चीन का डबल गेम उजागर: एक ओर पहलगाम हमले की निंदा, दूसरी ओर पाकिस्तान से ‘लोहे जैसी दोस्ती’, अब शांति की बात…

चीन का डबल गेम उजागर: एक ओर पहलगाम हमले की निंदा, दूसरी ओर पाकिस्तान से ‘लोहे जैसी दोस्ती’, अब शांति की बात…

नई दिल्ली(NEW DELHI): भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम के बीच चीन का दोहरा रवैया एक बार फिर सामने आया है। एक ओर चीन ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और भारत को आतंकवाद के खिलाफ सहयोग का आश्वासन दिया, वहीं दूसरी ओर उसने पाकिस्तान को अपना “आयरन क्लैड फ्रेंड” (लोहे जैसा अटूट मित्र) बताते हुए उसे खुला समर्थन देना जारी रखा है।

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार से फोन पर बातचीत कर पाकिस्तान के साथ चीन की 58 वर्षों पुरानी गहरी दोस्ती को दोहराया। उन्होंने कहा कि चीन भारत और पाकिस्तान का पड़ोसी है, और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच रचनात्मक भूमिका निभाने को तैयार है।

हालांकि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से बातचीत में वांग यी ने आतंकवाद की निंदा की और पहलगाम हमले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह चीन की दोमुंही नीति का हिस्सा है।

चीन का डबल गेम उजागर: चीन की “डबल गेम” रणनीति:

भारत के साथ – आतंकवाद की निंदा और शांति की अपील

पाकिस्तान के साथ – मजबूत सैन्य और रणनीतिक साझेदारी का दोहराव

वैश्विक स्तर पर – शांति स्थापना का दावा और मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश

चीन ने संघर्षविराम समझौते का समर्थन करते हुए कहा कि वह उम्मीद करता है कि भारत और पाकिस्तान संयम बरतें और मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाएं। लेकिन भारत के रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चीन का एक “रणनीतिक संतुलन” खेल है, जिसमें वह दिखावटी शांति की बात कर अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने की कोशिश कर रहा है, जबकि वास्तव में वह पाकिस्तान को कूटनीतिक और सैन्य तौर पर मजबूत बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।

इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने चीन का आभार जताते हुए कहा कि, “चीन पिछले 58 वर्षों से हमारे साथ खड़ा है और संघर्षविराम में उसकी भूमिका अहम रही।”

हालांकि, भारत ने इस कथित मध्यस्थता के दावे को खारिज कर दिया है। भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह समझौता पूरी तरह से भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय वार्ता का परिणाम है, और इसमें किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं रही।

चीन का डबल गेम उजागर: विशेषज्ञों का मत:
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चीन की यह नीति “जैनस सिद्धांत” जैसी है – दो चेहरे लेकर दुनिया के सामने खड़ा होना। एक ओर वह आतंकवाद के विरोधी का मुखौटा पहनता है, और दूसरी ओर वह उन देशों का समर्थन करता है जो आतंकवाद की शरणस्थली माने जाते हैं।

NEWSANP के लिए नई दिल्ली से ब्यूरो रिपोर्ट

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