन जाती है।

  • स्कंदपुराण एवं शिवमहापुराण में उल्लेखित है कि “जहां वैदिक विधि से शिव और शक्ति की प्रतिष्ठा होती है, वहां स्वयं कैलाश का वास होता है।”
  • यह अनुष्ठान धर्म की पुनःस्थापना, भक्तों की श्रद्धा को मूर्त रूप देने और संस्कृति के संजीवन का कार्य करता है।

खंडित प्रतिमा के स्थान पर स्थापित हुई नव प्रतिमा

मंदिर समिति के अनुसार पूर्व में स्थापित माता पार्वती की प्रतिमा खंडित हो जाने के कारण पूजन में बाधा उत्पन्न हो रही थी। श्रद्धालुओं की इस पीड़ा को देखते हुए समाजसेवी एवं वरिष्ठ भाजपा नेता हरिमोहन मिश्रा के सहयोग से नई प्रतिमा की स्थापना का निर्णय लिया गया।

धार्मिक आयोजन और अष्टयाम यज्ञ का शुभारंभ

  • प्राण प्रतिष्ठा के साथ 24 घंटे का अष्टयाम यज्ञ,
  • सांस्कृतिक एवं भजन संध्या जैसे आयोजन भी प्रारंभ हुए।
  • सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में धार्मिक आस्था और सामाजिक सहभागिता का अनूठा संगम देखने को मिला।

हरिमोहन मिश्रा का वक्तव्य: सनातन धर्म की सेवा को सौभाग्य मानता हूं

समाजसेवी हरिमोहन मिश्रा ने कहा,

सनातन संस्कृति की रक्षा, मंदिरों के पुनर्निर्माण और धार्मिक चेतना के जागरण में मेरी सहभागिता निरंतर रही है। यह मेरे लिए गर्व का विषय है कि शिवधाम मोहल्ले में उमानाथ मंदिर में पुनः भगवान शिव एवं माता पार्वती की प्रतिमाहेडलाइन्स:
“वेद-पौराणिक परंपराओं के बीच शिवधाम में शिव-पार्वती प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा, गूंजे वैदिक मंत्र, जागा धर्मानुष्ठान का आलोक”

शिवधाम में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ शिव-पार्वती प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न

स्थान: जामताड़ा | तिथि: (दिनांक अनुसार अद्यतन करें)

जामताड़ा शहर के कोर्ट रोड स्थित शिवधाम मोहल्ले के शिव मंदिर में वैदिक परंपरा एवं पौराणिक विधि-विधान के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इस अवसर पर काशी से आमंत्रित विद्वान आचार्यों और स्थानीय प्रतिष्ठित पुरोहितों के वैदिक मंत्रोच्चारण से संपूर्ण क्षेत्र गूंज उठा।

पौराणिक पृष्ठभूमि और धार्मिक महात्म्य

वेदों और पुराणों के अनुसार मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का अर्थ है – उसमें दैविक चेतना का संचार। यह वही क्षण होता है जब पत्थर की मूर्ति देवत्व का प्रतीक बन जाती है।

  • स्कंदपुराण एवं शिवमहापुराण में उल्लेखित है कि “जहां वैदिक विधि से शिव और शक्ति की प्रतिष्ठा होती है, वहां स्वयं कैलाश का वास होता है।”
  • यह अनुष्ठान धर्म की पुनःस्थापना, भक्तों की श्रद्धा को मूर्त रूप देने और संस्कृति के संजीवन का कार्य करता है।

खंडित प्रतिमा के स्थान पर स्थापित हुई नव प्रतिमा

मंदिर समिति के अनुसार पूर्व में स्थापित माता पार्वती की प्रतिमा खंडित हो जाने के कारण पूजन में बाधा उत्पन्न हो रही थी। श्रद्धालुओं की इस पीड़ा को देखते हुए समाजसेवी एवं वरिष्ठ भाजपा नेता हरिमोहन मिश्रा के सहयोग से नई प्रतिमा की स्थापना का निर्णय लिया गया।

धार्मिक आयोजन और अष्टयाम यज्ञ का शुभारंभ

  • प्राण प्रतिष्ठा के साथ 24 घंटे का अष्टयाम यज्ञ,
  • सांस्कृतिक एवं भजन संध्या जैसे आयोजन भी प्रारंभ हुए।
  • सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में धार्मिक आस्था और सामाजिक सहभागिता का अनूठा संगम देखने को मिला।

हरिमोहन मिश्रा का वक्तव्य: सनातन धर्म की सेवा को सौभाग्य मानता हूं

समाजसेवी हरिमोहन मिश्रा ने कहा,

सनातन संस्कृति की रक्षा, मंदिरों के पुनर्निर्माण और धार्मिक चेतना के जागरण में मेरी सहभागिता निरंतर रही है। यह मेरे लिए गर्व का विषय है कि शिवधाम मोहल्ले में उमानाथ मंदिर में पुनः भगवान शिव एवं माता पार्वती की प्रतिमा को प्रतिष्ठित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।”

यह आयोजन न केवल धार्मिक उत्सव था, बल्कि स्थानीय समाज में सांस्कृतिक चेतना और धार्मिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन गया। श्रद्धालु समुदाय इसे एक पवित्र नवयुग की शुरुआत के रूप में देख रहा है।

यदि आप चाहें तो मैं इस सामग्री का विस्तारित संस्करण वेब आर्टिकल या विशेष फीचर के रूप में भी तैयार कर सकता हूँ, जिसमें पौराणिक शास्त्रों के संदर्भ, आयोजन का दृश्य वर्णन और श्रद्धालुओं की प्रतिक्रियाएं सम्मिलित होंगी।
को प्रतिष्ठित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।”

यह आयोजन न केवल धार्मिक उत्सव था, बल्कि स्थानीय समाज में सांस्कृतिक चेतना और धार्मिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन गया। श्रद्धालु समुदाय इसे एक पवित्र नवयुग की शुरुआत के रूप में देख रहा है।

NEWSANP के लिए जामताड़ा से आर पी सिंह की रिपोर्ट

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